गुरदयाल सिंह – सपनों के-से दिन — Class 10 Hindi
संचयन भाग-2 · Chapter 2
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Chapter summary
Key ideas & terms
- संस्मरण
- बीते जीवन की स्मृतियों पर आधारित लेखन।
- मास्टर प्रीतम चंद
- लेखक के कठोर पर समर्पित अध्यापक।
- बाल-जीवन
- लेखक के बचपन और खेल-कूद की यादें।
- शिक्षा-व्यवस्था
- उस दौर की कठोर, दंड-आधारित पढ़ाई।
- स्कूल का डर
- बच्चों का पढ़ाई और दंड के प्रति भय।
- गुरदयाल सिंह
- इस संस्मरण के लेखक।
Extra questions & answers
यह पाठ किस विधा की रचना है?
यह लेखक के बचपन और स्कूली जीवन का संस्मरण है।
उस समय अधिकांश बच्चे स्कूल क्यों नहीं जाना चाहते थे?
क्योंकि पढ़ाई बोझ लगती थी और अध्यापक प्रायः कठोर दंड देते थे, जिससे बच्चों को स्कूल से डर लगता था।
मास्टर प्रीतम चंद कैसे अध्यापक थे?
वे कठोर थे, पर अनुशासन और शिक्षा के सच्चे महत्त्व को समझने वाले समर्पित अध्यापक थे।
संस्मरण मुख्यतः क्या दर्शाता है?
बचपन की मासूमियत, खेल और उस दौर की कठिन शिक्षा-व्यवस्था, विशेषकर गरीब बच्चों के लिए।
‘सपनों के-से दिन’ किसकी और किस विधा की रचना है?
यह गुरदयाल सिंह का संस्मरण है, जो उनके बचपन और स्कूली जीवन का चित्रण करता है।
उस समय अधिकांश बच्चे स्कूल क्यों नहीं जाना चाहते थे?
क्योंकि पढ़ाई बोझ लगती थी और अध्यापक प्रायः कठोर दंड देते थे, जिससे बच्चों को स्कूल से डर लगता था।
मास्टर प्रीतम चंद कैसे अध्यापक थे?
वे कठोर थे, पर अनुशासन और शिक्षा के सच्चे महत्त्व को समझने वाले समर्पित अध्यापक थे।
पाठ में किस वर्ग के बच्चों के लिए शिक्षा कठिन बताई गई है?
गरीब परिवारों के बच्चों के लिए शिक्षा बहुत कठिन और दूर की बात थी।
लेखक बचपन के दिनों को क्या कहते हैं और क्यों?
लेखक बीते मधुर बचपन को ‘सपनों के-से दिन’ कहते हैं, क्योंकि वे खेल-कूद, मस्ती और मासूमियत से भरे थे।
संस्मरण मुख्यतः क्या दर्शाता है?
बचपन की मासूमियत, खेल और उस दौर की कठोर शिक्षा-व्यवस्था को।


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