रामवृक्ष बेनीपुरी – बालगोबिन भगत — Class 10 Hindi
क्षितिज भाग-2 · Chapter 8
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Chapter summary
Key ideas & terms
- बालगोबिन भगत
- गृहस्थ होते हुए भी साधु-जैसा जीवन जीने वाले सच्चे संत।
- कबीरपंथी
- कबीर के अनुयायी; भगत कबीर को अपना ‘साहब’ मानते हैं।
- रेखाचित्र
- किसी व्यक्ति का शब्दों में खींचा गया जीवंत चित्र।
- भक्ति
- भगत की ईश्वर के प्रति निश्छल श्रद्धा।
- अनुशासन
- भगत का अपने नियमों का दृढ़ता से पालन।
- मृत्यु-उत्सव
- पुत्र की मृत्यु को आत्मा-परमात्मा का मिलन मानकर उत्सव की तरह लेना।
Extra questions & answers
बालगोबिन भगत गृहस्थ होते हुए भी साधु क्यों कहलाते थे?
क्योंकि वे सत्यवादी थे, किसी की वस्तु बिना अनुमति नहीं लेते थे, कबीर के आदर्शों पर चलते थे और सादा, संयमी जीवन जीते थे।
भगत ने अपने बेटे की मृत्यु पर शोक के बजाय क्या किया?
उन्होंने उसे आत्मा का परमात्मा से मिलन मानकर उत्सव की तरह लिया और रोने के बजाय भजन-गान किया।
भगत ने पुत्रवधू के साथ क्या किया?
उन्होंने उसे पुनर्विवाह के लिए विवश किया ताकि उसका जीवन अकेला और सूना न रहे।
यह रेखाचित्र किन आदर्शों को प्रस्तुत करता है?
सच्ची भक्ति, सत्य, अनुशासन, निःस्वार्थता और निश्छल मानवता के आदर्श।
‘बालगोबिन भगत’ किस विधा की रचना है और इसके लेखक कौन हैं?
यह एक रेखाचित्र है और इसके लेखक रामवृक्ष बेनीपुरी हैं।
बालगोबिन भगत गृहस्थ होते हुए भी साधु क्यों कहलाते थे?
क्योंकि वे सत्यवादी थे, किसी की वस्तु बिना अनुमति नहीं लेते थे, कबीर के आदर्शों पर चलते थे और सादा, संयमी जीवन जीते थे।
भगत किसे अपना ‘साहब’ मानते थे और अपनी उपज किसे अर्पित करते थे?
वे कबीर को अपना साहब मानते थे और अपनी खेती की उपज पहले कबीरपंथी मठ को अर्पित करते थे।
अपने बेटे की मृत्यु पर भगत ने क्या किया?
उन्होंने शोक के बजाय उसे आत्मा का परमात्मा से मिलन मानकर उत्सव की तरह लिया और भजन-गान किया।
भगत ने अपनी पुत्रवधू के साथ क्या किया और क्यों?
उन्होंने उसे पुनर्विवाह के लिए विवश किया, ताकि उसका जीवन अकेला और सूना न रहे।
यह रेखाचित्र किन आदर्शों को प्रस्तुत करता है?
सच्ची भक्ति, सत्य, अनुशासन, निःस्वार्थता और निश्छल मानवता के आदर्श।


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