यशपाल – लखनवी अंदाज़ — Class 10 Hindi
क्षितिज भाग-2 · Chapter 9
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Chapter summary
Key ideas & terms
- नवाब साहब
- दिखावे और झूठी शान में जीने वाला पात्र।
- खीरा
- दिखावे का प्रतीक; नवाब उसे खाते नहीं, केवल सूँघते हैं।
- नफ़ासत
- अत्यधिक नाज़ुकता और बनावटी शिष्टता।
- व्यंग्य
- झूठी कुलीनता पर लेखक का करारा प्रहार।
- झूठी शान
- दिखावे को वास्तविकता से अधिक महत्त्व देना।
- लखनवी अंदाज़
- लखनऊ की बनावटी नफ़ासत और तहज़ीब का अंदाज़।
Extra questions & answers
नवाब साहब ने खीरे के साथ क्या किया?
उन्होंने खीरे काटे, नमक-मिर्च लगाए, सूँघे और बिना खाए खिड़की से बाहर फेंक दिए।
नवाब खीरा खाने के बजाय केवल सूँघकर क्यों रह गए?
अपनी झूठी शान दिखाने के लिए, यह जताने को कि खीरा खाना उनकी कुलीनता के विरुद्ध है।
इस कहानी में लेखक किस पर व्यंग्य करते हैं?
झूठी कुलीनता, बनावटी शिष्टता और दिखावे की उस प्रवृत्ति पर जिसमें वास्तविकता से अधिक दिखावे को महत्त्व दिया जाता है।
यह पाठ लेखक की किस कला को दर्शाता है?
बिना किसी ठोस कथानक के भी सशक्त व्यंग्य और रचना रच सकने की कला को।
‘लखनवी अंदाज़’ के लेखक कौन हैं और यह किस प्रकार की रचना है?
इसके लेखक यशपाल हैं और यह एक व्यंग्य-रचना है।
लेखक की भेंट किससे और कहाँ होती है?
रेलगाड़ी के डिब्बे में लेखक की भेंट एक नवाब साहब से होती है।
नवाब साहब ने खीरों के साथ अंततः क्या किया?
उन्होंने खीरे काटे, नमक-मिर्च लगाए, सूँघे और बिना खाए खिड़की से बाहर फेंक दिए।
नवाब खीरा खाने के बजाय केवल सूँघकर क्यों रह गए?
अपनी झूठी शान दिखाने के लिए, यह जताने को कि खीरा खाना उनकी कुलीनता के विरुद्ध है।
इस रचना में लेखक किस पर व्यंग्य करते हैं?
झूठी कुलीनता, बनावटी नफ़ासत और दिखावे की उस प्रवृत्ति पर जिसमें वास्तविकता से अधिक दिखावे को महत्त्व दिया जाता है।
यह पाठ लेखक की किस कला को दर्शाता है?
बिना किसी ठोस कथानक के भी सशक्त व्यंग्य और रचना रच सकने की कला को।


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