नागार्जुन – यह दंतुरित मुसकान, फसल — Class 10 Hindi
क्षितिज भाग-2 · Chapter 5
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Chapter summary
Key ideas & terms
- दंतुरित मुसकान
- शिशु के नए दाँत निकलने पर खिली मधुर मुसकान।
- शिशु
- वह छोटा बच्चा जिसकी मुसकान का कोमल चित्रण किया गया है।
- फसल
- अनेक तत्वों और लोगों के सामूहिक श्रम का परिणाम।
- सामूहिक श्रम
- अनगिनत लोगों का परिश्रम जिससे फसल तैयार होती है।
- लोक-जीवन
- नागार्जुन की कविता का आधार — साधारण जन का जीवन।
- नागार्जुन
- जनवादी चेतना के कवि और इन कविताओं के रचयिता।
Extra questions & answers
‘यह दंतुरित मुसकान’ में शिशु की मुसकान का क्या प्रभाव बताया गया है?
वह इतनी मनोहर है कि मृतक में भी जान डाल दे और कठोर हृदय को भी पिघला दे।
कवि शिशु की मुसकान की तुलना किससे करते हैं?
मानो कमल के फूल तालाब छोड़कर उनके झोपड़ी के आँगन में खिल उठे हों।
‘फसल’ कविता का मुख्य भाव क्या है?
फसल किसी एक का नहीं, बल्कि नदियों के जल, मिट्टी के गुण, सूरज की किरणों और अनेक लोगों के सामूहिक श्रम का परिणाम है।
इन कविताओं से नागार्जुन की कौन-सी दृष्टि प्रकट होती है?
लोक-जीवन से जुड़ी, सरल, संवेदनशील और श्रम का सम्मान करने वाली दृष्टि।
‘यह दंतुरित मुसकान’ में किसका चित्रण है?
इसमें एक छोटे शिशु की दाँत निकलने पर खिली हुई मधुर, निश्छल मुसकान का कोमल चित्रण है।
शिशु की मुसकान का क्या प्रभाव बताया गया है?
वह इतनी मनोहर है कि मृतक में भी जान डाल दे और कठोर से कठोर हृदय को भी पिघला दे।
कवि शिशु की मुसकान की तुलना किससे करते हैं?
मानो कमल के फूल तालाब छोड़कर उनकी झोपड़ी के आँगन में खिल उठे हों।
‘फसल’ कविता का मुख्य भाव क्या है?
फसल किसी एक का नहीं, बल्कि अनेक नदियों के जल, मिट्टी के गुण, सूरज की किरणों और अनगिनत लोगों के सामूहिक श्रम का परिणाम है।
‘फसल’ कविता किस मूल्य को रेखांकित करती है?
यह सामूहिक श्रम और उसके सम्मान के मूल्य को रेखांकित करती है।
इन कविताओं से नागार्जुन की कौन-सी दृष्टि प्रकट होती है?
लोक-जीवन से जुड़ी, सरल, संवेदनशील और श्रम का सम्मान करने वाली दृष्टि।


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