यतीन्द्र मिश्र – नौबतखाने में इबादत — Class 10 Hindi
क्षितिज भाग-2 · Chapter 11
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Chapter summary
Key ideas & terms
- बिस्मिल्ला ख़ाँ
- विश्वप्रसिद्ध शहनाई-वादक जिनका जीवन इस पाठ में चित्रित है।
- शहनाई
- वह मांगलिक वाद्य जिसे बिस्मिल्ला ख़ाँ ने शास्त्रीय ऊँचाई तक पहुँचाया।
- काशी
- बनारस — बिस्मिल्ला ख़ाँ की संगीत-साधना और श्रद्धा का केंद्र।
- इबादत
- उपासना; बिस्मिल्ला ख़ाँ संगीत को सच्ची इबादत मानते थे।
- धार्मिक सहिष्णुता
- विभिन्न धर्मों के प्रति आदर — पाठ का प्रमुख भाव।
- नौबतखाना
- मंदिर/महल का वह स्थान जहाँ मांगलिक अवसरों पर वाद्य बजते हैं।
Extra questions & answers
बिस्मिल्ला ख़ाँ ने शहनाई को किस प्रकार महत्त्व दिलाया?
उन्होंने इस मांगलिक वाद्य को शास्त्रीय संगीत की ऊँचाई तक पहुँचाकर विश्व-प्रसिद्ध बना दिया।
पाठ में धार्मिक सहिष्णुता कैसे प्रकट होती है?
मुसलमान होते हुए भी बिस्मिल्ला ख़ाँ काशी, गंगा और बालाजी के प्रति अपार श्रद्धा रखते थे और संगीत को इबादत मानते थे।
बिस्मिल्ला ख़ाँ के व्यक्तित्व की प्रमुख विशेषताएँ क्या थीं?
सादगी, विनम्रता, गहरी संगीत-साधना और अधिक अच्छा बजाने के लिए ईश्वर से निरंतर प्रार्थना।
‘नौबतखाने में इबादत’ शीर्षक का क्या आशय है?
कि बिस्मिल्ला ख़ाँ के लिए नौबतखाने में शहनाई बजाना केवल कला नहीं, बल्कि ईश्वर की सच्ची उपासना थी।
यह पाठ किस महान कलाकार पर आधारित है और इसके लेखक कौन हैं?
यह शहनाई-वादक उस्ताद बिस्मिल्ला ख़ाँ पर आधारित है और इसके लेखक यतीन्द्र मिश्र हैं।
बिस्मिल्ला ख़ाँ की संगीत-साधना का केंद्र कौन-सा नगर था?
उनकी साधना काशी (बनारस), वहाँ के बालाजी मंदिर और गंगा के घाटों से जुड़ी थी।
पाठ में धार्मिक सहिष्णुता कैसे प्रकट होती है?
मुसलमान होते हुए भी बिस्मिल्ला ख़ाँ काशी, गंगा और बालाजी के प्रति अपार श्रद्धा रखते थे और संगीत को सच्ची इबादत मानते थे।
बिस्मिल्ला ख़ाँ ने शहनाई को क्या दिलाया?
उन्होंने इस मांगलिक वाद्य को शास्त्रीय संगीत की ऊँचाई और विश्व-प्रसिद्धि तक पहुँचाया।
बिस्मिल्ला ख़ाँ के व्यक्तित्व की प्रमुख विशेषताएँ क्या थीं?
सादगी, विनम्रता, गहरी संगीत-साधना और अधिक अच्छा बजाने के लिए ईश्वर से निरंतर प्रार्थना करना।
‘नौबतखाने में इबादत’ शीर्षक का क्या आशय है?
कि बिस्मिल्ला ख़ाँ के लिए नौबतखाने में शहनाई बजाना केवल कला नहीं, बल्कि ईश्वर की सच्ची उपासना थी।


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