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सुमित्रानंदन पंत – पर्वत प्रदेश में पावस — Class 10 Hindi

स्पर्श भाग-2 · Chapter 5

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Chapter summary

छायावादी कवि सुमित्रानंदन पंत की यह कविता वर्षा-ऋतु में पर्वतीय प्रदेश की बदलती, मनोरम प्राकृतिक छवियों का सजीव चित्रण करती है। कवि बताते हैं कि पावस (वर्षा) ऋतु में पर्वतीय प्रकृति का रूप क्षण-क्षण में बदलता रहता है। तालाब पर्वत के विशाल दर्पण जैसा लगता है जिसमें ऊँचे वृक्ष अपने सौंदर्य को निहारते प्रतीत होते हैं; झरने मोतियों की लड़ियों जैसे झरते हैं और मानो पर्वत का यश गा रहे हों। बादलों के घिरने से ऊँचे पर्वत भी अदृश्य हो जाते हैं और ऐसा लगता है मानो धरती पर पंख लगाकर पर्वत उड़ गए हों। कवि प्रकृति के इस परिवर्तनशील, रहस्यमय और सुंदर रूप का मानवीकरण करते हुए चित्रण करते हैं। यह कविता पंत के सूक्ष्म प्रकृति-निरीक्षण, कल्पना और छायावादी सौंदर्य-चेतना का सुंदर उदाहरण है।
वर्षा-ऋतु में पर्वतीय सौंदर्यप्रकृति का मानवीकरणतालाब और झरनों की उपमाएँप्रकृति की परिवर्तनशीलताछायावादी चित्रण

Key ideas & terms

पावस
वर्षा-ऋतु, जिसका कविता में चित्रण है।
मानवीकरण
प्रकृति को मानव-जैसा रूप देकर चित्रित करना।
दर्पण
तालाब की वह उपमा जिसमें वृक्ष अपना सौंदर्य निहारते हैं।
झरने
मोतियों की लड़ियों जैसे झरते जलप्रपात।
परिवर्तनशीलता
पर्वतीय प्रकृति का क्षण-क्षण बदलता रूप।
छायावाद
कोमल कल्पना और सौंदर्य-प्रधान काव्य-धारा।

Extra questions & answers

कविता में तालाब की तुलना किससे की गई है?

पर्वत के विशाल दर्पण से, जिसमें ऊँचे वृक्ष अपना सौंदर्य निहारते प्रतीत होते हैं।

झरनों का चित्रण कवि ने कैसे किया है?

मोतियों की लड़ियों जैसे झरते हुए, मानो वे पर्वत का यश गा रहे हों।

बादल घिरने पर पर्वतों की क्या दशा होती है?

ऊँचे पर्वत बादलों में अदृश्य हो जाते हैं, मानो पंख लगाकर उड़ गए हों।

यह कविता पंत की किस विशेषता को दर्शाती है?

सूक्ष्म प्रकृति-निरीक्षण, कल्पनाशीलता और छायावादी सौंदर्य-चेतना को।

इस कविता के कवि कौन हैं और यह किस ऋतु का चित्रण करती है?

इसके कवि सुमित्रानंदन पंत हैं; यह वर्षा (पावस) ऋतु में पर्वतीय सौंदर्य का चित्रण करती है।

कविता में तालाब की तुलना किससे की गई है?

तालाब को पर्वत के विशाल दर्पण-सा बताया गया है, जिसमें ऊँचे वृक्ष अपना सौंदर्य निहारते प्रतीत होते हैं।

झरनों का चित्रण कवि ने कैसे किया है?

झरने मोतियों की लड़ियों जैसे झरते हैं, मानो वे पर्वत का यश गा रहे हों।

बादल घिरने पर ऊँचे पर्वतों की क्या दशा होती है?

ऊँचे पर्वत बादलों में अदृश्य हो जाते हैं, मानो पंख लगाकर उड़ गए हों।

कविता में प्रकृति को किस रूप में चित्रित किया गया है?

प्रकृति को परिवर्तनशील, रहस्यमय और मानवीकृत रूप में चित्रित किया गया है।

यह कविता पंत की किस विशेषता को दर्शाती है?

सूक्ष्म प्रकृति-निरीक्षण, कल्पनाशीलता और छायावादी सौंदर्य-चेतना को।