मधु कांकरिया – साना-साना हाथ जोड़ि — Class 10 Hindi
कृतिका भाग-2 · Chapter 2
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Chapter summary
Key ideas & terms
- यात्रा-वृत्तांत
- किसी यात्रा के अनुभवों का वर्णन करने वाली विधा।
- गंगटोक
- सिक्किम की राजधानी, जहाँ से लेखिका की यात्रा आरंभ होती है।
- यूमथांग
- सिक्किम का सुंदर हिमालयी स्थल जहाँ लेखिका जाती हैं।
- साना-साना हाथ जोड़ि
- बौद्ध प्रार्थना की पंक्ति — नन्हे हाथ जोड़कर प्रार्थना।
- पर्यावरण-चेतना
- प्रकृति-संरक्षण के प्रति लेखिका की चिंता।
- पहाड़ी श्रम
- पर्वतीय जीवन का कठोर परिश्रम, विशेषकर स्त्रियों का।
Extra questions & answers
‘साना-साना हाथ जोड़ि’ का क्या अर्थ है?
यह एक बौद्ध प्रार्थना की पंक्ति है जिसका भाव है — नन्हे/छोटे हाथ जोड़कर ईश्वर से प्रार्थना करना।
लेखिका की यात्रा कहाँ से कहाँ तक होती है?
सिक्किम की राजधानी गंगटोक से हिमालयी स्थल यूमथांग तक।
यात्रा के दौरान लेखिका किस चिंता को रेखांकित करती हैं?
प्रकृति/पर्यावरण-संरक्षण की चिंता तथा पहाड़ी जीवन के कठोर श्रम को।
इस वृत्तांत का मुख्य भाव क्या है?
प्रकृति-प्रेम, आध्यात्मिक शांति, पर्यावरण-चेतना और श्रम के प्रति सम्मान।
‘साना-साना हाथ जोड़ि’ किस विधा की रचना है और इसकी लेखिका कौन हैं?
यह एक यात्रा-वृत्तांत है और इसकी लेखिका मधु कांकरिया हैं।
यह वृत्तांत किस राज्य की यात्रा का है?
यह सिक्किम की यात्रा का वृत्तांत है, जिसमें लेखिका गंगटोक से यूमथांग तक जाती हैं।
‘साना-साना हाथ जोड़ि’ का क्या अर्थ है?
यह एक बौद्ध प्रार्थना की पंक्ति है, जिसका भाव है — नन्हे हाथ जोड़कर ईश्वर से प्रार्थना करना।
यात्रा के दौरान लेखिका किस चिंता को रेखांकित करती हैं?
प्रकृति/पर्यावरण-संरक्षण की चिंता तथा पहाड़ी जीवन के कठोर श्रम, विशेषकर स्त्रियों के परिश्रम को।
लेखिका के अनुसार सच्चा सौंदर्य और शांति कहाँ है?
वे अनुभव करती हैं कि सच्चा सौंदर्य और शांति प्रकृति तथा श्रम में निहित है।
इस वृत्तांत का मुख्य भाव क्या है?
प्रकृति-प्रेम, आध्यात्मिक शांति, पर्यावरण-चेतना और श्रम के प्रति सम्मान।


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