प्रहलाद अग्रवाल – तीसरी कसम के शिल्पकार शैलेंद्र — Class 10 Hindi
स्पर्श भाग-2 · Chapter 11
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Chapter summary
प्रहलाद अग्रवाल का यह पाठ प्रसिद्ध गीतकार शैलेंद्र और उनके द्वारा निर्मित फ़िल्म ‘तीसरी कसम’ पर केंद्रित है। शैलेंद्र मूलतः एक संवेदनशील गीतकार थे जिन्होंने रेणु की कहानी ‘मारे गए गुलफ़ाम’ पर ‘तीसरी कसम’ फ़िल्म बनाई। लेखक बताते हैं कि यह फ़िल्म व्यावसायिक दृष्टि से सफल नहीं रही, पर कला और संवेदना की दृष्टि से अत्यंत श्रेष्ठ थी और बाद में इसे राष्ट्रपति-पदक तथा अंतरराष्ट्रीय सम्मान भी मिले। शैलेंद्र ने लाभ-हानि की परवाह न करते हुए अपनी आत्मा की आवाज़ पर यह फ़िल्म बनाई। पाठ शैलेंद्र की सरलता, संवेदनशीलता, उनके गीतों की गहराई और राजकपूर से उनकी मित्रता का भी उल्लेख करता है। यह रचना सच्ची कला और व्यावसायिकता के बीच के अंतर को रेखांकित करती है और बताती है कि सच्ची कला तात्कालिक सफलता की मोहताज नहीं होती।
शैलेंद्र का व्यक्तित्वफ़िल्म तीसरी कसमकला बनाम व्यावसायिक सफलतागीतों की संवेदनशीलताराजकपूर से मित्रता
Key ideas & terms
- शैलेंद्र
- संवेदनशील गीतकार और ‘तीसरी कसम’ के निर्माता।
- तीसरी कसम
- रेणु की कहानी पर बनी कलात्मक फ़िल्म।
- मारे गए गुलफ़ाम
- फणीश्वरनाथ रेणु की वह कहानी जिस पर फ़िल्म बनी।
- राजकपूर
- फ़िल्म के अभिनेता और शैलेंद्र के मित्र।
- कला बनाम व्यावसायिकता
- सच्ची कला और बाज़ारू सफलता के बीच अंतर।
- संवेदनशीलता
- शैलेंद्र के व्यक्तित्व और गीतों का प्रमुख गुण।
Extra questions & answers
‘तीसरी कसम’ फ़िल्म किस कहानी पर आधारित थी?
फणीश्वरनाथ रेणु की कहानी ‘मारे गए गुलफ़ाम’ पर।
फ़िल्म व्यावसायिक रूप से असफल होने पर भी क्यों महत्त्वपूर्ण है?
क्योंकि कला और संवेदना की दृष्टि से वह श्रेष्ठ थी और उसे राष्ट्रपति-पदक तथा अंतरराष्ट्रीय सम्मान मिले।
शैलेंद्र ने यह फ़िल्म किस भावना से बनाई?
लाभ-हानि की परवाह किए बिना, अपनी आत्मा की आवाज़ और कला के प्रति समर्पण से।
पाठ किस अंतर को रेखांकित करता है?
सच्ची कला और व्यावसायिकता के बीच के अंतर को।
इस पाठ के लेखक कौन हैं और यह किस पर केंद्रित है?
इसके लेखक प्रहलाद अग्रवाल हैं; यह गीतकार शैलेंद्र और उनकी फ़िल्म ‘तीसरी कसम’ पर केंद्रित है।
‘तीसरी कसम’ फ़िल्म किस कहानी पर आधारित थी?
यह फणीश्वरनाथ रेणु की कहानी ‘मारे गए गुलफ़ाम’ पर आधारित थी।
फ़िल्म व्यावसायिक रूप से असफल होने पर भी क्यों महत्त्वपूर्ण है?
क्योंकि कला और संवेदना की दृष्टि से वह श्रेष्ठ थी और उसे राष्ट्रपति-पदक तथा अंतरराष्ट्रीय सम्मान मिले।
शैलेंद्र ने यह फ़िल्म किस भावना से बनाई?
लाभ-हानि की परवाह किए बिना, अपनी आत्मा की आवाज़ और कला के प्रति समर्पण से।
शैलेंद्र के व्यक्तित्व की प्रमुख विशेषता क्या थी?
वे सरल, संवेदनशील और गहरे भावों वाले गीतकार थे।
यह पाठ किस अंतर को रेखांकित करता है?
सच्ची कला और व्यावसायिक सफलता के बीच के अंतर को।


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