कबीर – साखी — Class 10 Hindi
स्पर्श भाग-2 · Chapter 1
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Chapter summary
Key ideas & terms
- साखी
- ‘साक्षी’ से बना शब्द; अनुभव से प्राप्त सच्चा ज्ञान।
- कबीर
- निर्गुण भक्ति-धारा के संत-कवि और इन साखियों के रचयिता।
- अहंकार (मैं)
- वह भाव जिसके रहते ईश्वर की प्राप्ति नहीं होती।
- मीठी वाणी
- वह वाणी जो दूसरों और स्वयं को सुख-शीतलता देती है।
- आडंबर
- बाहरी पाखंड और दिखावा, जिसका कबीर विरोध करते हैं।
- निर्गुण भक्ति
- निराकार ईश्वर की भक्ति, जिसे कबीर मानते हैं।
Extra questions & answers
कबीर के अनुसार मीठी वाणी का क्या प्रभाव है?
मीठे वचन दूसरों को सुख देते हैं और बोलने वाले के मन को भी शीतलता प्रदान करते हैं।
ईश्वर की प्राप्ति में सबसे बड़ी बाधा क्या है?
अहंकार (‘मैं’) — जब तक ‘मैं’ रहता है, ईश्वर नहीं मिलता; अहंकार मिटते ही प्रभु की प्राप्ति होती है।
कबीर किसका विरोध करते हैं?
बाहरी आडंबर, पाखंड और निरर्थक कर्मकांड का।
कबीर के अनुसार ईश्वर कहाँ है?
वह कण-कण में व्याप्त है; उसे बाहर खोजने के बजाय अपने भीतर अनुभव करना चाहिए।
‘साखी’ शब्द किससे बना है और इसका क्या अर्थ है?
‘साखी’ शब्द ‘साक्षी’ से बना है, जिसका अर्थ है अनुभव से प्राप्त सच्चा ज्ञान।
कबीर के अनुसार मीठी वाणी का क्या प्रभाव होता है?
मीठे वचन दूसरों को सुख देते हैं और बोलने वाले के मन को भी शीतलता प्रदान करते हैं।
ईश्वर-प्राप्ति में सबसे बड़ी बाधा क्या है?
अहंकार (‘मैं’) — जब तक ‘मैं’ रहता है, ईश्वर नहीं मिलता; अहंकार मिटते ही प्रभु की प्राप्ति होती है।
कबीर किसका विरोध करते हैं?
वे बाहरी आडंबर, पाखंड और निरर्थक कर्मकांड का विरोध करते हैं।
कबीर के अनुसार ईश्वर कहाँ है?
ईश्वर कण-कण में व्याप्त है; उसे बाहर खोजने के बजाय अपने भीतर अनुभव करना चाहिए।
साखियों में कबीर मुख्यतः किन बातों पर बल देते हैं?
सच्चे ज्ञान, प्रेम, विनम्रता और निर्गुण भक्ति पर।


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