तोप, कर चले हम फ़िदा, आत्मत्राण — Class 10 Hindi
स्पर्श भाग-2 · Chapter 7
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Chapter summary
Key ideas & terms
- तोप
- वीरेन डंगवाल की कविता; सत्ता और अत्याचार की क्षणभंगुरता का प्रतीक।
- कर चले हम फ़िदा
- कैफ़ी आज़मी का देशभक्ति-गीत; बलिदान का आह्वान।
- आत्मत्राण
- रवींद्रनाथ ठाकुर की प्रार्थना; आत्मबल की कामना।
- क्षणभंगुरता
- हर शक्ति और सत्ता का समय के साथ अंत।
- बलिदान
- देश के लिए सैनिकों का त्याग और प्राणाहुति।
- आत्मबल
- विपत्ति में निडर होकर जूझने की भीतरी शक्ति।
Extra questions & answers
‘तोप’ कविता क्या संदेश देती है?
कि कभी विनाशकारी रही तोप अब केवल स्मारक है; समय के साथ हर शक्ति, सत्ता और अत्याचार का अंत हो जाता है।
‘कर चले हम फ़िदा’ में सैनिक नई पीढ़ी से क्या आह्वान करते हैं?
कि वे देश की रक्षा का भार सँभालें और मातृभूमि की आन बनाए रखें।
‘आत्मत्राण’ में कवि ईश्वर से क्या माँगते हैं?
विपत्तियों से बचाव नहीं, बल्कि उनसे निडर होकर जूझने और दुख में अडिग रहने की शक्ति।
तीनों कविताओं के मूल भाव क्या हैं?
क्रमशः सत्ता की क्षणभंगुरता, देशभक्ति-बलिदान और आत्मबल।
‘तोप’ कविता का मूल संदेश क्या है?
कि कभी विनाशकारी रही तोप अब केवल स्मारक है; समय के साथ हर शक्ति, सत्ता और अत्याचार का अंत हो जाता है।
अब उस पुरानी तोप पर क्या होता है?
अब उस पर बच्चे खेलते हैं और चिड़ियाँ बैठती हैं।
‘कर चले हम फ़िदा’ किस प्रकार का गीत है और इसमें सैनिक क्या आह्वान करते हैं?
यह एक देशभक्ति-गीत है; इसमें बलिदानी सैनिक नई पीढ़ी से देश की रक्षा का भार सँभालने का आह्वान करते हैं।
‘आत्मत्राण’ में कवि ईश्वर से क्या माँगते हैं?
वे विपत्ति से बचाव नहीं, बल्कि उससे निडर होकर जूझने और दुख में अडिग रहने की शक्ति माँगते हैं।
‘आत्मत्राण’ कविता के रचयिता कौन हैं?
इसके रचयिता रवींद्रनाथ ठाकुर हैं।
तीनों कविताओं के मूल भाव क्रमशः क्या हैं?
क्रमशः सत्ता की क्षणभंगुरता, देशभक्ति-बलिदान और आत्मबल।


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