यह पाठ राजस्थान की वीराङ्गना पन्नाधाया के अद्वितीय त्याग तथा राष्ट्रनिष्ठा की ऐतिहासिक गाथा है। पाठ का आरम्भ इस भाव से होता है कि यह भारतभूमि वीरों तथा त्यागियों की भूमि है, जिसमें महिलाओं का प्रभूत योगदान रहा है। सोलहवीं शताब्दी में मेवाड़ के महाराणा सङ्ग्रामसिंह के दो पुत्र थे — विक्रमादित्य तथा उदयसिंह। बनवीर ने छल से विक्रमादित्य को मारकर मेवाड़ का शासन हड़प लिया और सोचा कि वह अकेला उत्तराधिकारी रहे — इसलिए उसने उदयसिंह को भी मारने का कुचक्र रचा। यह जानकर धाय (दाई) पन्नाधाया ने उदयसिंह के स्थान पर अपने ही पुत्र चन्दन को सुला दिया; बनवीर ने सोते हुए चन्दन को उदयसिंह समझकर मार डाला। पन्नाधाया ने "व्यक्तिहित नहीं, राष्ट्रहित ही श्रेष्ठ है" — इस विवेक से अपने पुत्र का बलिदान देकर मेवाड़ का भावी राजा बचा लिया। आगे चलकर उदयसिंह ने बनवीर को हराकर राज्य पाया और उसी का पुत्र पराक्रमी महाराणा प्रताप हुआ — "यदि पन्नाधाया न होती तो राणाप्रताप कहाँ से होते"। पाठ शौर्य, राष्ट्रभक्ति तथा कर्तव्यनिष्ठा सिखाता है। व्याकरण-दृष्टि से यह लङ्-लकार (भूतकाल) तथा सन्धि सिखाता है।
The story in 6 beats
1भारतभूमि वीरों और त्यागियों की भूमि है, और पन्नाधाया राजस्थान की एक महान वीराङ्गना मानी जाती है।
2मेवाड़ में महाराणा सङ्ग्रामसिंह के पुत्र विक्रमादित्य और उदयसिंह होते हैं, और बनवीर राज्य पर अधिकार कर लेता है।
3बनवीर सोचता है कि उदयसिंह भी मर जाए, ताकि उसका कोई प्रतिस्पर्धी न रहे।
4पन्नाधाया कुतन्त्र जानकर उदयसिंह के स्थान पर अपने पुत्र चन्दन को शय्या पर सुला देती है।
5बनवीर चन्दन को उदयसिंह समझकर मार देता है, और पन्नाधाया राष्ट्रहित को अपने हित से ऊपर रखती है।
6बाद में उदयसिंह राजा बनता है, उससे महाराणा प्रताप होता है, और पन्नाधाया का त्याग अमर हो जाता है।
वीराङ्गना पन्नाधाया की गाथापुत्र-बलिदान तथा राष्ट्रहित का विवेकउदयसिंह तथा महाराणा प्रताप का सम्बन्धलङ्-लकार (भूतकाल) के रूपसन्धि तथा प्रश्ननिर्माण
Characters & key ideas
पपन्नाधायामेवाड़ की धाय (दाई); अपने पुत्र का बलिदान देकर उदयसिंह को बचाने वाली वीराङ्गना।
धधायाधाय/दाई (wet nurse); जो राजपुत्र का पालन करती थी।
बबनवीरःदुष्टबुद्धि, जिसने छल से शासन हड़पा तथा उदयसिंह को मारने का कुचक्र रचा।
रराष्ट्रहितम्"व्यक्तिहितं न, राष्ट्रहितम् एव श्रेष्ठम्" — पन्नाधाया के निर्णय का मूल विवेक।
ललङ्-लकारःभूतकाल का लकार; अपठत्, अरक्षत्, अभवत्, अचिन्तयत्।
आआचन्द्रार्कम्जब तक सूर्य-चन्द्र हैं तब तक; पन्नाधाया का त्याग आचन्द्रार्क रहेगा।
Word meanings · शब्दार्थ
त्यागधनानाम्
बलिदानियों का
प्रभूतम्
बहुत अधिक
शत्रुनिबर्हणाः
शत्रुओं का नाश करने वाली
वीराङ्गनासु
वीर नारियों में
स्वर्णिमाक्षरैः
सोने के अक्षरों से
षोडशे शतके
सोलहवीं शताब्दी में
छलेन
कपट से
कुतन्त्रम्
षड्यन्त्र
दुष्टबुद्धिः
बुरी बुद्धि वाला
शायितवती
सुला दिया
अकल्पनीयः
कल्पना से परे
आचन्द्रार्कम्
सूर्य-चन्द्र रहने तक
Extra questions & answers (board-style)
१. अधः प्रदत्तानां प्रश्नानाम् एकपदेन उत्तरं लिखन्तु—
२. अधः प्रदत्तानां प्रश्नानां पूर्णवाक्येन उत्तरं लिखन्तु—
३. उदाहरणानुसारम् उचितैः पदैः रिक्तस्थानानि पूरयन्तु—
४. वाक्यानि पठित्वा उदाहरणानुसारं वचनपरिवर्तनं कुर्वन्तु—