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CBSE Class 7 — Notes, Chapters & Practice Quizzes

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Sanskrit · 15 chapters
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Chapter 13: वर्णमात्रा-परिचयःClass 7 Sanskrit — summary, notes, extra questions & MCQ quiz

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संस्कृत में वर्णों की कितनी प्रकार की मात्राएँ होती हैं?

The story in short

यह "अतिरिक्तम् अध्ययनम्" (पूरक अध्ययन) पाठ संस्कृत में वर्णों की मात्राओं (उच्चारण-काल) का परिचय देता है। छात्रा श्रद्धा का सन्देह दूर करते हुए अध्यापक बताते हैं कि सामान्यतः स्वरों की दो मात्राएँ (ह्रस्व = एकमात्र, दीर्घ = द्विमात्र) मानी जाती हैं, परन्तु संस्कृत में एक तीसरी मात्रा "प्लुत" (त्रिमात्र) भी होती है। इस प्रकार संस्कृत में कुल बाईस (२२) स्वर होते हैं। प्लुत-स्वर का प्रयोग प्रायः दो स्थानों पर होता है — दूर से बुलाने में (जैसे "हे३ राम!") तथा वेद-मन्त्र के आरम्भ में ओंकार के उच्चारण में (जैसे "ॐ")। ये तीन मात्राएँ केवल स्वरों में होती हैं; सभी व्यञ्जनों की सदा "अर्ध-मात्रा" होती है। पाठ प्रसिद्ध श्लोक "एकमात्रो भवेद् ह्रस्वः, द्विमात्रो दीर्घ उच्यते, त्रिमात्रश्च प्लुतो ज्ञेयः, व्यञ्जनं चार्धमात्रिकम्" से इसे पुष्ट करता है। पक्षियों के उदाहरण से समझाया गया है — चाष (नीलकण्ठ) एकमात्र, वायस (काक) द्विमात्र, शिखी (मयूर) त्रिमात्र तथा नकुल (नेवला) अर्धमात्र ध्वनि करता है। फिर "राम = ४½ मात्राएँ" जैसी मात्रा-गणना-क्रीडा कराई जाती है। पाठ श्लोक-रचना में मात्रा-गणना के महत्त्व तथा "ॐ" व "ऽ" (अवग्रह) चिह्नों का परिचय भी देता है।

वर्ण की मात्राएँ — ह्रस्व, दीर्घ, प्लुतव्यञ्जन की अर्धमात्राप्लुत-स्वर तथा बाईस स्वरमात्रा-गणना-क्रीडाॐ तथा अवग्रह (ऽ) चिह्न

Characters & key ideas

मात्रावर्ण के उच्चारण में लगने वाला समय; इसी से छन्द तथा श्लोक-रचना सधती है।
ह्रस्व-दीर्घ-प्लुतस्वर की तीन मात्राएँ — एकमात्र (अ), द्विमात्र (आ), त्रिमात्र (अ३)।
अर्धमात्राव्यञ्जन की मात्रा सदा अर्ध (½) होती है — "व्यञ्जनं चार्धमात्रिकम्"।
प्लुतःत्रिमात्र स्वर; दूर से बुलाने ("हे३ राम!") तथा ओंकार में प्रयुक्त।
अवग्रहः (ऽ)सन्धि में लुप्त "अ" को सूचित करने वाला चिह्न; इसका कोई उच्चारण नहीं — "कोऽपि"।
मात्रा-गणना"राम = र्(½)+आ(२)+म्(½)+अ(१)+ः(½) = ४½ मात्राएँ" जैसी गणना।

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वर्ण के उच्चारण में लगने वाला समय; इसी से छन्द तथा श्लोक-रचना सधती है।
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Practice quiz · वर्णमात्रा-परिचयः

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#1

वर्णमात्रा-परिचयः

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