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यह पाठ किस प्रसिद्ध कलाकार का साक्षात्कार है?
The story in short
यह पाठ प्रसिद्ध कथक नर्तक पंडित बिरजू महाराज का साक्षात्कार है, जिसमें कुछ बच्चे उनसे प्रश्न पूछते हैं। बिरजू महाराज बताते हैं कि एक समय उनका परिवार "छोटे नवाब" कहलाता था, पर पिता के देहांत के बाद आर्थिक कठिनाइयाँ आईं; इन संघर्षों में उनकी माँ सबसे बड़ी सहयोगी रहीं, जो कहती थीं "खाने को कुछ मिले या न मिले, पर अभ्यास ज़रूर करो।" उन्होंने कथक अपने पिता अच्छन महाराज तथा चाचा शंभू और लच्छू महाराज से सीखा। घर में कथक का माहौल होने से वे औपचारिक प्रशिक्षण से पहले ही सीख गए थे। वे "गंडा बँधने" की परंपरा, लखनऊ-जयपुर-बनारस घरानों के विकास तथा हरिया गाँव के किथकों की कथा सुनाते हैं। बिरजू महाराज लय के महत्त्व को समझाते हुए कहते हैं कि नृत्य ही नहीं, जीवन के हर काम में लय और संतुलन होता है। वे लोक नृत्य और शास्त्रीय नृत्य का अंतर, कथक में किए गए नए प्रयोग, तथा भरतनाट्यम, कथकली, ओडिसी जैसी शैलियों की चर्चा करते हैं। वे बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे — गाना, बजाना, मशीनें ठीक करना और चित्रकारी भी करते थे। वे माता-पिता से आग्रह करते हैं कि बच्चों की रुचि हो तो उन्हें संगीत-नृत्य सीखने दें, क्योंकि लय अनुशासन और संतुलन सिखाती है।
The story in 6 beats
1बिरजू महाराज अपने संघर्षपूर्ण बचपन, गरीबी और माँ के सहारे बने रहने की बात बताते हैं।
2वे कहते हैं कि उन्होंने कथक पिता और चाचाओं को देखकर सीखा और बाद में औपचारिक तालीम पाई।
3वे कथक की पुरानी परंपरा, घरानों, लय और संगीत की जरूरत को सरल उदाहरणों से समझाते हैं।
4वे बताते हैं कि कथक की प्रस्तुति में समय के साथ बदलाव आए हैं, पर परंपरा बनी रहती है।
5वे शास्त्रीय और लोक नृत्य का अंतर, अलग नृत्य-शैलियों की विशेषताएँ और कथक की भंगिमाएँ बताते हैं।
6अंत में वे बच्चों, अभिभावकों और लड़कियों की शिक्षा, हुनर, संगीत और अनुशासन पर अपने विचार रखते हैं।
कथक नृत्यसंघर्ष और माँ का योगदानघराने और गुरु-परंपरालय का महत्त्वशास्त्रीय बनाम लोक नृत्य
Characters & key ideas
ककथकउत्तर भारत की प्रमुख शास्त्रीय नृत्य शैली, जिसका नाम कथा कहने वाले "किथक" से पड़ा; इसमें घरानों का विकास इसकी विशेषता है।
गगंडा बाँधनागुरु-शिष्य के बीच का पवित्र रिश्ता आरंभ करने की रस्म, जिसमें गुरु शिष्य को ताबीज़ बाँधता है।
घघरानासंगीत-नृत्य की वह विशिष्ट शैली व परंपरा जो पीढ़ी-दर-पीढ़ी प्रशिक्षण द्वारा आगे बढ़ती है, जैसे लखनऊ-जयपुर-बनारस घराना।
ललयसंगीत और जीवन में संतुलन बनाए रखने वाला आवरण, जो नृत्य को सुंदरता प्रदान करता है।
शशास्त्रीय नृत्यनियमबद्ध, दर्शकों के लिए किया जाने वाला एकल नृत्य; लोक नृत्य से भिन्न, जो सामूहिक और मनोरंजन के लिए होता है।
बबिरजू महाराजपद्मविभूषण कथक नर्तक, जो अपनी मनमोहक प्रस्तुतियों के लिए भारत और विदेशों में प्रसिद्ध थे।
Word meanings · शब्दार्थ
देहांत
मृत्यु
आर्थिक परेशानियाँ
पैसे की कठिनाइयाँ
जरी
सोने-चाँदी के महीन तार
गजारा
जीवन-यापन
तालीम
शिक्षा या प्रशिक्षण
गंडा
गुरु-शिष्य का ताबीज
लगन
मन लगाकर करने की चाह
कथावाचक
कथा सुनाने वाला
भंगिमाएँ
हाव-भाव और मुद्राएँ
प्रस्तुतीकरण
पेश करने का ढंग
जगलबंदी
दो कलाकारों का संगत खेल
आत्मनिर्भर
अपने बल पर रहने वाला
Extra questions & answers (board-style)
मेरी समझ से
मिलकर करें मिलान
शीर्षक
पंक्तियों पर चर्चा
सोच-विचार के लिए
शब्दों की बात
शब्दों का प्रभाव
कला का संसार
साक्षात्कार की रचना
सृजन
आज की पहेली
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Term1 / 6
कथक
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उत्तर भारत की प्रमुख शास्त्रीय नृत्य शैली, जिसका नाम कथा कहने वाले "किथक" से पड़ा; इसमें घरानों का विकास इसकी विशेषता है।
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बिरजू महाराज से साक्षात्कार
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