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CBSE Class 7 — Notes, Chapters & Practice Quizzes

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Sanskrit · 15 chapters
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Chapter 5: सेवा हि परमो धर्मःClass 7 Sanskrit — summary, notes, extra questions & MCQ quiz

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इस पाठ की कथा का प्रमुख पात्र कौन है?

The story in short

यह पाठ कथा-रूप में सेवा तथा मानवीय गुणों का महत्त्व बताता है। आचार्या छात्रों को समझाती हैं कि जीवन में सफलता के लिए विद्या, धन तथा पद ही पर्याप्त नहीं; सत्य, करुणा, उदारता, सेवा, परोपकार तथा अक्रोध जैसे मानवीय गुण भी आवश्यक हैं — जैसे सिद्धार्थ के पास सब कुछ था, पर मानवीय गुणों के कारण ही वे महात्मा बुद्ध बने। फिर नागार्जुन (प्रसिद्ध रसायनशास्त्रज्ञ तथा चिकित्सक) की कथा है। उन्हें एक सहायक चाहिए था; राजा ने दो योग्य युवक भेजे। नागार्जुन ने दोनों को दो दिन में एक विशेष रसायन बनाकर राजमार्ग से आने को कहा। प्रथम युवक ने घर में पिता की पेट-पीड़ा तथा माता के ज्वर के बावजूद सब छोड़कर समय पर रसायन बना दिया। द्वितीय युवक रसायन नहीं बना पाया, क्योंकि राजमार्ग पर एक रोगी को देखकर वह उसे अपने घर ले गया और दो दिन उसकी सेवा में लगा रहा। नागार्जुन ने द्वितीय युवक को चुना — क्योंकि उसमें सेवाभावना थी, और सेवाभावना के बिना कोई सच्चा चिकित्सक नहीं बन सकता। व्याकरण-दृष्टि से यह पाठ भूतकाल सिखाता है — "क्तवतु" प्रत्यय (पठितवान्/पठितवती), लङ्-लकार तथा "स्म" के योग से भूतकाल।

नागार्जुन तथा दो युवकों की कथासेवा तथा करुणा — परम धर्ममानवीय गुणों का महत्त्वभूतकाल — क्तवतु प्रत्यय (पठितवान्/पठितवती)"स्म" के योग तथा लङ्-लकार से भूतकाल

Characters & key ideas

सेवादूसरों की निःस्वार्थ सहायता; पाठ का मूल सन्देश — "सेवा हि परमो धर्मः"।
नागार्जुनःप्रसिद्ध रसायनशास्त्रज्ञ तथा चिकित्सक; कथा का प्रमुख पात्र।
मानवीयाः गुणाःसत्य, करुणा, उदारता, सेवा, परोपकार, अक्रोध आदि मानव-गुण; सफल जीवन के लिए आवश्यक।
क्तवतु-प्रत्ययःभूतकाल बनाने वाला प्रत्यय; जैसे "पठ् + क्तवतु = पठितवान् (पुं.), पठितवती (स्त्री.)"।
स्मअव्यय; वर्तमानकालिक क्रिया के साथ जुड़कर भूतकाल का अर्थ देता है — "गच्छति स्म = गतवान्"।
निरतःलीन/मग्न; दूसरा युवक रोगी की सेवा में निरत था, इसलिए समय न मिला।

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दूसरों की निःस्वार्थ सहायता; पाठ का मूल सन्देश — "सेवा हि परमो धर्मः"।
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#1

सेवा हि परमो धर्मः

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