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CBSE Class 7 — Notes, Chapters & Practice Quizzes

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Sanskrit · 15 chapters
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Chapter 15: परिशिष्टम् २ — धातुरूपाणि एवं सन्धि-परिचयःClass 7 Sanskrit — summary, notes, extra questions & MCQ quiz

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संस्कृत में लगभग कितने धातु हैं?

The story in short

यह द्वितीय परिशिष्ट (परिशिष्टम् २) क्रियापदों के रूप (धातुरूप/लकार) तथा सन्धि का सन्दर्भ-संग्रह है। पाठ बताता है कि संस्कृत में लगभग दो हजार धातु हैं, जिनमें "तिङ्" प्रत्यय जोड़ने पर तिङन्त (लकार) बनते हैं। धातु तीन प्रकार के होते हैं — परस्मैपदी, आत्मनेपदी तथा उभयपदी। परिशिष्ट में परस्मैपदी धातु (पठ्, लिख्, अस्, कृ, श्रु, दा, ज्ञा, क्री) तथा आत्मनेपदी धातु (भाष्, यत्) के चार प्रमुख लकारों — लट् (वर्तमान), लृट् (भविष्यत्), लङ् (भूत), लोट् (आज्ञा/प्रार्थना) तथा विधिलिङ् (विधि/प्रार्थना) — के तीनों पुरुषों एवं तीनों वचनों के रूप तालिका-रूप में दिए गए हैं। पाठ के अन्त में "अधिकं जानीमः" खण्ड में सन्धि का सामान्य परिचय है — संहिता तथा सन्धि की परिभाषा, और तीन प्रमुख सन्धि (स्वरसन्धि, व्यञ्जनसन्धि, विसर्गसन्धि)। स्वरसन्धि के सात भेदों में से चार — सवर्णदीर्घ (अ+अ=आ, इ+इ=ई), गुण (अ+इ=ए, अ+उ=ओ, अ+ऋ=अर्), वृद्धि (अ+ए=ऐ, अ+ओ=औ) तथा यण् (इ+अ=य्, उ+अ=व्) — उदाहरण-सहित समझाए गए हैं।

धातु तथा तीन प्रकार (परस्मैपद/आत्मनेपद/उभयपद)पाँच प्रमुख लकार (लट्/लृट्/लङ्/लोट्/विधिलिङ्)सन्धि का सामान्य परिचयसवर्णदीर्घ तथा गुण-सन्धिवृद्धि तथा यण्-सन्धि

Characters & key ideas

धातुःक्रिया का मूल; संस्कृत में लगभग दो हजार धातु, तीन प्रकार — परस्मैपदी/आत्मनेपदी/उभयपदी।
लकाराःलट् (वर्तमान), लृट् (भविष्यत्), लङ् (भूत), लोट् (आज्ञा), विधिलिङ् (विधि) — काल/अर्थ-बोधक।
परस्मैपद/आत्मनेपदक्रिया के दो पद-वर्ग; पठति (परस्मै), भाषते (आत्मने)।
सन्धिःउच्चारण-समय वर्णों के परस्पर सामीप्य (संहिता) से होने वाला परिवर्तन।
सवर्णदीर्घ-सन्धिसमान स्वर मिलने पर दीर्घ; अ+अ=आ (तत्र+अपि=तत्रापि), इ+इ=ई (रवि+इन्द्र=रवीन्द्र)।
गुण-सन्धिअ/आ के बाद इ/उ/ऋ → ए/ओ/अर्; सुर+इन्द्र=सुरेन्द्र, महा+उत्सव=महोत्सव।

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धातुः
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क्रिया का मूल; संस्कृत में लगभग दो हजार धातु, तीन प्रकार — परस्मैपदी/आत्मनेपदी/उभयपदी।
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Practice quiz · परिशिष्टम् २ — धातुरूपाणि एवं सन्धि-परिचयः

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परिशिष्टम् २ — धातुरूपाणि एवं सन्धि-परिचयः

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