रैदास के पद
Class 9 Hindi · गंगा · Chapter 8
Visual story
Watch as storyTap a card to open it full-screen — swipe through like a story.
- Mathematics Part I
- Mathematics Part II
- + 4 more
- 12 पाठ
- अलंकार और समास
- मुहावरे
- Mathematics Part I
- Mathematics Part II
- Formula cards
- Graph reading
- 16 traps corrected
- 11 identities
- 12 circle theorems
- Worked numericals
- 9 quadrilateral theorems
- Ratio test
- All 7 solids
- Timelines
- Comparison tables
- Article numbers
- 16 texts summarised
- Poetry devices
- Grammar rules
The story in short
भक्तिकाल के संत कवि रैदास (रविदास) के ये दो पद अनन्य भक्ति, समर्पण और आराध्य के प्रति अडिग निष्ठा को व्यक्त करते हैं। पहले पद "अब कैसे छूटै राम रट लागी" में कवि अनेक उपमाओं द्वारा भक्त और आराध्य के अटूट संबंध को दर्शाता है — जैसे चंदन और पानी, घन और मोर, दीपक और बाती, मोती और धागा, सोना और सुहागा। इन प्रतीकों से कवि कहता है कि जैसे ये जोड़े अलग नहीं हो सकते, वैसे ही भक्त अपने प्रभु से अलग नहीं हो सकता; वह स्वयं को दास और प्रभु को स्वामी मानकर भक्ति करता है। दूसरे पद "जो तुम तोरौ राम मैं नहिं तोरौ" में कवि कहता है कि चाहे प्रभु उसका साथ छोड़ दें, पर वह प्रभु को नहीं छोड़ेगा; वह तीर्थ और व्रत के बंधनों से मुक्त होकर केवल प्रभु के चरण-कमलों पर भरोसा रखता है। यह पद सर्वव्यापक ईश्वर की अवधारणा, बाह्य आडंबरों के त्याग और मन की शुद्धता तथा आंतरिक भक्ति को सच्चा धर्म मानने के रैदास के दर्शन को प्रकट करता है। पदों की भाषा सरल, लोकधर्मी ब्रजभाषा है, जिसमें अनुप्रास, उपमा और रूपक अलंकारों का सुंदर प्रयोग हुआ है।


6
2
