तब याद तुम्हारी आती है

Class 9 Hindi · गंगा · Chapter 14

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All 12 गंगा lessons, with अलंकार examples
  • 20 अंक: खंड घ रचनात्मक लेखन formats
  • समास and उपसर्ग-प्रत्यय rules in one place
  • अर्थ के आधार पर वाक्य-भेद, with मुहावरे
  • लेखक-परिचय, सार and पात्र for each पाठ
  • 12 भूलें students make
  • 12 प्रश्न final test with answers
  • And dozens more key concepts and facts

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  • Science: 27 marks in Unit I, the biggest unit
  • Maths: 25 marks in Geometry, 20 in Algebra
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The story in short

रामनरेश त्रिपाठी की यह "साथ-साथ पढ़ें" कविता प्रकृति के मनोरम क्षणों के माध्यम से ईश्वर (सिरजनहार) के प्रति गहरी श्रद्धा और स्मरण की भावना व्यक्त करती है। कवि कहता है कि जब बहुत सवेरे चिड़ियाँ उठकर खुशी के गीत गाती हैं, कलियाँ दरवाज़े खोलकर संसार पर मुस्कुराती हैं और कहीं से ठंडी हवा मस्ती ढोकर लाती है, तब उसे सृष्टि के रचयिता प्रभु की याद आती है। इसी प्रकार जब चुपचाप चमकते तारों की महफ़िल रात को सजाती है और चाँद शान से उठता है, तब दिल की दुनिया जाग उठती है — मानो प्रकृति प्रभु से कोई संदेश पा रही हो। कविता प्रकृति के सौंदर्य और ईश्वर की रचना-शक्ति के बीच गहरा संबंध स्थापित करती है, जिसमें प्रातःकाल की चहचहाहट, खिलती कलियाँ, शीतल हवा, रात के तारे और चंद्रमा — सभी प्रभु की महिमा के प्रतीक बनकर भक्त को उसका स्मरण कराते हैं। सरल, गेय और चित्रात्मक भाषा में रचित यह कविता प्रकृति-प्रेम और ईश्वर-भक्ति का सुंदर समन्वय प्रस्तुत करती है।

सिरजनहार का स्मरणप्रातःकाल के प्राकृतिक दृश्यरात्रि के तारे और चाँदप्रकृति और ईश्वर का संबंधप्रकृति-प्रेम और भक्ति का समन्वय

Characters & key ideas

सिरजनहारसृष्टि की रचना करने वाला ईश्वर; कविता में कवि बार-बार उसी का स्मरण करता है।
प्रकृति-चित्रणचिड़ियों के गीत, खिलती कलियाँ, ठंडी हवा, तारे और चाँद के सजीव चित्र, जिनके माध्यम से प्रभु का स्मरण होता है।
ईश्वर-स्मरणकविता का केंद्रीय भाव — प्रकृति के मनोहारी क्षणों में प्रभु की याद आना और श्रद्धा जगना।
गेयताकविता की लयात्मक, गाने योग्य भाषा, जो उसे संगीतमय और प्रभावशाली बनाती है।
प्रातः और रात्रि के बिंबसवेरे की चहचहाहट तथा रात के तारों-चाँद के दृश्य — दोनों समयों में प्रभु का स्मरण कराने वाले बिंब।
प्रकृति और भक्ति का समन्वयप्रकृति के सौंदर्य और ईश्वर की रचना-शक्ति को जोड़कर भक्ति-भाव जगाना — कविता की मूल विशेषता।

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