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Class 9 Hindi · गंगा · Chapter 2
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The story in short
पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी का यह निबंध निबंध-लेखन की प्रक्रिया और उसकी कठिनाइयों को रोचक, आत्मपरक शैली में समझाता है। लेखक को अपनी दो विद्यार्थिनियों नमिता और अमिता के लिए "दूर के ढोल सुहावने" तथा "समाज-सुधार" विषयों पर आदर्श निबंध लिखने हैं। वह गार्डिनर के इस कथन से शुरू करता है कि लिखने की एक विशेष मानसिक स्थिति होती है जिसमें विषय गौण और भाव प्रधान होते हैं। फिर वह निबंधशास्त्र के आचार्यों के मतों — निबंध छोटा हो, उसकी रूपरेखा बने, भाषा में प्रवाह हो — का उल्लेख करता है, पर स्वयं उन पर खरा न उतरने की कठिनाई बताता है। अंत में वह मानटेन की आत्मपरक, स्वच्छंद शैली को अपनाने का निर्णय लेता है और अमीर खुसरो की चतुराई की तरह एक ही निबंध में दोनों विषयों को समेट देता है। वह बताता है कि दूर की वस्तुएँ इसलिए सुहावनी लगती हैं क्योंकि उनकी कठोरता दूरी में मिट जाती है, और यह भी कि समाज-सुधार की आवश्यकता हर युग में बनी रहती है, क्योंकि दोष और सुधार दोनों का कभी अंत नहीं होता।


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