ऐसी भी बातें होती हैं (लता मंगेशकर से साक्षात्कार)
Class 9 Hindi · गंगा · Chapter 4
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The story in short
यतींद्र मिश्र द्वारा लिया गया स्वर-साम्राज्ञी लता मंगेशकर का यह साक्षात्कार उनके जीवन-दर्शन, संगीत-साधना और पारिवारिक उत्तरदायित्व को उजागर करता है। लता जी अपने पिता पंडित दीनानाथ मंगेशकर की स्मृतियाँ साझा करती हैं — जो बिना कुछ कहे केवल गंभीर दृष्टि से अनुशासन सिखा देते थे और जिनसे उन्हें स्वाभिमान से जीने की प्रेरणा मिली। पिता के निधन के बाद मात्र तेरह वर्ष की आयु में उन्होंने परिवार सँभाला और स्टूडियो-दर-स्टूडियो भागते हुए संघर्ष किया, पर किसी के आगे हाथ नहीं फैलाया। वे बचपन की फिल्मों की नकल, होली-दीवाली-मंगलागौर जैसे महाराष्ट्रीय उत्सव, कोरस की लड़कियों से अपने आत्मीय संबंध और नौशाद, अनिल विश्वास जैसे संगीतकारों से जुड़े संस्मरण सुनाती हैं। संगीत की असीम शक्ति पर बात करते हुए वे उस्ताद अली अकबर खाँ का प्रसंग बताती हैं — "जब बहुत सुर में तार लगता है, तो टूट जाता है।" साक्षात्कार से उनकी सादगी, समर्पण, कृतज्ञता और आत्मसम्मान की छवि उभरती है, जिसे वे "गाँव तो बह जाता है, पर नाम रह जाता है" कहावत से व्यक्त करती हैं।


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