व्याकरणम् (परिशिष्टम् १)
Class 8 Sanskrit · दीपकम् · Chapter 14
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The story in short
यह व्याकरण-परिशिष्ट कक्षा 8 के लिए आवश्यक प्रमुख व्याकरण-विषयों को संक्षेप में प्रस्तुत करता है। इसमें सर्वप्रथम बाईस (22) उपसर्गों (प्र, परा, अप, सम्, अनु आदि) का परिचय है जो धातु से पूर्व जुड़कर नए क्रियापद बनाते हैं और अर्थ बदल देते हैं (जैसे हृ → प्रहार, आहार, विहार, संहार)। इसके बाद कृत्-प्रत्ययों — क्त्वा, ल्यप्, तुमुन्, क्तवतु — के नियम और उदाहरण दिए गए हैं (जैसे पठ् → पठित्वा/सम्पठ्य/पठितुम्/पठितवान्)। फिर विभक्ति का विस्तृत विवेचन है — छह कारक (कर्ता-प्रथमा, कर्म-द्वितीया, करण-तृतीया, सम्प्रदान-चतुर्थी, अपादान-पञ्चमी, अधिकरण-सप्तमी), सम्बन्ध-विभक्ति (षष्ठी), सम्बोधन-विभक्ति और उपपद-विभक्ति (नमः, सह, अलम्, परितः आदि के योग में)। अन्त में सन्धि के तीन भेद — स्वर-सन्धि (अयादि, पूर्वरूप), व्यञ्जन-सन्धि (श्चुत्व, जश्त्व, अनुस्वार, परसवर्ण, णत्व) और विसर्ग-सन्धि — के नियम और उदाहरण दिए गए हैं। यह परिशिष्ट संस्कृत-व्याकरण का व्यावहारिक आधार प्रदान करता है।


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