यह पाठ एक मधुर गीत-रूप में संस्कृत भाषा की महिमा का गान करता है। दो बहनों के संवाद से आरम्भ होकर (संस्कृत-दिवस के प्रसंग में) पाठ संस्कृत को "सुन्दर सुरभाषा" (देवभाषा) के रूप में प्रस्तुत करता है। गीत में संस्कृत को मुनियों द्वारा विकसित और श्रेष्ठ कवियों द्वारा सुशोभित "मञ्जुल मञ्जूषा" (मनोहर ज्ञान-पेटिका) कहा गया है। यह भारतीय एवं विश्व की अनेक भाषाओं की जननी-भाषा है। वेदव्यास, वाल्मीकि जैसे मुनियों और कालिदास, बाणभट्ट जैसे कवियों के तथा सामान्य जनों के जीवन की आशा संस्कृत ही है। संस्कृत के श्रवण से सुख बढ़ता है, यह संस्कारजन्य ज्ञान और सरस विनोद देती है, उत्तम गति-बुद्धि प्रदान करती है। इसमें नौ रस, विविध अलंकार, वेद-वेदान्त के विचार तथा वैद्यक-खगोल आदि शास्त्र समाहित हैं। इस प्रकार संस्कृत भाषा सम्पूर्ण पृथ्वी पर विजयी (श्रेष्ठ) है। पाठ संस्कृत के प्रति गौरव और प्रेम जगाता है।
संस्कृत-महिमासुन्दर सुरभाषाजननी-भाषानवरस और अलंकारमुनि और कविसंस्कृति की रक्षा
Characters & key ideas
ससुरभाषादेवभाषा — संस्कृत।
ममञ्जूषापेटी, मंजूषा; यहाँ ज्ञान की पेटिका।
पपोषणक्षमतापालन-पोषण करने की क्षमता।
ववचनातीतावाणी से परे, अवर्णनीय।
ननवरसाःकाव्य के नौ रस।
वव्योमशास्त्रम्खगोलविद्या, अन्तरिक्ष-विज्ञान।
Extra questions & answers (board-style)
१. अधः प्रदत्तानां प्रश्नानां एकपदेन उत्तरं लिखत—
२. अधः प्रदत्तानां प्रश्नानां पूर्णवाक्येन उत्तरं लिखत—
३. रेखाङ्कितपदानि आश्रित्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत—
४. अधः प्रदत्तानां पदानाम् उदाहरणानुसारं विभक्तिं वचनं च लिखत—