गीता सुगीता कर्तव्या
Class 8 Sanskrit · दीपकम् · Chapter 5
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The story in short
यह पाठ श्रीमद्भगवद्गीता के चुने हुए श्लोकों पर आधारित है और बताता है कि गीता का अच्छी तरह से अध्ययन (सुगीता) करना और उसके उपदेशों का जीवन में पालन करना कर्तव्य है। पिता-पुत्र के संवाद के द्वारा गीता का परिचय दिया गया है — कुरुक्षेत्र के युद्ध में अपने बान्धवों को देखकर अर्जुन युद्ध से विमुख हो गए, तब भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें कर्तव्यपालन का उपदेश दिया; यही उपदेश गीता है। श्लोकों में स्थितप्रज्ञ के लक्षण (दुःख-सुख में अविचलित, राग-भय-क्रोध से मुक्त), क्रोध से विनाश का क्रम (क्रोध → सम्मोह → स्मृति-भ्रम → बुद्धिनाश → विनाश), ज्ञान-प्राप्ति के तीन उपाय (प्रणिपात, परिप्रश्न, सेवा), श्रद्धावान को ज्ञान और शान्ति की प्राप्ति, सच्चे भक्त के गुण और वाङ्मय तप (अनुद्वेगकर, सत्य, प्रिय व हितकर वचन तथा स्वाध्याय) का वर्णन है। पाठ गीता के जीवन-मूल्यों को अपनाने की प्रेरणा देता है।


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