अल्पानामपि वस्तूनां संहतिः कार्यसाधिका
Class 8 Sanskrit · दीपकम् · Chapter 2
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The story in short
यह पाठ हितोपदेश के "मित्रलाभ" प्रकरण से ली गई कथा पर आधारित है और यह नीति सिखाता है कि छोटी एवं निर्बल वस्तुओं का भी संगठन (संहति) बड़ा कार्य सिद्ध कर देता है। कथा-संदर्भ में कुछ विद्यार्थी केदारक्षेत्र की यात्रा में अकस्मात् भयंकर वर्षा और बाढ़ में फँस जाते हैं; पुल टूट जाता है और सब निराश हो जाते हैं। उनका धीर नायक उन्हें साहस बँधाने के लिए हितोपदेश की एक कथा सुनाता है। कथा में चित्रग्रीव नामक कपोतराज अपने साथियों के साथ एक व्याध (बहेलिये) के जाल में फँस जाता है। चित्रग्रीव की सूझबूझ से सभी कपोत एक साथ, एक चित्त होकर जाल समेत उड़ जाते हैं। फिर वे अपने मित्र हिरण्यक नामक मूषकराज के पास जाते हैं, जो अपने दाँतों से सबके बन्धन काट देता है और सब मुक्त हो जाते हैं। कथा सुनकर विद्यार्थी भी संगठन और बुद्धि के बल पर मिलकर सेतु बना लेते हैं और अपने तथा दूसरों के प्राण बचा लेते हैं। पाठ का सन्देश है — एकता और संगठन में ही शक्ति है।


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