CBSE Class 8 — Notes, Chapters & Practice Quizzes
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Students preparing for CBSE Class 8 Annual Assessment
View allChapter 5: कबीर के दोहेClass 8 Hindi — summary, notes, extra questions & MCQ quiz
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इस पाठ में संत कबीर के आठ प्रसिद्ध दोहे संकलित हैं जो सरल भाषा में जीवन के गहरे मूल्यों और व्यावहारिक ज्ञान की शिक्षा देते हैं। पहले दोहे में कबीर कहते हैं कि सत्य से बढ़कर कोई तप नहीं और झूठ से बड़ा कोई पाप नहीं; जिसके हृदय में सत्य है उसके हृदय में स्वयं ईश्वर का वास है। एक दोहे में वे केवल बड़ा या संपन्न होने को व्यर्थ बताते हैं, जैसे ऊँचा खजूर का पेड़ न तो राहगीर को छाया देता है और न सहज फल — इसलिए बड़प्पन के साथ उपयोगिता और उदारता भी आवश्यक है। "गुरु गोविंद दोऊ खड़े" दोहे में वे गुरु को ईश्वर से भी ऊँचा स्थान देते हैं क्योंकि गुरु ही ईश्वर का मार्ग दिखाते हैं। "अति का भला न बोलना" में हर बात में संतुलन का संदेश है। मधुर वाणी, निंदक को पास रखकर अपनी कमियाँ सुधारने, साधु के सूप जैसे विवेकशील स्वभाव और अच्छी संगति के महत्त्व पर भी दोहे केंद्रित हैं। "जो जैसी संगति करै, सो तैसा फल पाय" आगे चलकर "जैसा संग वैसा रंग" कहावत बन गया। ये दोहे दृष्टांत, संतुलन और सरल लोकभाषा के कारण आज भी अत्यंत लोकप्रिय और प्रासंगिक हैं।
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Practice quiz · कबीर के दोहे
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कबीर के दोहे
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