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Class 8 Hindi · मल्हार · Chapter 1
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The story in short
गयाप्रसाद शुक्ल "सनेही" द्वारा रचित यह एक ओजपूर्ण आह्वान-गीत है जो हृदय में देश-प्रेम की भावना जगाता है। कवि कहते हैं कि जिस हृदय में अपने देश के लिए प्रेम न हो, वह हृदय नहीं बल्कि पत्थर के समान कठोर और संवेदनहीन है। कविता बार-बार दोहराती है कि जीवन तभी सार्थक है जब उसमें जोश, साहस और भावनाओं की रसधारा बहती हो। जो व्यक्ति साहस छोड़ देता है वह कभी पार नहीं पहुँच सकता, और जो संसार के संग चलना नहीं जानता उसका संसार में कोई स्थान नहीं बनता। कवि भारत को माता-पिता और बंधु के रूप में देखते हैं — जिसकी मिट्टी में हम पले-बढ़े और जिसने हमें दाना-पानी दिया। वे देश की ज्ञान-संपदा और प्राकृतिक खजानों का गौरवगान करते हैं, जिन पर सारा संसार मुग्ध है। "सब कुछ है अपने हाथों में" कहकर वे आत्मनिर्भरता और कर्तव्य-बोध की प्रेरणा देते हैं। यह रचना तुक मिलाने और एक ही पंक्ति को टेक के रूप में दोहराने जैसी काव्य-विशेषताओं से प्रभावशाली बनती है तथा हमें राष्ट्र के संरक्षण व सेवा के लिए प्रेरित करती है।


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