राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त की कविता ‘मनुष्यता’ सच्ची मनुष्यता और परोपकार का संदेश देती है। कवि कहते हैं कि सच्चा मनुष्य वही है जो दूसरों के लिए जीता और मरता है; जो केवल अपने लिए जीता है, उसका जीवन पशु-समान है। कवि दधीचि, कर्ण, रंतिदेव और शिबि जैसे महान दानियों के उदाहरण देकर बताते हैं कि उन्होंने दूसरों के कल्याण के लिए अपना सर्वस्व त्याग दिया और इसीलिए वे अमर हो गए। कवि सबको भाई-भाई मानने, परस्पर सहानुभूति रखने, अहंकार त्यागने और मिल-जुलकर आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं। वे कहते हैं कि सबका ईश्वर एक है, इसलिए मनुष्य को भेदभाव छोड़कर एक-दूसरे की सहायता करनी चाहिए। यह कविता त्याग, परोपकार, एकता और सच्ची मानवता का प्रेरक संदेश देती है।
सच्ची मनुष्यतापरोपकार और त्यागमहान दानियों के उदाहरणएकता और सहानुभूतिमानवता का संदेश
Characters & key ideas
ममनुष्यतादूसरों के लिए जीने-मरने का भाव; सच्ची मानवता।
पपरोपकारदूसरों की भलाई के लिए किया गया कार्य।
ददधीचिमहान दानी ऋषि जिन्होंने अपनी हड्डियाँ तक दान कर दीं।
ररंतिदेवअपना सर्वस्व दान करने वाला दानी राजा।
ससहानुभूतिदूसरों के दुख को अपना समझने का भाव।
एएकतासबको भाई मानकर मिल-जुलकर रहने का भाव।
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‘मनुष्यता’ कविता के रचयिता कौन हैं?
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मनुष्यता
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