सेवा हि परमो धर्मः — Class 7 Sanskrit
दीपकम् · Chapter 5
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Chapter summary
Key ideas & terms
- सेवा
- दूसरों की निःस्वार्थ सहायता; पाठ का मूल सन्देश — "सेवा हि परमो धर्मः"।
- नागार्जुनः
- प्रसिद्ध रसायनशास्त्रज्ञ तथा चिकित्सक; कथा का प्रमुख पात्र।
- मानवीयाः गुणाः
- सत्य, करुणा, उदारता, सेवा, परोपकार, अक्रोध आदि मानव-गुण; सफल जीवन के लिए आवश्यक।
- क्तवतु-प्रत्ययः
- भूतकाल बनाने वाला प्रत्यय; जैसे "पठ् + क्तवतु = पठितवान् (पुं.), पठितवती (स्त्री.)"।
- स्म
- अव्यय; वर्तमानकालिक क्रिया के साथ जुड़कर भूतकाल का अर्थ देता है — "गच्छति स्म = गतवान्"।
- निरतः
- लीन/मग्न; दूसरा युवक रोगी की सेवा में निरत था, इसलिए समय न मिला।
Extra questions & answers
नागार्जुन कौन थे?
नागार्जुन एक प्रसिद्ध रसायनशास्त्रज्ञ तथा चिकित्सक थे, जो रात-दिन प्रयोगशाला में कार्य करते थे।
नागार्जुन ने राजा से क्या निवेदन किया?
नागार्जुन ने राजा से कहा कि उनके चिकित्साकार्य के लिए एक सहायक आवश्यक है।
नागार्जुन ने दोनों युवकों को क्या कार्य दिया?
उन्होंने दोनों को दो दिन में एक विशेष रसायन बनाकर लाने को कहा और राजमार्ग से ही आने का निर्देश दिया।
प्रथम युवक ने क्या किया?
प्रथम युवक ने घर में पिता की पेट-पीड़ा तथा माता के ज्वर के बावजूद सब छोड़कर समय पर रसायन बनाकर ला दिया।
द्वितीय युवक रसायन क्यों नहीं बना पाया?
राजमार्ग पर एक रोगी को देखकर वह उसे अपने घर ले गया और दो दिन उसकी सेवा में लगा रहा, इसलिए रसायन बनाने का समय नहीं मिला।
नागार्जुन ने किस युवक को चुना और क्यों?
नागार्जुन ने द्वितीय युवक को चुना, क्योंकि उसमें सेवाभावना थी; सेवाभावना के बिना कोई सच्चा चिकित्सक नहीं बन सकता।
पाठ का मुख्य सन्देश क्या है?
विद्या-धन-पद के साथ सेवा तथा करुणा जैसे मानवीय गुण भी अनिवार्य हैं — "सेवा ही परम धर्म है"।
"क्तवतु" प्रत्यय से कौन-सा काल बनता है?
"क्तवतु" प्रत्यय से भूतकाल बनता है — जैसे "पठ् + क्तवतु = पठितवान् / पठितवती"।
"स्म" अव्यय का क्या प्रयोग है?
वर्तमानकालिक क्रिया के साथ "स्म" जोड़ने पर भूतकाल का अर्थ होता है — "गच्छति स्म = गतवान्/गतवती"।
सिद्धार्थ किन गुणों के कारण महात्मा बने?
सिद्धार्थ के पास विद्या, धन तथा पद सब था, परन्तु करुणा आदि मानवीय गुणों के कारण ही वे महात्मा बुद्ध बने।


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