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नित्यं पिबामः सुभाषितरसम् — Class 7 Sanskrit

दीपकम् · Chapter 2

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Chapter summary

यह पाठ सुभाषितों (श्रेष्ठ जनों के सुवचनों) का संकलन है, जो संवाद-रूप में आरम्भ होता है। आचार्य छात्रों को बताते हैं कि सुभाषित मानव के विविध मूल्यों के विकास के लिए श्रेष्ठ जनों द्वारा कहे गए सुवचन हैं, जिनके अध्ययन से नैतिक तथा सामाजिक विकास होता है। पाठ में नौ चयनित सुभाषित-श्लोक हैं, प्रत्येक के साथ पदच्छेद, अन्वय तथा भावार्थ दिया गया है। प्रमुख सन्देश हैं — वस्त्र, शरीर, वाणी, विद्या तथा विनय इन पाँच "व"कारों से युक्त व्यक्ति समाज में पूजित होता है; निद्रा-तन्द्रा-भय-क्रोध-आलस्य-दीर्घसूत्रता ये छह दोष त्यागने योग्य हैं; जल से शरीर, सत्य से मन, विद्या-तप से आत्मा तथा ज्ञान से बुद्धि शुद्ध होती है; निरन्तर अभ्यास से बूँद-बूँद घड़ा भरता है वैसे ही ज्ञान-धन एकत्र होता है; जो पढ़ता-लिखता-देखता-पूछता तथा विद्वानों के समीप रहता है उसकी बुद्धि सूर्यकिरणों से कमल के समान विकसित होती है; प्रिय वचन से सभी प्राणी प्रसन्न होते हैं; आलस्य मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु है तथा उद्यम सबसे बड़ा बन्धु; परोपकार पुण्य के लिए तथा परपीडन पाप के लिए होता है। पाठ में तृतीया विभक्ति के शब्दरूप भी सिखाए गए हैं।
सुभाषित का स्वरूप तथा महत्त्वपाँच "व"कार तथा छह दोषशरीर-मन-आत्मा-बुद्धि की शुद्धिपरोपकार तथा प्रिय वचन का सन्देशतृतीया विभक्ति के शब्दरूप

Key ideas & terms

सुभाषितम्
सु + भाषित = सुन्दर वचन; श्रेष्ठ जनों के नीति-वचन जिनमें जीवन-मूल्य निहित हैं।
पञ्च वकाराः
वस्त्र, वपु (शरीर), वाणी, विद्या तथा विनय — इन पाँच "व"कारों से युक्त व्यक्ति पूजित होता है।
षड् दोषाः
निद्रा, तन्द्रा, भय, क्रोध, आलस्य तथा दीर्घसूत्रता — ये छह दोष त्यागने योग्य हैं।
दीर्घसूत्रता
कार्य को आगे टालने की प्रवृत्ति (procrastination); ऐश्वर्य का अवरोधक एक दोष।
तृतीया विभक्ति
करण कारक की विभक्ति; जैसे छात्रेण, विद्यया, सत्येन, ज्ञानेन — "अद्भिः गात्राणि शुध्यन्ति"।
परोपकारः
दूसरों का उपकार; "परोपकारः पुण्याय, पापाय परपीडनम्" — व्यास का सारवचन।

Extra questions & answers

सुभाषित किसे कहते हैं?

श्रेष्ठ जनों द्वारा कहे गए, जीवन-मूल्यों से युक्त सुन्दर सुवचनों को सुभाषित कहते हैं।

किन पाँच "व"कारों से युक्त व्यक्ति पूजित होता है?

वस्त्र, वपु (शरीर), वाणी, विद्या तथा विनय — इन पाँच "व"कारों से युक्त व्यक्ति लोक में सम्मान पाता है।

ऐश्वर्य चाहने वाले को कौन-से छह दोष त्यागने चाहिए?

निद्रा, तन्द्रा, भय, क्रोध, आलस्य तथा दीर्घसूत्रता — ये छह दोष त्यागने चाहिए।

किससे किसकी शुद्धि होती है?

जल से शरीर, सत्य से मन, विद्या-तप से आत्मा तथा ज्ञान से बुद्धि शुद्ध होती है।

भारतवर्ष की भौगोलिक स्थिति किस सुभाषित में बताई गई है?

जो भूभाग समुद्र के उत्तर तथा हिमालय के दक्षिण में है वही भारतवर्ष है, जहाँ की सन्तति भारती कहलाती है।

"जलबिन्दुनिपातेन" सुभाषित क्या सिखाता है?

जैसे बूँद-बूँद से घड़ा भर जाता है, वैसे ही निरन्तर अभ्यास से विद्या, धर्म तथा धन प्राप्त होते हैं।

किसकी बुद्धि कमल के समान विकसित होती है?

जो पढ़ता, लिखता, देखता, पूछता तथा विद्वानों के समीप रहता है, उसकी बुद्धि सूर्यकिरणों से कमल के समान विकसित होती है।

प्रिय वचन का क्या महत्त्व है?

प्रिय वचन से सभी प्राणी प्रसन्न होते हैं, इसलिए सदा प्रिय ही बोलना चाहिए — वचन में कैसी दरिद्रता?

व्यास के अष्टादश पुराणों का सार क्या है?

सार यह है कि परोपकार पुण्य का तथा परपीडन पाप का कारण है।

मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु तथा बन्धु क्या है?

आलस्य मनुष्य के शरीर में स्थित सबसे बड़ा शत्रु है, और उद्यम (परिश्रम) सबसे बड़ा बन्धु है।