हितं मनोहारि च दुर्लभं वचः — Class 7 Sanskrit
दीपकम् · Chapter 8
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Chapter summary
Key ideas & terms
- सूक्तिः
- सु + उक्ति = सुन्दर वचन; जिसमें जीवन-मूल्य निहित होते हैं।
- शरीरमाद्यं धर्मसाधनम्
- शरीर ही धर्मपालन का प्रथम साधन है, इसलिए उसकी रक्षा आवश्यक।
- क्षणशः कणशः
- क्षण-क्षण से विद्या तथा कण-कण से धन सिद्ध करना चाहिए — समय का सदुपयोग।
- क्रियावान्
- क्रियाशील; जो ज्ञान का आचरण/प्रयोग करता है वही सच्चा विद्वान् ("ज्ञानं भारः क्रियां विना")।
- शीलम्
- चरित्र/सदाचरण; "शीलं परं भूषणम्" — शील ही श्रेष्ठ आभूषण है।
- मकार-लेखनम्
- अनुस्वार-नियम — "म्" के बाद व्यञ्जन हो तो अनुस्वार, स्वर हो तो "म्" ही लिखें।
Extra questions & answers
"सूक्ति" शब्द कैसे बना है और इसका क्या अर्थ है?
"सूक्ति" = सु + उक्ति, अर्थात् सुन्दर वचन, जिसमें जीवन-मूल्य निहित होते हैं।
सभी मनुष्यों की माता किसे कहा गया है?
पृथ्वी (भूमि) को सबकी माता कहा गया है — "माता भूमिः पुत्रोऽहं पृथिव्याः"।
धर्मपालन का प्रथम साधन क्या है?
शरीर ही धर्मपालन का प्रथम (आद्य) साधन है — "शरीरमाद्यं खलु धर्मसाधनम्"।
विद्या तथा धन कैसे सिद्ध करने चाहिए?
क्षण-क्षण से विद्या तथा कण-कण से धन सिद्ध करना चाहिए — एक क्षण का भी नाश न करें।
गुणी का आदर किस आधार पर होता है?
गुणी का आदर उसके गुणों के आधार पर होता है, लिंग या आयु के आधार पर नहीं।
सच्चा विद्वान् किसे कहा गया है?
जो क्रियाशील है, अर्थात् ज्ञान का आचरण तथा प्रयोग करता है, वही सच्चा विद्वान् है।
श्रेष्ठ आभूषण क्या है?
शील (सदाचरण) ही श्रेष्ठ आभूषण है — "शीलं परं भूषणम्"।
"हितं मनोहारि च दुर्लभं वचः" का क्या आशय है?
जो वचन हितकारी भी हो और मनोहर भी — ऐसा वचन दुर्लभ है; प्रायः हितकारी कठोर तथा मनोहर अहितकारी होता है।
मकार-लेखन का नियम क्या है?
"म्" के बाद व्यञ्जन हो तो उसके स्थान पर अनुस्वार लिखें; स्वर हो तो "म्" ही रखें — जैसे "पुस्तकं पठति" पर "पुस्तकम् अपठत्"।
"मा ब्रूहि दीनं वचः" क्या सिखाता है?
दीन (दयनीय) वचन मत बोलो — स्वाभिमानी व्यक्ति को किसी के समक्ष दीनतापूर्वक सहायता नहीं माँगनी चाहिए।


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