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परिशिष्टम् १ — शब्दरूपाणि — Class 7 Sanskrit

दीपकम् · Chapter 14

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Chapter summary

यह प्रथम परिशिष्ट (परिशिष्टम् १) संस्कृत के प्रमुख शब्दरूपों (विभक्ति-तालिकाओं) का संग्रह है, जो पुस्तक के पाठों में प्रयुक्त शब्दों का सन्दर्भ-कोश का काम करता है। "अजन्त" (जिनके अन्त में स्वर हो) शब्दों को लिंग के अनुसार बाँटा गया है। पुंलिंग में अकारान्त (देव, राम), इकारान्त (कवि, हरि), उकारान्त (शम्भु, गुरु) तथा ऋकारान्त (पितृ, नेतृ) शब्दों के सातों विभक्तियों तथा सम्बोधन के रूप दिए गए हैं। स्त्रीलिंग में आकारान्त (माला, रमा), इकारान्त (मति, कीर्ति), ईकारान्त (नदी, गौरी), उकारान्त (धेनु) तथा ऋकारान्त (मातृ) शब्दरूप हैं। नपुंसकलिंग में अकारान्त (फल, मित्र) शब्दरूप हैं। साथ ही सर्वनाम-शब्दों — तद् (वह), एतद् (यह), किम् (कौन/क्या) के तीनों लिंगों के रूप तथा अस्मद् (मैं/हम) व युष्मद् (तू/तुम) के रूप भी दिए गए हैं। यह परिशिष्ट कोई कथा नहीं, अपितु अभ्यास तथा सन्दर्भ के लिए व्याकरण-तालिका है, जिससे छात्र किसी भी शब्द का सही विभक्ति-रूप पहचान सके।
अजन्त पुंलिंग शब्दरूप (देव, कवि, शम्भु, पितृ)अजन्त स्त्रीलिंग शब्दरूप (माला, मति, नदी, मातृ)नपुंसकलिंग शब्दरूप (फल, मित्र)सर्वनाम — तद्, एतद्, किम्अस्मद् तथा युष्मद् के रूप

Key ideas & terms

अजन्ताः
जिन शब्दों के अन्त में स्वर (अच्) हो — अकारान्त, इकारान्त, उकारान्त आदि।
अकारान्त पुंलिंग
"देव", "राम" आदि; प्रथमा देवः-देवौ-देवाः, द्वितीया देवम्-देवौ-देवान्।
ईकारान्त स्त्रीलिंग
"नदी", "गौरी" आदि; प्रथमा नदी-नद्यौ-नद्यः, सम्बोधन हे नदि!।
नपुंसकलिंग
"फल", "मित्र" आदि; प्रथमा-द्वितीया एकवचन समान (फलम्), बहुवचन फलानि।
सर्वनाम तद्/एतद्/किम्
वह/यह/कौन — तीनों लिंगों में भिन्न रूप (सः-सा-तत्, कः-का-किम्)।
अस्मद्/युष्मद्
उत्तमपुरुष (अहम्-आवाम्-वयम्) तथा मध्यमपुरुष (त्वम्-युवाम्-यूयम्) सर्वनाम।

Extra questions & answers

"अजन्त" शब्द किसे कहते हैं?

जिन शब्दों के अन्त में स्वर (अच्) हो उन्हें अजन्त कहते हैं — जैसे अकारान्त, इकारान्त आदि।

"देव" शब्द के प्रथमा विभक्ति के तीन रूप क्या हैं?

देवः (एकवचन), देवौ (द्विवचन), देवाः (बहुवचन)।

"नदी" शब्द किस लिंग तथा किस अन्त का है?

"नदी" ईकारान्त स्त्रीलिंग शब्द है; इसका सम्बोधन "हे नदि!" होता है।

नपुंसकलिंग "फल" शब्द की क्या विशेषता है?

नपुंसकलिंग में प्रथमा तथा द्वितीया के रूप समान होते हैं — फलम् (एक.), फले (द्वि.), फलानि (बहु.)।

"तद्" सर्वनाम के तीनों लिंगों के प्रथमा एकवचन रूप क्या हैं?

पुंलिंग सः, स्त्रीलिंग सा, नपुंसकलिंग तत्।

"किम्" सर्वनाम के प्रथमा एकवचन के तीनों लिंग-रूप क्या हैं?

पुंलिंग कः, स्त्रीलिंग का, नपुंसकलिंग किम्।

"अस्मद्" (मैं) के प्रथमा के तीन वचन-रूप क्या हैं?

अहम् (एकवचन), आवाम् (द्विवचन), वयम् (बहुवचन)।

"युष्मद्" (तू) के प्रथमा के तीन वचन-रूप क्या हैं?

त्वम् (एकवचन), युवाम् (द्विवचन), यूयम् (बहुवचन)।

पुंलिंग में किन-किन अन्त के शब्दरूप दिए गए हैं?

अकारान्त (देव), इकारान्त (कवि), उकारान्त (शम्भु) तथा ऋकारान्त (पितृ) शब्दरूप दिए गए हैं।

यह परिशिष्ट किस काम आता है?

यह व्याकरण-सन्दर्भ-तालिका है, जिससे छात्र किसी भी शब्द का सही विभक्ति-रूप पहचान सके।