फूल और काँटा — Class 7 Hindi
मल्हार · Chapter 3
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Chapter summary
Key ideas & terms
- प्रतीक
- किसी भाव या विचार को व्यक्त करने वाला चिह्न; यहाँ फूल अच्छाई-कोमलता का और काँटा कठोरता-पीड़ा का प्रतीक है।
- बड़प्पन
- व्यक्ति के गुण, स्वभाव और चरित्र की महानता; "बड़ा" और "पन" से बना शब्द, जिसका अर्थ है श्रेष्ठ होने का भाव।
- कुल की बड़ाई
- वंश या परिवार के नाम का गौरव, जिसे कवि गुणों के अभाव में निरर्थक मानते हैं।
- मानवीकरण
- फूल-काँटे जैसी प्राकृतिक वस्तुओं में मानवीय कार्यों और भावनाओं का आरोपण करना।
- विशेषण
- संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता बताने वाला शब्द, जैसे "श्याम तन" में "श्याम"।
- अयोध्यासिंह उपाध्याय "हरिऔध"
- खड़ी बोली के प्रमुख कवि जिनकी "प्रियप्रवास" को खड़ी बोली का पहला महाकाव्य माना जाता है।
Extra questions & answers
कविता में काँटे के बारे में कौन-सी बात सत्य है?
काँटा किसी की उँगलियों को छेदता है, वस्त्र फाड़ देता है तथा तितलियों और भौंरों को कष्ट पहुँचाता है।
फूल और काँटे में मुख्य अंतर क्या है?
दोनों एक ही पौधे पर उगते हैं और समान देखभाल पाते हैं, फिर भी फूल सबको सुख-सुगंध देता है जबकि काँटा सबको पीड़ा पहुँचाता है — अर्थात उनके स्वभाव भिन्न हैं।
कविता का केंद्रीय भाव क्या है?
व्यक्ति का सम्मान उसके कुल से नहीं बल्कि उसके गुणों और अच्छे कर्मों से होता है।
"किस तरह कुल की बड़ाई काम दे, जो किसी में हो बड़प्पन की कसर" का क्या अर्थ है?
यदि व्यक्ति में स्वयं बड़प्पन (अच्छे गुण) न हों, तो उसके ऊँचे कुल की प्रतिष्ठा भी उसके किसी काम नहीं आती।
"है खटकता एक सब की आँख में, दूसरा है सोहता सुर शीश पर" से कवि क्या कहना चाहते हैं?
जो दूसरों को कष्ट देता है (काँटा) वह सबको खटकता है, जबकि जो सुख देता है (फूल) उसका सब सम्मान करते हैं और वह ऊँचे स्थान पर शोभित होता है।
कविता में फूल और काँटे को समान रूप से क्या-क्या मिलता है?
एक ही पौधे का पालन, एक-सी चाँदनी, एक-सी वर्षा और एक-सी हवा — अर्थात समान परिवेश और देखभाल।
फूल दूसरों के लिए क्या-क्या करता है?
वह तितलियों को गोद में लेता है, भौंरे को अपना रस पिलाता है तथा अपनी सुगंध और रंग से सबको आनंदित करता है।
कविता में कौन-सी काव्य-विशेषताएँ हैं?
मानवीकरण, विशेषणों का प्रयोग, विपरीतार्थक शब्दों का साथ-साथ प्रयोग, अनुप्रास तथा तुकांत।
कविता हमें कौन-सी प्रेरणा देती है?
कि हमें फूल के समान कोमल, परोपकारी और गुणी बनना चाहिए, न कि काँटे के समान कठोर और कष्टदायी।
"फूल" और "काँटा" किसके प्रतीक हैं?
फूल अच्छाई, कोमलता, परोपकार और प्रेम का प्रतीक है, जबकि काँटा कठोरता, स्वार्थ, पीड़ा और बुराई का प्रतीक है।


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