गिरिधर कविराय की कुंडलियाँ — Class 7 Hindi
मल्हार · Chapter 6Trending
Visual story
Watch as story →CBSE Class 7 community
View all- Mathematics
- Science
- + 3 more
- Mathematics
- Social Science
- Space weighted by chapter size
- Charts from the book's own data
- Traps corrected
- Space weighted by chapter size
- Charts from the book's own data
- Traps corrected
- Space weighted by chapter size
- Charts from the book's own data
- Traps corrected
Chapter summary
The story in steps
- पहली कुंडलिया कहती है कि बिना सोचे काम करने वाला बाद में पछताता है और उसका काम बिगड़ जाता है।
- ऐसे काम से जग हँसता है, मन को चैन नहीं मिलता और अच्छी चीजें भी मन को नहीं भातीं।
- कवि कहता है कि बिना विचार किए काम का दुख आसानी से नहीं जाता और वह मन में खटकता रहता है।
- दूसरी कुंडलिया सलाह देती है कि बीती बातों को छोड़कर आगे की सुधि लेनी चाहिए।
- मन को उसी काम में लगाना चाहिए जो सहज बन सके, ताकि दुर्जन न हँसें और मन में खता न रहे।
- अंत में कवि समझाता है कि भविष्य के सुख को समझकर बीती बात को बीती मानकर आगे बढ़ना चाहिए।
Key ideas & terms
- कुंडलिया
- छह पंक्तियों का एक छंद जिसमें पहली पंक्ति का पहला/दूसरा शब्द ही अंतिम शब्द भी होता है; दोहा और रोला से मिलकर बनता है।
- बिना बिचारे
- बिना सोचे-समझे; ऐसा कार्य जो पछतावे का कारण बनता है — पहली कुंडली का मुख्य भाव।
- नीतिपरक पद
- जीवन-व्यवहार और सदाचरण की सीख देने वाली रचनाएँ, जो प्रायः कहावत बन जाती हैं।
- बीती ताहि बिसारि दे
- बीती बातों को भुलाकर भविष्य की सुधि लेने की सीख — दूसरी कुंडली का मुख्य भाव।
- विवेक
- सही और गलत में अंतर करके सोच-समझकर निर्णय लेने की शक्ति, जिस पर कुंडलियाँ बल देती हैं।
- गिरिधर कविराय
- अठारहवीं सदी के कवि, जो लोकनीति और घर-गृहस्थी की बातें सरल शब्दों में कहने वाली कुंडलियों के लिए प्रसिद्ध हैं।
शब्दार्थ · Word meanings
- बिचारे
- सोच-विचार
- पाछे
- बाद में
- हँसाय
- हँसी का कारण बनना
- चित
- मन
- राग रंग
- मौज-मस्ती
- टरत न टारे
- टालने से भी नहीं टलता
- खटकत
- चुभता रहता
- बिसारि
- भुलाकर
- सुधि
- ध्यान
- सहज
- आसानी से
- दुर्जन
- बुरा व्यक्ति
- खता
- दोष या गलती
Extra questions & answers
"बिना बिचारे" काम करने के क्या परिणाम होते हैं?
अपना काम बिगड़ जाता है, संसार में हँसी होती है, मन में चैन नहीं रहता और किया हुआ काम लंबे समय तक मन में खटकता रहता है।
मन में "चैन न पाने" का मुख्य कारण क्या बताया गया है?
बिना सोचे-समझे किए गए कार्य की असफलता ही मन की अशांति का मुख्य कारण है, जिसके कारण खान-पान और सम्मान भी सुख नहीं देते।
"बीती ताहि बिसारि दे आगे की सुधि लेइ" से कौन-सी सलाह दी गई है?
कि अतीत की असफलताओं और दुखों को भुलाकर भविष्य पर ध्यान देना चाहिए और आगे बढ़ना चाहिए।
"जो बनि आवै सहज में ताही में चित देइ" पंक्ति का क्या अर्थ है?
कि जो काम सहजता से बन पड़े, उसी में मन लगाना चाहिए; अनावश्यक रूप से असंभव या कठिन कार्यों के पीछे नहीं भागना चाहिए।
"खटकत है जिय माहि कियो जो बिना बिचारे" का क्या आशय है?
कि बिना सोचे किया गया कार्य मन में काँटे की तरह बार-बार चुभता रहता है और उसकी पीड़ा से छुटकारा पाना कठिन होता है।
दूसरी कुंडली के अनुसार ऐसा कार्य कैसे करना चाहिए कि किसी दुर्जन को हँसने का अवसर न मिले?
जो सहज में बन पड़े उसी में मन लगाकर, सोच-समझकर कार्य करना चाहिए ताकि कोई दोष न रहे और किसी बुरे व्यक्ति को हँसने का मौका न मिले।
कुंडलियों में किन काव्य-विशेषताओं का प्रयोग हुआ है?
कवि के नाम का उल्लेख, तुकांत, विपरीत विचारों का साथ-साथ आना, अनुप्रास तथा संवाद जैसी शैली इन कुंडलियों की विशेषताएँ हैं।
सैकड़ों साल पहले कही गई ये बातें आज भी उपयोगी कैसे हैं?
आज भी जल्दबाजी में लिए गए निर्णय हानि पहुँचाते हैं और बीती बातों में उलझे रहना प्रगति रोकता है, इसलिए ये सीखें आज भी प्रासंगिक हैं।
कुंडलियों को "नीतिपरक" क्यों कहा जाता है?
क्योंकि ये जीवन-व्यवहार और सदाचरण की व्यावहारिक सीख देती हैं और लोगों में कहावतों की तरह प्रचलित हो गई हैं।
इन कुंडलियों से हमें क्या सीख मिलती है?
कि हर कार्य सोच-विचारकर करना चाहिए और बीती बातों को भुलाकर सकारात्मक दृष्टि से भविष्य की ओर बढ़ना चाहिए।
मेरी समझ से
(क) पाठ के आधार पर नीचे दिए गए प्रश्नों का सही उत्तर कौन-सा है? उसके सामने तारा (★) बनाइए। कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं। (1) “बिना बिचारे” काम करने के क्या परिणाम होते हैं? • दूसरों से प्रशंसा मिलती है। • मन में शांति बनी रहती है। • अपना काम बिगड़ जाता है। • खान-पान सम्मान मिलता है।
सही उत्तर है - अपना काम बिगड़ जाता है। कविता के अनुसार बिना सोचे-समझे काम करने से अपना काम बिगड़ जाता है, बाद में पछताना पड़ता है, दुनिया में हँसी उड़ती है और मन को चैन नहीं मिलता। इसलिए ‘खान-पान सम्मान मिलता है’ या ‘प्रशंसा मिलती है’ जैसे विकल्प गलत हैं।
(क) (2) “चित्त में चैन” न पा सकने का मुख्य कारण क्या है? • प्रयास करने पर भी टाला न जा सकने वाला दुख • बिना सोचे-समझे किए गए कार्य की असफलता • खान-पान, सम्मान और राग-रंग का अभाव • दुनिया द्वारा की जाने वाली निंदा और उपहास
मुख्य कारण है - बिना सोचे-समझे किए गए कार्य की असफलता। कवि कहते हैं कि बिना बिचारे किया गया काम मन में खटकता रहता है और उसका दुख टाले नहीं टलता। इसलिए मन अशांत रहता है और खान-पान, सम्मान, राग-रंग भी अच्छे नहीं लगते। दुनिया की हँसी भी इसी असफलता का परिणाम है, मूल कारण वही बिना विचारे किया कार्य है।
(क) (3) “बीती ताहि बिसारि दे आगे की सुधि लेइ” पंक्ति द्वारा कौन-सी सलाह दी गई है? • भविष्य की सफलता के लिए अतीत की गलतियों से सीखने की • अतीत की असफलताओं को भूलकर भविष्य पर ध्यान देने की • अतीत और भविष्य दोनों घटनाओं को समान रूप से याद रखने की • अतीत और भविष्य दोनों को भूलकर केवल वर्तमान में जीने की
सही सलाह है - अतीत की असफलताओं को भूलकर भविष्य पर ध्यान देने की। कवि कहते हैं जो बीत गया सो बीत गया, उसे याद करके दुखी होने से अच्छा है कि आगे की सुध लें और भविष्य को सुधारने की कोशिश करें।
(क) (4) “जो बनि आवै सहज में ताही में चित्त देइ” पंक्ति का क्या अर्थ है? • हमें कठिनाइयों और चुनौतियों से बचना चाहिए। • हमें आराम की तलाश करने में मन लगाना चाहिए। • हमें असंभव और कठिन कार्यों पर ध्यान देना चाहिए। • हमें सहज जीवन पर ध्यान देना चाहिए।
सही अर्थ है - हमें सहज जीवन पर ध्यान देना चाहिए। कवि की सलाह है कि जो काम आसानी से, स्वाभाविक रूप से बन सके, उसी में मन लगाओ। अनावश्यक रूप से बहुत कठिन या असंभव काम के पीछे पड़कर परेशान होने से बेहतर है सहज मार्ग अपनाना, ताकि दुर्जन हँसें नहीं और मन में कोई अपराधबोध न रहे।
(ख) हो सकता है कि आपके समूह के साथियों ने अलग-अलग उत्तर चुने हों। अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?
इस प्रश्न में हर विद्यार्थी अपने चुने हुए विकल्प का कारण बताएगा। जैसे मैंने (1) में ‘अपना काम बिगड़ जाता है’ इसलिए चुना क्योंकि कविता में साफ लिखा है ‘काम बिगारे आपनो’। (2) में मैंने ‘बिना सोचे-समझे कार्य की असफलता’ चुना क्योंकि कवि ने कहा है कि वही दुख मन में खटकता है। चर्चा से पता चलता है कि सबने कविता की पंक्तियों को ध्यान से पढ़कर ही उत्तर चुने हैं, और अलग-अलग सोच से समझ और गहरी होती है।
पंक्तियों पर चर्चा
पाठ में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यान से पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया? अपने विचार अपने समूह में साझा कीजिए और लिखिए। (क) “बिना बिचारे जो करै सो पाछे पछिताय। काम बिगारे आपनो जग में होत हँसाय॥”
इस दोहे का अर्थ है कि जो व्यक्ति बिना सोचे-विचारे जल्दी में कोई काम कर देता है, उसे बाद में पछताना पड़ता है। उसका अपना काम बिगड़ जाता है और समाज में लोग उसकी मूर्खता पर हँसते हैं। जैसे परीक्षा में बिना प्रश्न पढ़े उत्तर लिखना या बिना सोचे दोस्तों की नकल करना। इसलिए कोई भी बड़ा कदम उठाने से पहले सोच-विचार करना जरूरी है।
पंक्तियों पर चर्चा (ख) “बीती ताहि बिसारि दे आगे की सुधि लेइ। जो बनि आवै सहज में ताही में चित्त देइ॥”
इसका अर्थ है कि जो समय बीत गया उसे भुला दो और आगे की चिंता करो। जो काम सहजता से हो सके, उसी में मन लगाओ। अगर हम पुरानी असफलता को लेकर रोते रहेंगे तो नया काम नहीं कर पाएँगे। जैसे खेल में हार गए तो हार को भुलाकर अगली प्रतियोगिता की तैयारी करो और जो अभ्यास आसानी से कर सकते हो, उसी पर ध्यान दो। इससे दुर्जन भी हँसी नहीं उड़ाएँगे और मन हल्का रहेगा।
मिलकर करें मिलान
जग में होत हँसाय चित्त में चैन न पावै। खान पान सन्मान राग रंग मनहि न भावै॥
बिना विचार के किए गए कार्य के कारण मन अशांत रहता है। अच्छा खान-पान, सम्मान या जीवन की खुशियाँ भी उस व्यक्ति को सुख नहीं दे पातीं।
कह गिरधर कविराय दुख कछु टरत न टारे। खटकत है जिय माहिं कियो जो बिना बिचारे॥
जो कार्य बिना विचार किए किया जाता है, वह लंबे समय तक मन में खटकता रहता है और उसकी पीड़ा से छुटकारा पाना मुश्किल होता है।
ताही में चित्त देइ बात जोई बनि आवै। दुर्जन हँसै न कोइ चित्त में खता न पावै॥
ऐसे कार्य कीजिए कि किसी बुरे व्यक्ति को हँसने का मौका न मिले और मन में किसी प्रकार का दोष या अपराधबोध न हो।
कह गिरधर कविराय यहै करु मन परतीती। आगे को सुख होइ समुझि बीती सो बीती॥
अपने मन को इस बात पर विश्वास करना सिखाओ कि भविष्य की खुशी को समझते हुए अतीत के दुखों को भूलकर आगे बढ़ना चाहिए।
सोच-विचार के लिए
(क) “बिना बिचारे जो करै सो पाछे पछिताय।” कविता में बिना विचार किए कार्य करने के क्या नुकसान बताए गए हैं?
कविता में चार नुकसान बताए गए हैं - 1. बाद में पछताना पड़ता है। 2. अपना काम बिगड़ जाता है। 3. जग में हँसी उड़ती है, लोग मजाक उड़ाते हैं। 4. मन में चैन नहीं मिलता, खान-पान, सम्मान और राग-रंग भी अच्छे नहीं लगते और किया गया काम लंबे समय तक दिल में खटकता रहता है जिसका दुख टाले नहीं टलता।
(ख) “बिना बिचारे जो करै सो पाछे पछिताय।” कुंडलिया में जो बातें सैंकड़ों साल पहले कही गई थीं, क्या वे आपके लिए भी उपयोगी हैं? कैसे? उदाहरण देकर समझाइए।
हाँ, ये बातें आज भी पूरी तरह उपयोगी हैं। आज भी जल्दबाजी में गलत निर्णय लेने से नुकसान होता है। उदाहरण - बिना सोचे सोशल मीडिया पर किसी लिंक पर क्लिक कर देना और बैंक का पैसा गँवा देना, या बिना पढ़े परीक्षा में उत्तर लिख देना। इसलिए सोच-समझकर काम करने की सीख हर युग में काम आती है।
(ग) “खान पान सन्मान राग रंग मनहि न भावै॥” इस पंक्ति में रेखांकित शब्दों के अर्थ शब्दकोश से देखकर लिखिए। प्रत्येक के लिए एक-एक उदाहरण भी दीजिए।
खान - खाना, भोजन। उदाहरण - स्वस्थ खान से सेहत बनती है। पान - पीना, पेय। उदाहरण - नींबू-पानी एक अच्छा पान है। सन्मान - इज्जत, आदर। उदाहरण - बड़ों का सन्मान करना चाहिए। राग - प्रेम, गीत, संगीत। उदाहरण - माँ का राग बच्चों के लिए मीठा होता है। रंग - खुशी, उत्सव, मनोरंजन। उदाहरण - होली में सब रंग का आनंद लेते हैं। जब मन दुखी होता है तो ये सब चीजें भी अच्छी नहीं लगतीं।
अनुमान और कल्पना से
(क) आपने पढ़ा है कि “बिना बिचारे जो करै सो पाछे पछिताय...।” कल्पना कीजिए कि आपके एक मित्र ने बिना सोचे-समझे एक बड़ा निर्णय लिया है। वह निर्णय क्या था और उसका क्या प्रभाव पड़ा? इसके बारे में एक रोचक कहानी अपने साथियों के साथ मिलकर बनाइए और कक्षा में प्रस्तुत कीजिए।
एक कल्पित कहानी - मेरा मित्र अमन ने बिना माता-पिता से पूछे ऑनलाइन गेम में 5000 रुपये खर्च कर दिए क्योंकि उसे लगा कि वह इनाम जीतेगा। बाद में पता चला कि वह एक नकली गेम था। उसका पैसा डूब गया, माता-पिता नाराज हुए और उसका मोबाइल एक महीने के लिए बंद कर दिया गया। उसे बहुत पछतावा हुआ और उसने सीखा कि कोई भी आर्थिक निर्णय बिना बिचारे नहीं लेना चाहिए।
(ख) कल्पना कीजिए कि “बीती ताहि बिसारि दे आगे की सुधि लेइ...।” कविता निम्नलिखित के लिए लिखी गई है — • आप • आपका कोई सहपाठी • आपका कोई परिजन • आपके कोई शिक्षक • कोई पक्षी • कोई पशु इनकी कौन-कौन सी समस्याएँ होंगी? यह कविता उन्हें कैसे प्रेरित करेगी?
आप - परीक्षा में कम अंक आए तो बीती को भुलाकर अगली परीक्षा की तैयारी। सहपाठी - दौड़ में हार गया तो हार भुलाकर अभ्यास। परिजन - व्यापार में घाटा हुआ तो निराश न होकर नई योजना। शिक्षक - कक्षा में प्रयोग असफल हुआ तो नया तरीका। पक्षी - घोंसला टूट गया तो नया घोंसला बनाना। पशु - जंगल में भोजन न मिला तो नई जगह खोजना। कविता सबको सिखाती है कि अतीत के दुख को पकड़कर बैठने से बेहतर है भविष्य की ओर देखना।
(ग) कल्पना कीजिए कि आप एक ऐसे व्यक्ति से मिले हैं, जो हमेशा बीती बातों में खोया रहता है। आप उसे समझाने के लिए क्या-क्या कहेंगे?
मैं उससे कहूँगा - भाई, बीती बातों को याद करके दुखी होने से वर्तमान भी खराब होता है। जो हो गया उसे बदल नहीं सकते, पर आगे को अच्छा बना सकते हैं। कवि गिरधर कहते हैं ‘बीती सो बीती’ समझो। अपने सहज काम में मन लगाओ, नए लक्ष्य बनाओ, दोस्तों से बात करो और सकारात्मक सोचो। इससे मन हल्का होगा और भविष्य सुखद होगा।
शब्द से जुड़े शब्द
नीचे दिए गए रिक्त स्थानों में ‘चित्त’ या ‘मन’ से जुड़े शब्द कुंडलियों में से चुनकर लिखिए—
कुंडलियों में ‘मन/चित्त’ से जुड़े शब्द हैं - चित्त, चैन, मनहि, जिय, खता, परतीती। उदाहरण के लिए - चित्त में चैन न पावै, मनहि न भावै, जिय माहिं खटकत है, चित्त में खता न पावै, मन परतीती करु। ये सभी शब्द मन की दशा - शांति, दुख, विश्वास और अपराधबोध - को बताते हैं।
कविता की रचना
(क) अब आप पाठ में दी गई दोनों कुंडलियों को ध्यान से देखिए और अपने-अपने समूह में मिलकर इनकी विशेषताओं की सूची बनाइए। अपने समूह की सूची को कक्षा में सबके साथ साझा कीजिए। जो विशेषताएँ दोनों कुंडलियों में हैं | जो विशेषताएँ किसी एक कुंडलिया में हैं
दोनों कुंडलियों में समान विशेषताएँ - 1. हर कुंडलिया में 6 पंक्तियाँ हैं और दोहे जैसा लय है। 2. पहली पंक्ति का पहला शब्द आखिरी पंक्ति का आखिरी शब्द भी है (बिना... बिचारे, बीती... बीती)। 3. कवि का नाम ‘कह गिरधर कविराय’ आता है। 4. नीति की सीधी सरल भाषा है। केवल एक में मिलने वाली विशेषता - पहली कुंडलिया में ‘खान पान सन्मान राग रंग’ में एक ही मात्रा की आवृत्ति है, दूसरी में ‘बीती/आगे’ जैसा समय का विरोध है।
(ख) नीचे एक स्तंभ में कविता की पंक्तियों की कुछ विशेषताएँ दी गई हैं और उनसे संबंधित पंक्तियाँ दूसरे स्तंभ में दी गई हैं। कविता की विशेषताओं का सही पंक्तियों से मिलान कीजिए— कविता की विशेषताएँ 1. पंक्ति के अंतिम शब्द की ध्वनि आपस में मिलती-जुलती है। 2. कवि के नाम का उल्लेख किया गया है। 3. एक-दूसरे के विपरीत विचार एक साथ आए हैं। 4. एक ही वर्ण से शुरू होने वाले एक से अधिक शब्द एक ही पंक्ति में आए हैं। | कविता की पंक्तियाँ 1. कह गिरधर कविराय यहै करु मन परतीती॥ 2. ताही में चित्त देइ बात जोई बनि आवै। दुर्जन हँसै न कोइ चित्त में खता न पावै॥ 3. बिना बिचारे जो करै सो पाछे पछिताय। 4. बीती ताहि बिसारि दे आगे की सुधि लेइ।
सही मिलान इस प्रकार है - 1. पंक्ति के अंतिम शब्द की ध्वनि मिलती-जुलती है - ‘बिना बिचारे जो करै सो पाछे पछिताय’ और ‘बीती ताहि बिसारि दे आगे की सुधि लेइ’ में तुक मिलती है। 2. कवि के नाम का उल्लेख - ‘कह गिरधर कविराय यहै करु मन परतीती॥’ 3. विपरीत विचार एक साथ - ‘बीती ताहि बिसारि दे आगे की सुधि लेइ’ में बीती (भूत) और आगे (भविष्य) विपरीत हैं। 4. एक ही वर्ण से शुरू होने वाले शब्द - ‘खान पान सन्मान’ या ‘ताही में चित्त देइ’ में समान वर्णों की आवृत्ति।
काल से जुड़े शब्द
(क) नीचे कुछ शब्द दिए गए हैं। इनका प्रयोग करते हुए तीनों प्रकार के ‘काल’ व्यक्त करने वाले तीन-तीन वाक्य बनाइए— भूतकाल | वर्तमान काल | भविष्य काल कल | आज | कल परसों | अभी-अभी | परसों पहले | अब | अगले दिन/साल/महीने पिछला | हमेशा | आगामी (आने वाले समय में) बीते हुए | आजकल | जल्दी ही
उदाहरण वाक्य - कल (भूत) - मैं कल विद्यालय नहीं गया। आज (वर्तमान) - मैं आज विद्यालय जा रहा हूँ। कल (भविष्य) - मैं कल विद्यालय जाऊँगा। परसों मैं मेले में गया था। मैं अभी-अभी खाना खा रहा हूँ। मैं परसों मामा के घर जाऊँगा। पहले मैं साइकिल नहीं चलाता था। अब मैं रोज साइकिल चलाता हूँ। अगले महीने हम यात्रा पर जाएँगे। पिछला साल अच्छा रहा। मैं हमेशा सच बोलता हूँ। आगामी वर्ष में हम नई कक्षा में होंगे। बीते हुए दिन याद आते हैं। आजकल बहुत गर्मी है। मैं जल्दी ही गृहकार्य पूरा कर लूँगा।
(ख) आपने जो वाक्य बनाए हैं, उन्हें ध्यान से देखिए। पहचानिए कि इन वाक्यों में किन शब्दों से पता चल रहा है कि वाक्य में कार्य भूतकाल में हुआ, वर्तमान काल में हुआ है या भविष्य काल में होगा? वाक्यों में उन शब्दों को रेखांकित कीजिए।
भूतकाल की पहचान - कल, परसों, पहले, पिछला, बीते हुए जैसे शब्द और क्रिया के भूत रूप ‘गया था, किया था’ से। वर्तमान की पहचान - आज, अभी-अभी, अब, हमेशा, आजकल और क्रिया के रूप ‘रहा हूँ, है, करता हूँ’ से। भविष्य की पहचान - कल, परसों, अगले दिन, आगामी, जल्दी ही और क्रिया के रूप ‘जाऊँगा, होगा, करूँगा’ से। इन शब्दों को रेखांकित करने से काल स्पष्ट हो जाता है।
आपकी बात
(क) “खटकत है जिय माहिं कियो जो बिना बिचारे॥” का अर्थ है ‘बिना सोचे किए गए कार्य मन में चुभते रहते हैं।’ क्या आपने कभी ऐसा अनुभव किया है? उस घटना को साझा कीजिए।
हाँ, मैंने अनुभव किया है। एक बार मैंने बिना सोचे दोस्त की किताब पर पेन से चित्र बना दिया। बाद में किताब खराब हो गई और दोस्त दुखी हुआ। मुझे बहुत पछतावा हुआ और वह बात कई दिन तक मन में खटकती रही। तब समझ आया कि बिना सोचे काम नहीं करना चाहिए।
(ख) “बीती ताहि बिसारि दे आगे की सुधि लेइ।” का अर्थ है ‘अतीत को भूलना और भविष्य पर ध्यान देना चाहिए।’ क्या आप इस बात से सहमत हैं? क्यों? उदाहरण देकर समझाइए।
हाँ, मैं सहमत हूँ। अगर हम पुरानी गलती को पकड़कर रोते रहेंगे तो आगे नहीं बढ़ पाएँगे। उदाहरण - यदि परीक्षा में कम अंक आए तो उसी को सोचकर उदास रहने से बेहतर है कि गलतियाँ सुधारकर अगली परीक्षा की तैयारी करें। इससे भविष्य सुधरता है और मन भी हल्का रहता है।
(ग) पाठ में दी गई दोनों कुंडलियों के आधार पर आप अपने जीवन में कौन-कौन से बदलाव लाना चाहेंगे?
मैं दो बदलाव लाऊँगा - पहला, कोई भी काम करने से पहले सोच-विचार करूँगा, जल्दबाजी नहीं करूँगा ताकि पछताना न पड़े। दूसरा, पुरानी असफलताओं को भुलाकर भविष्य की योजना बनाऊँगा और जो काम सहजता से कर सकता हूँ, उसी में मन लगाऊँगा ताकि मन में शांति रहे।
(घ) “खान पान सन्मान राग रंग मनहि न भावै॥” इस पंक्ति में खान-पान, सम्मान और राग-रंग अच्छा न लगने की बात कही गई है। आप इसमें से किसे सबसे आवश्यक मानते हैं? अपने उत्तर के कारण भी बताइए।
मैं खान-पान को सबसे आवश्यक मानता हूँ क्योंकि भोजन के बिना जीवन नहीं चल सकता। सम्मान और राग-रंग भी जरूरी हैं, पर स्वास्थ्य के लिए पौष्टिक खान-पान सबसे पहले चाहिए। यदि मन दुखी हो तो भी भूख लगती है और शरीर को ऊर्जा चाहिए, इसलिए खान-पान बुनियादी जरूरत है।
हँसी
(क) कभी-कभी लोग दूसरों की गलतियों पर ही नहीं, उनके किसी भी कार्य पर हँस देते हैं। अपने समूह के साथ मिलकर ऐसी कुछ स्थितियों की सूची बनाइए, जब किसी को आप पर या आपको किसी पर हँसी आई हो।
कुछ स्थितियाँ - 1. जब मैं कक्षा में फिसलकर गिर गया तो सब हँसे। 2. जब मेरे दोस्त ने गलत उच्चारण किया तो मुझे हँसी आई। 3. खेल में कोई आउट हो जाए तो दर्शक हँसते हैं। 4. किसी की नई हेयरस्टाइल पर मजाक उड़ाना। ये हँसी कभी प्यार भरी होती है, कभी चोट पहुँचाने वाली।
(ख) ऐसी दोनों स्थितियों में आपको कैसा लगता है और दूसरों को कैसा लगता होगा?
जब लोग मुझ पर हँसते हैं तो मुझे शर्म और दुख लगता है, आत्मविश्वास कम होता है। जब मैं दूसरों पर हँसता हूँ तो थोड़ी देर मजा आता है पर बाद में अपराधबोध होता है कि मैंने किसी को दुखी किया। दूसरों को भी वैसा ही बुरा लगता होगा, इसलिए सोच-समझकर हँसना चाहिए।
(ग) सोचिए कि कोई व्यक्ति आपकी किसी भूल पर हँस रहा है। ऐसे में आप क्या कहेंगे या क्या करेंगे ताकि उसे एहसास हो जाए कि इस बात पर हँसना ठीक नहीं है?
मैं शांत स्वर में कहूँगा - ‘आप हँस रहे हैं पर यह मेरी भूल थी, मुझे सीखने का मौका दीजिए। किसी की गलती पर हँसना उसे और दुखी करता है।’ और मैं अपनी गलती सुधारने की कोशिश करूँगा। यदि वह फिर भी हँसे तो शिक्षक या बड़े की मदद लूँगा।
सोच-समझकर
(क) आज के समय में कुछ लोग जल्दी में कार्य कर देते हैं या जल्दी में निर्णय ले लेते हैं। कुछ ऐसी स्थितियाँ बताइए जहाँ जल्दबाजी में निर्णय लेना या कार्य करना हानिकारक हो सकता है।
हानिकारक स्थितियाँ - 1. बिना हेलमेट बाइक चलाना। 2. सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाना। 3. अनजान लिंक पर क्लिक करके बैंक जानकारी देना। 4. बिना पढ़े परीक्षा में उत्तर लिखना। 5. जल्दबाजी में सड़क पार करना। इनमें दुर्घटना, पैसा खोना या बदनामी हो सकती है।
आपका बैंक खाता बंद होने वाला है।
ओ.टी.पी. किसी को न दें। तुरंत कॉल काट दें। अपने बैंक से संपर्क करें।
बधाई हो! आपने 10 लाख रुपये की लॉटरी जीती है। सत्यापन के लिए ₹ 5000 इस नंबर पर अभी भेज दें।
संदिग्ध वेबसाइट पर कोई भुगतान न करें। ऐसी वेबसाइट को साइबर क्राइम सेल में रिपोर्ट करें।
गलती से आपके नंबर पर ₹ 1000 का रिफंड भेजा है। कृपया रिफंड वापस भेज दें।
किसी अनजान को पैसा न भेजें। अपने बैंक ऐप में सभी लेन-देन की जाँच करें। यदि पैसा कट गया है तो तुरंत बैंक को सूचित करें।
आपका सिम कार्ड बंद होने वाला है। के.वाई.सी. अपडेट करने के लिए हमें आधार और पैन की फोटो भेजें।
इस प्रकार के कॉल को तुरंत काट दें। बैंक से सीधे संपर्क करें। फोन पर आधार या पैन या कोई व्यक्तिगत जानकारी साझा न करें।
आपके मनपसंद मोबाइल पर 70 प्रतिशत तक की छूट, ऑफर खत्म होने से पहले यहाँ पेमेंट करें।
संदिग्ध छूट वाले या मुफ्त वाले झाँसे में न फँसें। लिंक पर क्लिक न करें।
मैं तुम्हारा चाचा बोल रहा हूँ। ट्रेन में फँसा हूँ। तुरंत ₹ 5000 इस नंबर पर भेज दो।
व्यक्ति की पहचान की पुष्टि करें, तुरंत पैसे ट्रांसफर न करें। परिवार के अन्य सदस्यों से बात करें।
इस ऐप को डाउनलोड करें और ₹ 1000 का कैशबैक पाएँ।
किसी अनजानी वेबसाइट से कोई ऐप डाउनलोड न करें। ऐप की समीक्षा और रेटिंग की जाँच करें। संदिग्ध ऐप को फोन आदि से हटा दें।
यहाँ मुफ्त गिफ्ट पाने का मौका है। इस लिंक पर क्लिक करें और जानकारी दर्ज करें।
किसी संदिग्ध ऐड पर क्लिक न करें। अपने ब्राउज़र में पॉप-अप ब्लॉकर चालू करें।
आपको बिना गारंटी के तुरंत ₹ 50,000 का ऋण मिल सकता है। अभी प्रोसेसिंग फीस भरें।
केवल अधिकृत बैंकों से संपर्क करें। ऋण मंजूरी फीस के नाम पर किसी को पैसा न भेजें। साइबर क्राइम सेल में 1930 नंबर पर सूचित करें।
इस लिंक पर क्लिक करें और ₹ 100 का फ्री मोबाइल रिचार्ज पाएँ।
ऐसी किसी भी लॉटरी पर भरोसा न करें। इसके विषय में साइबर सेल को सूचित करें।
आपके ए.टी.एम. कार्ड की वैधता समाप्त हो रही है। इसे तुरंत अपडेट करने के लिए पिन बताएँ।
ए.टी.एम. कार्ड की जानकारी किसी के साथ साझा न करें। बैंक के असली उपभोक्ता सहायता फोन नंबर पर संपर्क करें। ए.टी.एम. पिन तुरंत बदलें।
आपका पेमेंट फँसा हुआ है। इसे रिफंड करने के लिए ये क्यू.आर. कोड स्कैन करें।
किसी अज्ञात व्यक्ति के भेजे क्यू.आर. कोड को स्कैन न करें। किसी संदिग्ध गतिविधि को तुरंत बैंक और पुलिस को रिपोर्ट करें।
(ग) नीचे कुछ स्थितियाँ दी गई हैं। इन स्थितियों में बिना सोचे-समझे कार्य करने या निर्णय लेने के क्या परिणाम हो सकते हैं— • सोशल मीडिया पर झूठा संदेश या असत्य समाचार पर भरोसा करके उसे सबको भेज दिया। • जल्दबाजी में बिना हेलमेट के बाइक चलाने पर पुलिस ने चालान काट दिया। • बिना माता-पिता से पूछे ऑनलाइन गेम पर पैसे खर्च कर दिए।
पहली स्थिति - झूठा संदेश फैलाने से अफवाह फैलेगी, लोग घबराएँगे और आपको साइबर कानून के तहत दंड मिल सकता है। दूसरी - बिना हेलमेट चलाने से दुर्घटना में गंभीर चोट लग सकती है और चालान का आर्थिक नुकसान। तीसरी - माता-पिता का विश्वास टूटेगा, पैसे डूबेंगे और भविष्य में पॉकेट मनी बंद हो सकती है। तीनों में बिना बिचारे काम का पछतावा होता है।
आज की पहेली
“खान पान सन्मान” इस पंक्ति के तीनों शब्दों में केवल एक मात्रा का बार-बार उपयोग किया गया है। (आ की मात्रा) ऐसे ही दो वाक्य नीचे दिए गए हैं जिसमें केवल एक मात्रा का उपयोग किया गया है— नीली नदी धीमी थी। चींटी चीनी जीम गई। अब आप इसी प्रकार के वाक्य अलग-अलग मात्राओं के लिए बनाइए। ध्यान रहे, आपके वाक्यों का कोई न कोई अर्थ होना चाहिए। आप एक वाक्य में केवल एक मात्रा को बार-बार या बिना मात्रा वाले शब्दों का ही उपयोग कर सकते हैं। मात्रा - आ, इ, ई, उ, ऊ, ऋ, ए, ऐ, ओ, औ | वाक्य
उदाहरण वाक्य - आ मात्रा - राम बाजार आया। इ मात्रा - निखिल लिख रहा है। ई मात्रा - नीली नदी धीमी थी। उ मात्रा - कुसुम उठ, कुछ कर। ऊ मात्रा - फूल सूख गया। ऋ मात्रा - वृक्ष पर मृग बैठा। ए मात्रा - मेघ ने घेरे डेरे। ऐ मात्रा - मैना बैल गाय जैसी। ओ मात्रा - मोहन सो रहा। औ मात्रा - औषधि बहुत महँगी। हर वाक्य में केवल एक मात्रा का प्रयोग किया गया है और अर्थ भी स्पष्ट है।
खोजबीन के लिए
आपने इस पाठ में गिरधर कविराय की कुंडलिया “बिना बिचारे जो करै....।” को पढ़ा। अब आप नीचे दी गई इंटरनेट कड़ी का प्रयोग करके एक अन्य कहानी “बिना बिचारे करो न काम” सुन सकते हैं— https://www.youtube.com/watch?v=9zEP4YEP-rs
यह एक श्रवण कार्य है। दी गई यूट्यूब कड़ी को खोलकर कहानी सुनिए। कहानी में भी यही नीति बताई गई है कि बिना सोचे-समझे काम करने से हानि होती है। सुनने के बाद कहानी का सार अपने शब्दों में लिखिए और बताइए कि कहानी के पात्र ने क्या गलती की और उसे क्या सीख मिली।


7
2
