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नहीं होना बीमार — Class 7 Hindi

मल्हार · Chapter 5

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Chapter summary

स्वयं प्रकाश की यह रोचक कहानी एक बालक के अनुभव पर आधारित है। एक दिन वह अपनी नानीजी के साथ बीमार पड़ोसी सुधाकर काका को अस्पताल देखने जाता है। वहाँ का शांत, साफ-सुथरा वातावरण, हरे पेड़ और काका को मिल रही साबूदाने की खीर देखकर बालक के मन में आता है कि "बीमारों के क्या ठाठ हैं!" कुछ दिन बाद, जब उसका होमवर्क नहीं हुआ होता और स्कूल जाने का मन नहीं करता, तो वह बीमारी का बहाना बनाकर रजाई में पड़ा रहता है। नानाजी उसका माथा और नब्ज़ देखकर बता देते हैं कि बुखार नहीं है, फिर भी उसे कड़वी पुड़िया और काढ़े जैसी चाय पिला देते हैं और भूखा रहने की सलाह देकर कहते हैं कि इससे सारे विकार निकल जाएँगे। बालक दिन भर अकेला, भूखा और ऊबा हुआ बिस्तर पर पड़ा रहता है। वह घर की गतिविधियों का अनुमान लगाता है, खाने की चीज़ों के बारे में सोचता रहता है, और जब देखता है कि मन्नू आम चूस रहा है तो उसे ईर्ष्या और कुढ़न होती है। पूरे दिन भूखे रहने के बाद वह समझ जाता है कि स्कूल चले जाना ही ठीक होता। कहानी हास्य और बालमनोविज्ञान के साथ यह सीख देती है कि बहाने बनाने का परिणाम स्वयं को ही भुगतना पड़ता है — इसके बाद उसने कभी बीमारी का बहाना नहीं बनाया।

The story in steps

  1. बच्चा नानीजी के साथ अस्पताल जाता है और वहाँ बीमार सुधाकर काका को देखता है।
  2. अस्पताल की शांति, साफ़ बिस्तर और साबूदाने की खीर देखकर उसे बीमारों के ठाठ अच्छे लगते हैं।
  3. एक दिन होमवर्क न होने और स्कूल न जाने की इच्छा से वह खुद को बीमार बताकर रजाई में पड़ा रहता है।
  4. नानाजी उसे दवा और काढ़े जैसी चाय देते हैं और खाने को कुछ नहीं देने को कहते हैं।
  5. दिन भर अकेले पड़े-पड़े बच्चा ऊब, भूख और पछतावे से भर जाता है और घरवालों को खाते देख जलता है।
  6. शाम तक भूखा रहकर वह समझ जाता है कि बीमारी का बहाना बुरा है और फिर ऐसा नहीं करता।
बीमारी का बहानाअस्पताल का दृश्यबालमनोविज्ञानभूख और ईर्ष्यासीख और पश्चाताप

Key ideas & terms

बहाना
किसी काम (यहाँ स्कूल) से बचने के लिए झूठा कारण गढ़ना; कहानी का केंद्रीय विषय।
साबूदाने की खीर
साग वृक्ष से बने साबूदाने की खीर, जो प्रायः बीमारी या उपवास में बनाई जाती है; बालक के आकर्षण का केंद्र।
काढ़ा
जड़ी-बूटियों को उबालकर बनाया गया पेय, जो सर्दी-खाँसी, बुखार आदि में लाभकारी माना जाता है।
चित्रात्मक भाषा
ऐसी भाषा जिससे पढ़ते ही दृश्य आँखों के सामने चित्र की तरह उभर आए, जैसे अस्पताल का वर्णन।
बालमनोविज्ञान
बच्चे के मन के भाव, कल्पनाएँ और प्रतिक्रियाएँ, जिन्हें कहानी में रोचक ढंग से दिखाया गया है।
स्वयं प्रकाश
हिंदी के जाने-माने कथाकार, जिनकी कहानियाँ बच्चों और बड़ों के जीवन के अनुभवों को सहजता से छूती हैं।

शब्दार्थ · Word meanings

वाडर्
रोगियों के रहने का बड़ा कमरा
अभिवादन
नमस्ते करना
साबूदाने
सागू से बने छोटे दाने
रजाई
रुई भरा गरम ओढ़ना
थर्मामीटर
तापमान नापने का यंत्र
पुड़िया
कागज़ में बँधी दवा
काढ़े जैसी चाय
जड़ी-बूटियों जैसी कड़वी चाय
चहल-पहल
आवाजाही और रौनक
बघार
घी-मसाले का तड़का
विकार
शरीर की खराबी या रोग
रुआँसा
रोने जैसा उदास
ठेले
पहियों वाली हाथगाड़ी

Extra questions & answers

बच्चे ने बीमारी का बहाना क्यों बनाया?

क्योंकि उसने होमवर्क नहीं किया था और उसका स्कूल जाने का मन नहीं था, इसलिए सज़ा से बचने के लिए उसने बीमारी का बहाना बना लिया।

अस्पताल में बच्चे को कौन-सी बातें अच्छी लगीं?

वहाँ का शांत व साफ-सुथरा वातावरण, बड़ी खिड़कियों के पास झूमते हरे पेड़, शोरगुल का न होना तथा काका को मिल रही साबूदाने की खीर।

"क्या ठाठ हैं बीमारों के भी!" बच्चे के मन में यह बात क्यों आई?

क्योंकि उसे लगा कि बीमार व्यक्ति को आराम मिलता है, साफ बिस्तर पर लेटना और स्वादिष्ट साबूदाने की खीर खाना — यह सब उसे आकर्षक लगा।

नानाजी ने बच्चे की "बीमारी" का क्या इलाज किया?

उन्होंने माथा-नब्ज़ देखकर बता दिया कि बुखार नहीं है, फिर भी कड़वी पुड़िया और काढ़े जैसी चाय पिलाई तथा भूखा रहकर आराम करने को कहा।

दिन भर अकेले लेटे रहने पर बच्चे के मन में कौन-कौन से भाव आए?

ऊब, भूख, अकेलापन, खाने की लालसा तथा आम चूसते मन्नू को देखकर ईर्ष्या और कुढ़न जैसे भाव उसके मन में आए।

मन्नू को आम चूसते देखकर बच्चे को कैसा लगा?

उसे जलन, गुस्सा और कुढ़न हुई और वह पाँव पटकता हुआ वापस बिस्तर में आ गया।

कहानी के अंत में बच्चे ने क्या निर्णय लिया?

उसने तय किया कि इसके बाद स्कूल से छुट्टी मारने के लिए वह कभी बीमारी का बहाना नहीं बनाएगा।

"चित्रात्मक भाषा" का प्रयोग कहानी में कहाँ दिखता है?

अस्पताल के वर्णन में — हरे झूमते पेड़, शांति, धीमी गुनगुन आदि — जहाँ पढ़ते ही दृश्य आँखों के सामने उभर आता है।

कहानी में हास्य कहाँ-कहाँ झलकता है?

बच्चे की कल्पनाओं, साबूदाने की खीर के प्रति लालच, नानाजी के कड़वे इलाज तथा भूख में खाने की चीज़ों की कल्पना में हास्य झलकता है।

कहानी हमें क्या सीख देती है?

कि बहाने बनाने या झूठ बोलने का परिणाम अंततः स्वयं को ही भुगतना पड़ता है, इसलिए ईमानदारी से अपना कर्तव्य निभाना ही उचित है।

मेरी समझ से

(क) नीचे दिए गए प्रश्नों का सही उत्तर कौन-सा है? उसके सामने तारा (★) बनाइए। कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं। (1) बच्चे के विद्यालय न जाने का मुख्य कारण क्या था? • उसका विद्यालय जाने का मन नहीं था। • उसका साबूदाने की खीर खाने का मन था। • उसने गृहकार्य नहीं किया था। • उसे बुखार हो गया था।

बच्चे के विद्यालय न जाने का मुख्य कारण यह था कि उसका विद्यालय जाने का मन नहीं था और उसने गृहकार्य नहीं किया था। उसे डर था कि स्कूल जाने पर सजा मिलेगी, इसलिए उसने बीमार होने का बहाना बनाया। उसे वास्तव में बुखार नहीं था।

(क) नीचे दिए गए प्रश्नों का सही उत्तर कौन-सा है? उसके सामने तारा (★) बनाइए। कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं। (2) कहानी के अंत में बच्चे ने कहा, "इसके बाद स्कूल से छुट्टी मारने के लिए मैंने बीमारी का बहाना कभी नहीं बनाया।" बच्चे ने यह निर्णय लिया क्योंकि— • घर में रहने के बजाय विद्यालय जाना अधिक रोचक है। • बीमारी का बहाना बनाने से साबूदाने की खीर नहीं मिलती। • झूठ बोलने से झूठ के खुलने का डर हमेशा बना रहता है। • इस बहाने के कारण उसे दिनभर अकेले और भूखे रहना पड़ा।

बच्चे ने यह निर्णय इसलिए लिया क्योंकि बीमारी के बहाने से उसे पूरे दिन अकेले और भूखे रहना पड़ा, जो बहुत कष्टदायक और उबाऊ था। साथ ही उसे समझ आया कि घर में अकेले लेटे रहने से विद्यालय जाना अधिक रोचक और अच्छा है।

(क) नीचे दिए गए प्रश्नों का सही उत्तर कौन-सा है? उसके सामने तारा (★) बनाइए। कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं। (3) "लेटे-लेटे पीठ दुखने लगी" इस बात से बच्चे के बारे में क्या पता चलता है? • उसे बिस्तर पर लेटे रहने के कारण ऊब हो गई थी। • उसे अपनी बीमारी की कोई चिंता नहीं रह गई थी। • वह बिस्तर पर आराम करने का आनंद ले रहा था। • बीमारी के कारण उसकी पीठ में दर्द हो रहा था।

इस बात से पता चलता है कि उसे लगातार बिस्तर पर लेटे रहने के कारण ऊब और थकान हो गई थी। वह वास्तव में बीमार नहीं था, इसलिए आराम का आनंद नहीं बल्कि बिस्तर पर पड़े रहने की तकलीफ महसूस कर रहा था।

(क) नीचे दिए गए प्रश्नों का सही उत्तर कौन-सा है? उसके सामने तारा (★) बनाइए। कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं। (4) "क्या ठाठ हैं बीमारों के भी!" बच्चे के मन में यह बात आई क्योंकि— • बीमार व्यक्ति को बहुत आराम करने को मिलता है। • बीमार व्यक्ति को अच्छे खाने का आनंद मिलता है। • बीमार व्यक्ति को विद्यालय नहीं जाना पड़ता है। • बीमार व्यक्ति अस्पताल में शांति से लेटा रहता है।

बच्चे ने अस्पताल में सुधाकर काका को साफ-सुथरे बिस्तर पर शांति से लेटे हुए और नर्स द्वारा दवा तथा नानी द्वारा साबूदाने की खीर खिलाते देखा। उसे लगा कि बीमार को आराम मिलता है, अच्छा खाने को मिलता है, स्कूल नहीं जाना पड़ता और अस्पताल में शांति रहती है, इसलिए उसने ऐसा सोचा।

(ख) हो सकता है कि आपके समूह के साथियों ने अलग-अलग उत्तर चुने हों। अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?

हमने उत्तर कहानी की घटनाओं के आधार पर चुने हैं। बच्चा वास्तव में बीमार नहीं था, उसने होमवर्क न करने के कारण बहाना बनाया था, और बाद में उसे भूखे और अकेले रहना पड़ा जिससे उसे अपनी गलती का एहसास हुआ। इसलिए वही उत्तर सही लगते हैं जो कहानी के भाव और परिणाम से मेल खाते हैं।

मिलकर करें मिलान

साबूदाना

सागू नामक वृक्ष के तने का गूदा, साबूदाना, यह पहले आटे के रूप में होता है और फिर कूटकर दानों के रूप में सुखा लिया जाता है।

वार्ड

किसी विशिष्ट कार्य के लिए घेरकर बनाया हुआ स्थान।

नर्स

वह व्यक्ति जो रोगियों, घायलों या वृद्धों आदि की देखभाल करे।

रजाई

एक प्रकार का जाड़े का ओढ़ना जिसका कपड़ा दोहरा होता है और जिसमें रुई भरी होती है।

थर्मामीटर

शरीर का तापमान (जैसे बुखार) नापने का एक छोटा यंत्र।

काढ़ा

कई तरह की जड़ी-बूटियों और औषधियों को उबालकर उनके रस से बना पेय होता है। इसे सर्दी-जुकाम, खाँसी-बुखार और पाचन से जुड़ी समस्याओं में लाभदायक माना जाता है।

ड्राइक्लीनर

रेशमी, ऊनी, मलमल जैसे नाजुक कपड़ों को पानी, साबुन और डिटर्जेंट के बिना मशीनों से साफ करने वाला व्यक्ति।

ताजमहल

उत्तर प्रदेश के आगरा शहर में स्थित 17वीं सदी में निर्मित एक विश्व-प्रसिद्ध स्मारक जो सफेद संगमरमर से बना है।

अरहर

एक दाल जिसे तुअर भी कहते हैं।

पंक्तियों पर चर्चा

(क) "मैंने सोचा बीमार पड़ने के लिए आज का दिन बिलकुल ठीक रहेगा। चलो बीमार पड़ जाते हैं।"

इस पंक्ति से पता चलता है कि बच्चा जानबूझकर बीमार होने का नाटक कर रहा है। वह होमवर्क न करने की सजा से बचने के लिए बहाना बनाना चाहता है। यह उसकी नादानी और जिम्मेदारी से भागने की सोच को दिखाता है, जो बाद में उसे भारी पड़ती है।

(ख) "देखो! उन्होंने एक बार भी आकर नहीं पूछा कि तू क्या खाएगा? पूछते तो मैं साबूदाने की खीर ही तो माँगता। कोई ताजमहल तो नहीं माँग लेता। लेकिन नहीं! भूखे रहो!! इससे सारे विकार निकल जाएँगे। विकार निकल जाएँ बस। चाहे इस चक्कर में तुम खुद शिकार हो जाओ।"

इस पंक्ति में बच्चे की भूख, निराशा और चिड़चिड़ापन दिखता है। वह भूखा है और चाहता है कि कोई उससे प्यार से पूछे और साबूदाने की खीर दे, पर नानाजी के भूखा रखने के नियम से वह दुखी है। इसमें हास्य और बच्चे की मासूम शिकायत भी झलकती है।

सोच-विचार के लिए

(क) अस्पताल में बच्चे को कौन-कौन सी चीजें अच्छी लगीं और क्यों?

बच्चे को अस्पताल का साफ-सुथरा वार्ड, सफेद चादर और लाल कंबल वाले बिस्तर, सफेद दीवारें, ऊँची छत, हरे परदे वाली बड़ी खिड़कियाँ, चमकता फर्श, खिड़कियों के पास झूमते हरे पेड़, शोर-धूल-मच्छर-मक्खी से मुक्त शांत वातावरण और धीरे-धीरे बात करने की गुनगुन अच्छी लगी। उसे लगा कि वहाँ शांति और आराम है।

(ख) कहानी के अंत में बच्चे को महसूस हुआ कि उसे स्कूल जाना चाहिए था। क्या आपको लगता है कि उसका निर्णय सही था? क्यों?

हाँ, उसका निर्णय सही था। पूरा दिन भूखे, अकेले और ऊब में बिस्तर पर पड़े रहने से उसे समझ आया कि स्कूल में दोस्तों के साथ पढ़ना, खेलना और ठेले पर अमरूद खाना अधिक आनंददायक है। झूठा बहाना बनाने से कष्ट ही मिलता है।

(ग) जब बच्चा बीमार पड़ने का बहाना बनाकर बिस्तर पर लेटा रहा तो उसके मन में कौन-कौन से भाव आ रहे थे?

शुरू में खुशी और चालाकी का भाव कि आज स्कूल नहीं जाना पड़ेगा। फिर ऊब, बेचैनी, पीठ दुखने से तकलीफ, भूख से व्याकुलता, बाहर की गली देखने की इच्छा, खाने की चीजों की लालसा, ईर्ष्या जब मन्नू को आम खाते देखा, गुस्सा, कुढ़न, पछतावा और अंत में रुआँसापन और सबक सीखने का भाव आया।

(घ) कहानी में बच्चे ने सोचा था कि "ठाठ से साफ-सुथरे बिस्तर पर लेटे रहो और साबूदाने की खीर खाते रहो।" आपको क्या लगता है, असल में बीमार हो जाने और इस बच्चे की सोच में कौन-कौन सी समानताएँ और अंतर होंगे?

समानता यह है कि बीमार को आराम और कुछ विशेष खाने को मिलता है। अंतर यह है कि असली बीमारी में शरीर में दर्द, कमजोरी, दवा की कड़वाहट, भूख न लगना और अकेलापन होता है, जबकि बच्चे ने सिर्फ आराम और स्वादिष्ट खीर की कल्पना की थी। असली बीमारी कष्टदायक होती है, ठाठ नहीं।

(ङ) नानीजी और नानाजी ने बच्चे को बीमारी की दवा दी और उसे आराम करने को कहा। बच्चे को खाना नहीं दिया गया। क्या आपको लगता है कि उन्होंने सही किया? आपको ऐसा क्यों लगता है?

उनके समय के अनुसार यह सामान्य उपचार था कि तबीयत ढीली होने पर भूखा रखना और कड़वी पुड़िया व काढ़े जैसी चाय देना विकार निकालने के लिए सही माना जाता था। वे अनजान थे कि बच्चा नाटक कर रहा है, इसलिए उन्होंने चिंता से वही किया जो उन्हें सही लगा। आज के हिसाब से डॉक्टर को दिखाना और हल्का भोजन देना बेहतर होता।

अनुमान और कल्पना से

(क) कहानी के अंत में बच्चा नानाजी और नानीजी को सब कुछ सच-सच बताने का निर्णय कर लेता तो कहानी में आगे क्या होता?

यदि बच्चा सच बताता तो नानाजी-नानीजी पहले थोड़ा डाँटते पर फिर प्यार से समझाते कि झूठ बोलना और होमवर्क से बचना गलत है। उसे तुरंत खाने को मिल जाता, वह बाहर खेल पाता और अगले दिन स्कूल जाने के लिए तैयार हो जाता। उसका मन हल्का हो जाता और घर में हँसी का माहौल बन जाता।

(ख) कहानी में बच्चे की नानीजी के स्थान पर आप हैं। आप सारे नाटक को समझ गए हैं लेकिन चाहते हैं कि बच्चा सारी बात आपको स्वयं बता दे। अब आप क्या करेंगे?

मैं प्यार से उसके पास बैठती, माथा सहलाते हुए कहती कि मुझे पता है तुम उदास हो, भूख लगी है। मैं उसके पसंदीदा खाने जैसे साबूदाने की खीर या पराठे की बात करती और कहती कि सच बताने से डरना नहीं चाहिए। इससे बच्चा भरोसा करके खुद ही सच बता देगा और मैं उसे माफ कर दूँगी।

(ग) कहानी में बच्चे के स्थान पर आप हैं और घर में अकेले हैं। अब आप ऊबने से बचने के लिए क्या-क्या करेंगे?

मैं किताब पढ़ूँगा, चित्र बनाऊँगा, थोड़ी देर पढ़ाई पूरी करूँगा, खिलौनों से खेलूँगा, मधुर संगीत सुनूँगा, खिड़की से बाहर देखूँगा और मन में कहानी बनाऊँगा। बिस्तर पर लगातार लेटे रहने के बजाय हल्की गतिविधि से समय अच्छा कटेगा।

(घ) कहानी के अंत में बच्चे को लगा कि उसे स्कूल जाना चाहिए था। कल्पना कीजिए, अगर वह स्कूल जाता तो उसका दिन कैसा होता? अगले दिन जब वह स्कूल गया होगा तो उसने क्या-क्या किया होगा?

स्कूल जाने पर वह दोस्तों से मिलता, प्रार्थना में शामिल होता, कक्षा में भले ही होमवर्क के लिए डाँट पड़ती पर बाद में रिसेस में अमरूद, कचौड़ी खाता और खेलता। अगले दिन वह समय पर होमवर्क पूरा करके स्कूल गया होगा, सबसे माफी माँगी होगी और मन लगाकर पढ़ा होगा।

(ङ) कहानी में नानाजी और नानीजी ने बच्चे की बीमारी ठीक करने के लिए उसे दवाई दी और खाने के लिए कुछ नहीं दिया। अगर आप नानीजी या नानाजी की जगह होते तो क्या-क्या करते?

मैं पहले थर्मामीटर से बुखार देखता, प्यार से बात करता, डॉक्टर को फोन करता या दिखाने ले जाता, हल्का सुपाच्य भोजन जैसे खिचड़ी या दलिया देता, पानी पिलाता और बच्चे का मन बहलाता। भूखा रखने के बजाय सही देखभाल करता।

कहानी की रचना

(क) इस पाठ को एक बार फिर से पढ़िए और अपने समूह में मिलकर इस पाठ की अन्य विशेषताओं की सूची बनाइए। अपने समूह की सूची को कक्षा में सबके साथ साझा कीजिए।

इस पाठ की विशेषताएँ हैं - चित्रात्मक भाषा से अस्पताल और गली का सजीव वर्णन, बच्चे की मन की बातों को ज्यों-का-त्यों कहना, हास्य और चुलबुलापन, रोजमर्रा के घरेलू दृश्यों का स्वाभाविक चित्रण, खाने-पीने के वर्णन से रुचि जगाना, छोटी-छोटी घटनाओं से बड़ा सबक देना और सरल संवादों से कहानी को रोचक बनाना।

कहानी में से निम्नलिखित के लिए उदाहरण खोजकर लिखिए— बच्चे द्वारा पिछली बातों को याद किया जाना

उदाहरण - नानीजी के साथ अस्पताल जाकर सुधाकर काका को देखना और वहाँ के माहौल को याद करना, या बिस्तर पर लेटे-लेटे साबूदाने की खीर खाने का दृश्य याद करना।

कहानी में से निम्नलिखित के लिए उदाहरण खोजकर लिखिए— हास्य यानी हँसी-मजाक का उपयोग किया जाना

उदाहरण - "क्या ठाठ हैं बीमारों के भी! काश सुधाकर काका की जगह मैं होता!" और "कोई ताजमहल तो नहीं माँग लेता" तथा "सारे विकार निकल जाएँगे, चाहे इस चक्कर में तुम खुद शिकार हो जाओ" जैसे वाक्य।

कहानी में से निम्नलिखित के लिए उदाहरण खोजकर लिखिए— बच्चे द्वारा सोचने के तरीके में बदलाव आना

शुरू में सोचना कि बीमार बनना मजे की बात है, बाद में सोचना कि पूरा दिन पड़े रहना बहुत उबाऊ और दुखद है और स्कूल जाना अधिक अच्छा था।

कहानी में से निम्नलिखित के लिए उदाहरण खोजकर लिखिए— कहानी में किसी का किसी बात से अनजान होना

नानाजी-नानीजी का यह न जानना कि बच्चा वास्तव में बीमार नहीं है बल्कि बहाना बना रहा है।

कहानी में से निम्नलिखित के लिए उदाहरण खोजकर लिखिए— बच्चे द्वारा स्वयं से बातें किया जाना

बिस्तर में पड़े-पड़े मन ही मन सोचना - "क्या मुसीबत है! पड़े रहो! आखिर कब तक कोई पड़ा रह सकता है?" और खाने की चीजों के बारे में खुद से बड़बड़ाना।

समस्या और समाधान

(क) बच्चे के सामने क्या समस्या थी? उसने उस समस्या का क्या समाधान निकाला?

बच्चे की समस्या थी कि उसने होमवर्क नहीं किया था और स्कूल जाने पर सजा मिलने का डर था, साथ ही स्कूल जाने का मन नहीं था। उसने समाधान के रूप में बीमार होने का झूठा बहाना बनाकर रजाई में लेटे रहने का नाटक किया।

(ख) नानीजी-नानाजी के सामने क्या समस्या थी? उन्होंने उस समस्या का क्या समाधान निकाला?

उनके सामने समस्या थी कि बच्चा बीमार होने की शिकायत कर रहा है - सिर दर्द, पेट दर्द और बुखार। उन्होंने थर्मामीटर खोजा, कड़वी पुड़िया और काढ़े जैसी चाय दी और उसे भूखा रखकर आराम करने को कहा।

शब्द से जुड़े शब्द

नीचे दिए गए स्थानों में 'बीमार' से जुड़े शब्द पाठ में से चुनकर लिखिए—

बीमार से जुड़े शब्द हैं - अस्पताल, वार्ड, बुखार, सिर दर्द, पेट दर्द, थर्मामीटर, नर्स, दवा, पुड़िया, काढ़ा, साबूदाने की खीर और आराम। ये सभी शब्द कहानी में बीमारी के प्रसंग में आए हैं।

खोजबीन

(क) कहानी में से वे वाक्य ढूँढ़कर लिखिए जिनसे पता चलता है कि कहानी में सर्दी के मौसम की घटनाएँ बताई गई हैं।

वाक्य - "मैं रजाई में पड़ा-पड़ा" , "मैं रजाई से निकला ही नहीं" , "नानाजी ने रजाई हटाकर मेरा माथा छुआ" और "रजाई फेंककर खड़ा हो गया" - इनसे पता चलता है कि सर्दी का मौसम है तभी रजाई का प्रयोग हो रहा है।

(ख) कहानी में से वे वाक्य ढूँढ़कर लिखिए जिनसे पता चलता है कि बच्चे को बहाना बनाने के परिणाम का आभास हो गया।

वाक्य - "क्या मुसीबत है! पड़े रहो! आखिर कब तक कोई पड़ा रह सकता है? इससे तो स्कूल चला जाता तो ही ठीक रहता" और "इसके बाद स्कूल से छुट्टी मारने के लिए मैंने बीमारी का बहाना कभी नहीं बनाया।"

(ग) कहानी में से वे वाक्य ढूँढ़कर लिखिए जिनसे पता चलता है कि बच्चे को खाना-पीना बहुत प्रिय है।

वाक्य - "गरमागरम खस्ता कचौड़ी... मावे की बर्फी... बेसन की चिक्की... गोलगप्पे" , "और सबसे ऊपर साबूदाने की खीर!" और "कितना मजा आता जब रिसेस में ठेले पर जाकर नमक मिर्च लगे अमरूद खाते कटर-कटर।"

(घ) कहानी में से वे वाक्य ढूँढ़कर लिखिए जिनसे पता चलता है कि बच्चे को स्कूल जाना अच्छा लगता है।

वाक्य - "इससे तो स्कूल चला जाता तो ही ठीक रहता। सजा मिलती तो मिल जाती" और अंत में पछतावा कि स्कूल जाना अधिक रोचक है, तथा रिसेस में दोस्तों के साथ खाने-खेलने की कल्पना करना।

शीर्षक

(क) आपने जो कहानी पढ़ी है, इसका नाम 'नहीं होना बीमार' है। अपने समूह में चर्चा करके लिखिए कि इस कहानी का यह नाम उपयुक्त है या नहीं। अपने उत्तर के कारण भी बताइए।

यह नाम बहुत उपयुक्त है क्योंकि पूरी कहानी यही सिखाती है कि झूठ-मूठ बीमार बनने से कष्ट होता है और वास्तव में बीमार न होना ही अच्छा है। अंत में बच्चा स्वयं कहता है कि वह फिर कभी बीमारी का बहाना नहीं बनाएगा, जो शीर्षक को सार्थक करता है।

(ख) यदि आपको इस कहानी को कोई अन्य नाम देना हो तो क्या नाम देंगे? आपने यह नाम क्यों सोचा, यह भी बताइए।

मैं इसका नाम "बीमारी का बहाना" या "साबूदाने की खीर" रखूँगा। पहला नाम इसलिए कि कहानी झूठी बीमारी के बहाने पर केंद्रित है, दूसरा इसलिए कि साबूदाने की खीर ही बच्चे को बीमार बनने के लिए ललचाती है और कहानी में कई बार आती है।

अभिनय

1. "बुखार आ गया।" मैंने कराहते हुए कहा।

इसे धीमी, कमजोर आवाज में, रजाई में लिपटे हुए, कराहते हुए अभिनय के साथ बोलना है ताकि लगे कि वास्तव में बुखार है।

2. "आपको पता नहीं चल रहा। थर्मामीटर लगाकर देखिए।" मैंने कहा।

इसे चालाकी भरे अंदाज में, थोड़ा जोर देकर कहना है जैसे बच्चा खुद को बीमार साबित करना चाहता हो।

3. "मेरे सिर में दर्द हो रहा है। पेट भी दुख रहा है और मुझे बुखार भी है।"

इसे उदास और धीमी आवाज में, सिर और पेट पकड़ते हुए, नानीजी से शिकायत के स्वर में बोलना है।

4. नानाजी आए। बोले, "अब कैसा है सिरदर्द?"

इसे चिंतित और प्यार भरे बुजुर्ग के स्वर में, पास आकर माथा छूते हुए पूछने के अंदाज में बोलना है।

5. फिर नानाजी बोले, "आज इसे कुछ खाने को मत देना। आराम करने दो। शाम को देखेंगे।"

इसे गंभीर और देखभाल भरे आदेश के स्वर में, नानीजी की ओर देखकर कहना है जैसे डॉक्टर की सलाह दे रहे हों।

चेहरों पर मुस्कान, मुँह में पानी

(क) इस कहानी में अनेक रोचक घटनाएँ हैं जिन्हें पढ़कर चेहरे पर मुस्कान आ जाती है। इस कहानी में किन बातों को पढ़कर आपके चेहरे पर भी मुस्कान आ गई थी? उन्हें रेखांकित कीजिए।

मुस्कान लाने वाली बातें हैं - "क्या ठाठ हैं बीमारों के भी! काश सुधाकर काका की जगह मैं होता!", "चलो बीमार पड़ जाते हैं" , मन्नू का पूरी गुठली मुँह में ठूँसकर आम चूसना, और बच्चे का रजाई में पड़े-पड़े घर की गतिविधियों का अनुमान लगाना।

(ख) इस कहानी में किन वाक्यों को पढ़कर आपके मुँह में पानी आ गया था? उन्हें रेखांकित कीजिए।

मुँह में पानी लाने वाले वाक्य हैं - साबूदाने की खीर का वर्णन, "गरमागरम खस्ता कचौड़ी, मावे की बर्फी, बेसन की चिक्की, गोलगप्पे", "अरहर की दाल में हींग-जीरे का बघार, हरा धनिया, देसी घी और नींबू", "तली हुई हरी मिर्च" और "नमक मिर्च लगे अमरूद"।

लेखन के अनोखे तरीके

1. ऐसा लगा मानो हमें देखकर सुधाकर काका खुश हो गए। — कहानी में यह बात कैसे लिखी गई है?

कहानी में लिखा है - "हमें देखकर सुधाकर काका जैसे खुश हो गए।"

2. खिड़कियाँ बहुत बड़ी थीं और उनके बाहर हरे पेड़ हवा से हिल रहे थे। — कहानी में यह बात कैसे लिखी गई है?

कहानी में लिखा है - "बड़ी-बड़ी खिड़कियों के पास हरे-हरे पेड़ झूम रहे थे।"

3. वहाँ केवल लोगों के फुसफुसाने की आवाजें आ रही थीं। — कहानी में यह बात कैसे लिखी गई है?

कहानी में लिखा है - "सिर्फ लोगों के धीरे-धीरे बातचीत करने की धीमी-धीमी गुनगुन।"

4. फुसफुसाने की आवाजों के सिवा वहाँ कोई आवाज नहीं थी। — कहानी में यह बात कैसे लिखी गई है?

कहानी में लिखा है - "बाकी एकदम शांति।"

5. बीमार लोगों के बहुत मजे होते हैं। — कहानी में यह बात कैसे लिखी गई है?

कहानी में लिखा है - "क्या ठाठ हैं बीमारों के भी!"

6. मैं झूठमूठ बीमार पड़ जाता हूँ। — कहानी में यह बात कैसे लिखी गई है?

कहानी में लिखा है - "चलो बीमार पड़ जाते हैं।"

विराम चिह्न

अपने समूह के साथ मिलकर नीचे दिए गए विराम चिह्न को कहानी में ढूँढ़िए। ध्यानपूर्वक देखकर समझिए कि इनका प्रयोग वाक्यों में कहाँ-कहाँ किया जाता है। आपने जो पता किया, उसे नीचे लिखिए— पूर्ण विराम (।) अल्प विराम (,) प्रश्नवाचक चिह्न (?) विस्मयादिबोधक चिह्न (!) उद्धरण चिह्न (" ")

पूर्ण विराम (।) वाक्य के अंत में लगता है जैसे "वे अस्पताल में भर्ती थे।" अल्प विराम (,) वाक्य में थोड़ा रुकने के लिए जैसे "देखें! नानाजी ने रजाई हटाकर मेरा माथा छुआ, पेट देखा और नब्ज देखने लगे।" प्रश्नवाचक (?) प्रश्न पूछने पर जैसे "क्या हो गया?" विस्मयादिबोधक (!) आश्चर्य या भाव पर जैसे "देखें!" और उद्धरण (" ") किसी के कहे वाक्य को दिखाने के लिए जैसे "मैं आज बीमार हूँ।"

कैसी होगी गली

"मुझे बड़ी तेज इच्छा हुई कि इसी समय बाहर निकलकर दिन की रोशनी में अपनी गली की चहल-पहल देखूँ" आपने कहानी में बच्चे के घर के साथ वाली गली के बारे में बहुत-सी बातें पढ़ी हैं। उन बातों और अपनी कल्पना के आधार पर उस गली का एक चित्र बनाइए।

गली के चित्र में एक संकरी पर साफ गली दिखेगी जिसमें चंदू भाई की ड्राइक्लीन की दुकान, तेजराम की दुकान पर बैठे ग्राहक, महेश घी सेंटर पर आँच पर चढ़ा मलाई का भगोना, टेलीफोन के तारों पर बैठी चिड़ियाँ, दिन की धूप, आते-जाते लोग और साइकिलें होंगी। चित्र में चहल-पहल और रोजमर्रा की जिंदगी का रंग भरना चाहिए।

आपकी बात

(क) बच्चे ने अस्पताल के वातावरण का विस्तार से सुंदर वर्णन किया है। इसी प्रकार आप अपनी कक्षा का वर्णन कीजिए।

मेरी कक्षा बड़ी और हवादार है। सफेद दीवारों पर चार्ट और नक्शे लगे हैं। कतार में लकड़ी की बेंचें, सामने श्यामपट, शिक्षक की मेज, खिड़कियों से आती रोशनी और बाहर हरे पेड़ दिखते हैं। बच्चे अनुशासित होकर पढ़ते हैं और कक्षा में शांति व उत्साह का माहौल रहता है।

(ख) कहानी में बच्चे को घर में अकेले दिन भर लेटे रहना पड़ा था। क्या आप कभी कहीं अकेले रहे हैं? उस समय आपको कैसा लग रहा था? आपने क्या-क्या किया था?

हाँ, एक बार माता-पिता बाजार गए थे तो मैं दो घंटे घर में अकेला था। शुरू में डर और ऊब लगी, फिर मैंने कहानी की किताब पढ़ी, चित्र बनाए और खिड़की से बाहर देखा। समय धीरे-धीरे कटा और मैंने समझा कि अकेले रहना आसान नहीं है।

(ग) कहानी में आम खाने वाले मन्नू को देखकर बच्चे को ईर्ष्या हुई थी। क्या आपको कभी किसी से या किसी को आपसे ईर्ष्या हुई है? आपने तब क्या किया था ताकि यह भावना दूर हो जाए?

हाँ, कभी मित्र को नया खिलौना मिला तो मुझे ईर्ष्या हुई। मैंने अपने मन को समझाया कि हर किसी के पास अलग चीज़ें होती हैं और मुझे अपनी चीज़ों से खुश रहना चाहिए। मैंने उससे मिलकर खेला तो ईर्ष्या दूर हो गई।

(घ) कहानी में नानाजी-नानीजी बच्चे का पूरा ध्यान रखने का प्रयास करते हैं। आपके घर और विद्यालय में आपका ध्यान कौन-कौन रखते हैं? कैसे?

घर में माता-पिता, दादी-दादा और बड़े भाई-बहन मेरा ध्यान रखते हैं - खाना, पढ़ाई, स्वास्थ्य का ख्याल रखकर। विद्यालय में शिक्षक और प्रधानाचार्य पढ़ाई, अनुशासन और खेल के द्वारा ध्यान रखते हैं।

(ङ) आप अपने परिजनों और मित्रों का ध्यान कैसे रखते हैं? क्या-क्या करते हैं या क्या-क्या नहीं करते हैं ताकि उन्हें कम-से-कम परेशानी हो?

मैं बड़ों की बात मानता हूँ, समय पर होमवर्क करता हूँ, घर के छोटे कामों में मदद करता हूँ, झूठ नहीं बोलता, मित्रों से मिल-जुलकर रहता हूँ, शोर नहीं करता और बीमार होने पर उन्हें परेशान न करने के लिए स्वास्थ्य का ध्यान रखता हूँ।

बहाने

(क) कहानी में बच्चे ने बीमारी का बहाना बनाया ताकि उसे स्कूल न जाना पड़े। क्या आपने कभी किसी कारण से बहाना बनाया है? यदि हाँ, तो उसके बारे में बताइए। उस समय आपके मन में कौन-कौन से भाव आ-जा रहे थे?

हाँ, एक बार मैंने खेलने के लिए होमवर्क न करने का बहाना बनाया कि पेट दुख रहा है। मन में डर था कि सच पकड़ा जाएगा, साथ ही अपराधबोध और बाद में पछतावा हुआ कि सच बोलना ही बेहतर था।

(ख) आमतौर पर बनाए जाने वाले बहानों की एक सूची बनाइए।

आमतौर पर बहाने - पेट दर्द, सिर दर्द, बुखार, होमवर्क भूल जाना, बस छूट जाना, बिजली न होना, पेन खो जाना, नींद न खुलना, मेहमान आ जाना आदि।

(ग) बहाने क्यों बनाने पड़ते हैं? बहाने न बनाने पड़ें, इसके लिए हम क्या-क्या कर सकते हैं?

बहाने जिम्मेदारी से बचने, डर या आलस के कारण बनाए जाते हैं। इससे बचने के लिए समय पर काम पूरा करना, सच बोलने की आदत डालना, माता-पिता और शिक्षकों से खुलकर बात करना और गलती स्वीकार करना सीखना चाहिए।

अनुमान

"मैं रजाई में पड़ा-पड़ा घर में चल रही गतिविधियों का अनुमान लगाता रहा।" कहानी में बच्चे ने अनेक प्रकार के अनुमान लगाए हैं। क्या आपने कभी किसी अनदेखे व्यक्ति/वस्तु/पशु-पक्षी/स्थान आदि के विषय में अनुमान लगाए हैं? किसके बारे में? क्या? कब? विस्तार से बताइए।

हाँ, मैंने बरसात में छत पर थप-थप की आवाज सुनकर अनुमान लगाया कि कबूतर पानी पी रहे हैं। बाद में देखा तो सच था। इसी तरह दूर रहने वाले मामा के बारे में सुनी बातों से अनुमान लगाया कि वे सख्त हैं, पर मिलने पर वे बहुत हँसमुख निकले। अनुमान कल्पना और अनुभव से बनता है।

घर का सामान

"बहुत ढूँढ़ा गया पर थर्मामीटर मिला ही नहीं। शायद कोई माँगकर ले गया था।" कहानी में बच्चे के घर पर थर्मामीटर खोजने पर वह मिल नहीं पाता। आमतौर पर हमारे घरों में कोई न कोई ऐसी वस्तु होती है जिसे खोजने पर भी वह नहीं मिलती, जिसे कोई माँगकर ले जाता है या हम जिसे किसी से माँगकर ले आते हैं। अपने घर को ध्यान में रखते हुए ऐसी वस्तुओं की सूची बनाइए — जो खोजने पर भी नहीं मिलती हैं | जो कोई माँगकर ले जाते हैं | जो आप किसी से माँगकर लाते हैं

खोजने पर भी नहीं मिलती - कैंची, टेप, चाबी, रिमोट, पेन। माँगकर ले जाते हैं - थर्मामीटर, हथौड़ी, सीढ़ी, किताबें, छाता। माँगकर लाते हैं - पड़ोसी से चीनी, किताब, खेल का सामान, औजार। ये चीजें अक्सर जरूरत पर इधर-उधर हो जाती हैं।

खान-पान और आप

(क) कहानी में सुधाकर काका को बीमार होने पर साबूदाने की खीर दी गई थी। आपके घर में किसी के बीमार होने पर उसे क्या-क्या खिलाया जाता है?

हमारे घर में बीमार होने पर हल्का और सुपाच्य भोजन जैसे खिचड़ी, दलिया, साबूदाने की खीर, सूप, फल और उबली सब्जियाँ दी जाती हैं। तला-भुना और मसालेदार भोजन नहीं दिया जाता।

(ख) कहानी में बच्चे को बहुत-सी चीजें खाने का मन है। आपका क्या-क्या खाने का बहुत मन करता है?

मुझे गोलगप्पे, समोसे, बिरयानी, आइसक्रीम और घर की बनी पूड़ी-सब्जी बहुत पसंद है। कभी-कभी पिज्जा और चॉकलेट खाने का भी मन करता है।

(ग) कहानी में बच्चा सोचता है कि साबूदाने की खीर सिर्फ बीमारी या उपवास में क्यों मिलती है। आपके घर में ऐसा क्या-क्या है, जो केवल विशेष अवसरों या त्योहारों पर ही बनता है?

हमारे घर में गुझिया होली-दीवाली पर, पूरनपोली और विशेष मिठाइयाँ त्योहारों पर, और बिरयानी मेहमान आने पर ही बनती है। रोजमर्रा में साधारण भोजन ही बनता है।

(घ) कहानी में बच्चा सोचता है कि अगर वह स्कूल जाता तो उसे ठेले पर नमक-मिर्च वाले अमरूद खाने को मिलते। आप अपने विद्यालय में क्या-क्या खाते-पीते हैं? विद्यालय में आपका रुचिकर भोजन क्या है?

विद्यालय में हम टिफिन में पराठा, पूड़ी, इडली, फल और कभी कैंटीन से समोसा, बिस्कुट लेते हैं। मुझे टिफिन में मिलने वाली राजमा-चावल और रिसेस में मिलने वाला नमक-मिर्च वाला अमरूद बहुत पसंद है।

(ङ) इस कहानी में भोजन से जुड़ी बच्चे की कई रोचक बातें बताई गई हैं। आपके बचपन की भोजन से जुड़ी कोई विशेष याद क्या है, जिसे आप अब भी याद करते हैं?

बचपन में दादी के हाथ की गरम-गरम खीर और मेले में खाए गए गोलगप्पे मुझे आज भी याद हैं। एक बार पूरे परिवार के साथ आम की पार्टी में खूब आम खाए थे, वह याद ताजा है।

(च) कहानी में बच्चा भोजन की सुगंध से रजाई फेंककर रसोई में झाँकने लगा। क्या आपके साथ कभी ऐसा हुआ है कि घर में किसी विशेष खाने की सुगंध से आप भी रसोई में जाकर तुरंत देखना चाहते हैं कि क्या पक रहा है? आपको किस-किस खाने की सुगंध सबसे अधिक पसंद है?

हाँ, जब घर में बिरयानी या हलवे की सुगंध आती है तो मैं तुरंत रसोई में जाकर देखता हूँ। मुझे घी में तले पराठे, बासमती चावल और गरम समोसे की सुगंध सबसे अधिक पसंद है।

आज की पहेली

1. रोटी जैसा होता है ये, पर आलू से भरा-भरा घी-तेल साथी हैं इसके, दही-चटनी से हरा-भरा

आलू का पराठा

2. दाल-चावल का मेल है यह तो, भारत भर में तुम इसे पाओ, दक्षिण में ये खूब है बनता, चटनी-सांभर संग-संग खाओ, गोल-तिकोना इसका आकार, गरम-गरम तुम इसे बनाओ, कौन-सा व्यंजन होता है यह, बोलो बोलो नाम बताओ।

डोसा

3. नाश्ते का यह बड़ा है खास, महाराष्ट्र में इसका वास, मिर्च-मसाले से भरपूर, संग बटाटा भी मशहूर, चटपटी चटनी लगी किसे? बूझो नाम तो खाएँ इसे!

वड़ा पाव

4. बेसन से बने चौकोर या गोल, गुजरात में बड़ा है बोल। खाने में नर्म, पानी भरे, धनिया मिर्च संग सजे।

खमण ढोकला

5. गोल-गोल पानी से भरके, चटनी सोंठ संग इसे खाओ उत्तर-दक्षिण पूरब-पश्चिम, गली-मुहल्लों में भी पाओ। खट्टी-मीठी, तीखी हाय, खाना तो इसे हर कोई चाहे!

गोलगप्पे / पानी पूरी

6. हरे साग संग मुझको पाओ, मक्खन के संग मुझको खाओ। आटा मेरा हल्का पीला, स्वाद मेरा है बड़ा रंगीला।

मक्की की रोटी

7. आग में पकती हूँ, सोंधा-सा स्वाद, साथ में खाओ चूरमा, बन जाए फिर बात, गरम दाल से मुझको प्यार, राजस्थान का मैं उपहार।

बाटी

8. गोल-गोल और श्वेत रंग का रस से भरा हुआ हूँ खूब। मीठी दुनिया का महाराजा चाशनी मीठी डूब-डूब।

रसगुल्ला