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तीन बुद्धिमान — Class 7 Hindi

मल्हार · Chapter 2Rising

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Chapter summary

यह एक प्रेरक लोककथा है। एक निर्धन व्यक्ति के तीन बेटे थे। पिता उन्हें यह सीख देता है कि रुपये-पैसे के स्थान पर वे पैनी दृष्टि और तीव्र बुद्धि रूपी धन संचित करें, ताकि हर वस्तु और स्थिति को ध्यान से समझ सकें। पिता के देहांत के बाद तीनों भाई आजीविका की खोज में यात्रा पर निकलते हैं। एक नगर के पास रास्ते में वे अपनी सूक्ष्म अवलोकन-शक्ति से बिना ऊँट देखे ही बता देते हैं कि वहाँ से एक बड़ा, एक आँख से न देख पाने वाला ऊँट गुज़रा है जिस पर एक स्त्री और बच्चा सवार थे। ऊँट का स्वामी (घुड़सवार) उन्हें चोर समझकर राजा के पास ले जाता है। राजा उनकी परीक्षा लेने के लिए एक पेटी मँगवाता है और वे बिना देखे बता देते हैं कि उसमें एक छोटी, गोल, कच्चा अनार है। पेटी खुलने पर बात सच निकलती है। भाई समझाते हैं कि उन्होंने धूल पर पैरों के निशान, चरी हुई घास, बैठने के चिह्न और ध्वनि-गंध जैसे संकेतों से अनुमान लगाया था। राजा उनकी पैनी दृष्टि और तीव्र बुद्धि से प्रभावित होकर उन्हें अपने दरबार में रख लेता है। कथा का संदेश है कि सूक्ष्म अवलोकन और तार्किक सोच ही सबसे बड़ा धन है।

The story in steps

  1. एक निर्धन पिता अपने तीन बेटों को पैनी दृष्टि और तीव्र बुद्धि को सच्चा धन मानने की सीख देता है।
  2. पिता के मरने के बाद तीनों भाई काम की तलाश में यात्रा पर निकलते हैं और लंबे रास्ते के बाद नगर पहुँचते हैं।
  3. रास्ते में वे बिना ऊँट को देखे उसके आकार, एक आँख, और उस पर महिला-बच्चे के होने का अनुमान लगाते हैं।
  4. ऊँट का स्वामी उन पर चोरी का शक करता है और उन्हें राजा के सामने ले जाता है।
  5. राजा उनकी जाँच के लिए पेटी मँगवाता है, और भाई सही बताते हैं कि उसमें कच्चा अनार है।
  6. भाई अपने तर्क समझाते हैं, राजा उनकी बुद्धिमानी मानता है और उन्हें दरबार में रख लेता है।
पिता की सीखतीन भाइयों की यात्राखोए ऊँट का रहस्यराजा की परीक्षाअवलोकन और तर्क

Key ideas & terms

पैनी दृष्टि
हर वस्तु और घटना को बारीकी से, ध्यानपूर्वक देखने की क्षमता; इसी को पिता ने धन कहा है।
तीव्र बुद्धि
संकेतों से तर्कपूर्वक सही निष्कर्ष निकालने की तेज़ सोच-शक्ति।
लोककथा
पीढ़ी-दर-पीढ़ी मौखिक रूप से कही-सुनी जाने वाली कहानी, जो प्रायः कोई सीख देती है।
अवलोकन
किसी वस्तु, घटना या परिवेश को ध्यान से देखना-परखना, जिससे भाई ऊँट के बारे में जान गए।
अनुमान
उपलब्ध संकेतों के आधार पर किसी अनदेखी बात का निष्कर्ष निकालना।
ज्ञानेंद्रियाँ
आँख, कान, नाक, जीभ और त्वचा — पाँच इंद्रियाँ जिनसे हम परिवेश का ज्ञान प्राप्त करते हैं।

शब्दार्थ · Word meanings

निर्धन
गरीब, जिसके पास धन न हो
संचित
जमा किया हुआ
पैनी दृष्टि
बहुत ध्यान से देखने की क्षमता
तीव्र बुद्धि
बहुत तेज समझ
प्राय:
अक्सर
सनसान-वीरान
बिलकुल सूना
शक
संदेह
चितित
परेशान, चिंतित
आश्चर्यचकित
बहुत हैरान
असाधारण
बहुत विशेष

Extra questions & answers

पिता ने अपने बेटों को कौन-सा "धन" संचित करने को कहा?

पिता ने कहा कि रुपये-पैसे के बजाय वे पैनी दृष्टि और तीव्र बुद्धि रूपी धन संचित करें ताकि उन्हें किसी प्रकार की कमी न रहे।

तीनों भाइयों ने बिना ऊँट देखे उसके बारे में कैसे बता दिया?

धूल पर पैरों के निशान, एक ओर की चरी हुई घास, बैठने के चिह्न तथा स्त्री व बच्चे के पदचिह्नों जैसे संकेतों के आधार पर अनुमान लगाकर।

घुड़सवार ने भाइयों पर तुरंत संदेह क्यों किया?

क्योंकि बिना बताए ही भाइयों ने उसके खोए ऊँट के बारे में इतना कुछ ठीक-ठीक बता दिया, जिससे उसे लगा कि उन्होंने ही ऊँट चुराया है।

राजा ने भाइयों की बुद्धिमत्ता पर विश्वास क्यों किया?

क्योंकि भाइयों ने हर बात को तर्क के साथ समझाया और बिना देखे पेटी में रखे कच्चे अनार की भी सही पहचान कर दी।

राजा ने भाइयों की परीक्षा किस प्रकार ली?

राजा ने एक बड़ी पेटी मँगवाई और पूछा कि उसमें क्या है; भाइयों ने ध्वनि और गंध के संकेतों से बता दिया कि उसमें एक छोटा, गोल, कच्चा अनार है।

राजा के निर्णय के पीछे कौन-सा मूल्य छिपा है?

कि अच्छी तरह जाँच किए बिना किसी को दोषी नहीं ठहराना चाहिए।

पिता ने "दूसरे प्रकार का धन" संचित करने की सलाह क्यों दी?

क्योंकि उनके पास भौतिक संपत्ति नहीं थी; वे जानते थे कि बुद्धि और विवेक का धन कभी समाप्त नहीं होता और हर परिस्थिति में काम आता है।

भाइयों ने अपने ऊपर आरोप लगने पर कैसा व्यवहार किया?

उन्होंने क्रोध या घबराहट के बिना शांति और संयम से तर्कपूर्ण उत्तर दिए और निरंतर सच्चाई का साथ दिया।

इस लोककथा में सबसे अधिक महत्व किसे दिया गया है?

सूक्ष्म अवलोकन और तार्किक सोच को, जो भाइयों की सबसे बड़ी शक्ति और उनका असली धन है।

इस लोककथा से हमें क्या सीख मिलती है?

कि अपनी ज्ञानेंद्रियों और बुद्धि का पूरा उपयोग करके बारीकी से निरीक्षण करना चाहिए, और किसी पर बिना जाँच के दोष नहीं मढ़ना चाहिए।

मेरी समझ से

(क) लोककथा के आधार पर नीचे दिए गए प्रश्नों का सटीक उत्तर कौन सा है? उसके सामने तारा (★) बनाइए। कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं। (1) लोककथा में पिता ने अपने बेटों से ‘धन संचय करने’ को कहा। उनकी इस बात का क्या अर्थ हो सकता है? • खेती-बारी करना और धन इकट्ठा करना • पैनी दृष्टि और तीव्र बुद्धि का विकास करना • ऊँट का व्यापार करना • गाँव छोड़कर किसी नगर में जाकर बसना

सही उत्तर — पैनी दृष्टि और तीव्र बुद्धि का विकास करना। पिता के पास रुपया-पैसा, सोना-चाँदी नहीं था इसलिए उन्होंने बेटों को असली धन के रूप में पैनी दृष्टि और तीव्र बुद्धि इकट्ठा करने को कहा, ताकि वे हर वस्तु और स्थिति को ठीक से देख-समझ सकें।

(क) लोककथा के आधार पर नीचे दिए गए प्रश्नों का सटीक उत्तर कौन सा है? उसके सामने तारा (★) बनाइए। (2) तीनों भाइयों ने अपने ज्ञान और बुद्धि का उपयोग करके ऊँट के बारे में बहुत-कुछ बता दिया। इससे क्या निष्कर्ष निकाला जा सकता है? • बुद्धि का प्रयोग करके ऊँट के बारे में सब-कुछ बताया जा सकता है। • समस्या को सुलझाने के लिए ध्यान से निरीक्षण करना महत्वपूर्ण है। • किसी व्यक्ति का ज्ञान, बुद्धि और धन ही सबसे बड़ी ताकत है। • ऊँट के बारे में जानने के लिए दूसरों पर भरोसा करना चाहिए।

सही निष्कर्ष — समस्या को सुलझाने के लिए ध्यान से निरीक्षण करना महत्वपूर्ण है। भाइयों ने धूल पर पैरों के निशान, घास का खाया जाना और रेत पर जूतों व छोटे पैरों के निशान ध्यान से देखे और बुद्धि से सोच कर सही अनुमान लगाया।

(क) लोककथा के आधार पर नीचे दिए गए प्रश्नों का सटीक उत्तर कौन सा है? उसके सामने तारा (★) बनाइए। (3) राजा ने भाइयों की बुद्धिमत्ता पर विश्वास क्यों किया? • भाइयों ने अपनी बात को तर्क के साथ समझाया। • राजा को ऊँट के स्वामी की बातों पर संदेह था। • राजा ने स्वयं ऊँट और पेटी की जाँच कर ली थी। • भाइयों ने राजा को अपनी बात में उलझा लिया था।

सही उत्तर — भाइयों ने अपनी बात को तर्क के साथ समझाया। उन्होंने बताया कि धूल पर बड़े पैरों के निशान, दायीं ओर की घास का चरा होना, ऊँट के बैठने के निशान और पास में महिला व बच्चे के पैरों के निशान देखकर अनुमान लगाया। पेटी वाले परीक्षण में भी उनका तर्क सही निकला, इसलिए राजा को विश्वास हो गया।

(क) लोककथा के आधार पर नीचे दिए गए प्रश्नों का सटीक उत्तर कौन सा है? उसके सामने तारा (★) बनाइए। (4) लोककथा के पात्रों और घटनाओं के आधार पर, राजा के निर्णय के पीछे कौन-सा मूल्य छिपा है? • दोषी को कड़ा से कड़ा दंड देना हर समस्या का सबसे बड़ा समाधान है। • अच्छी तरह जाँच किए बिना किसी को दोषी नहीं ठहराना चाहिए। • राजा की प्रत्येक बात और निर्णय को सदा सही माना जाना चाहिए। • ऊँट की चोरी के निर्णय के लिए सेवक की बुद्धि का उपयोग करना चाहिए।

सही मूल्य — अच्छी तरह जाँच किए बिना किसी को दोषी नहीं ठहराना चाहिए। राजा ने पहले आरोप सुना, फिर बिना देखे पेटी में क्या है यह पूछकर भाइयों की बुद्धि की परीक्षा ली और तभी निर्दोष माना।

(ख) हो सकता है कि आपके समूह के साथियों ने भिन्न-भिन्न उत्तर चुने हों। अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने।

हमने अपने उत्तर तर्क और कहानी के प्रमाण पर चुने। पिता का धन वाला उपदेश पैनी दृष्टि और बुद्धि से जुड़ा था, भाइयों का अनुमान केवल निरीक्षण से आया था, राजा ने तर्क सुनकर और प्रत्यक्ष जाँच से विश्वास किया और निष्पक्ष न्याय का मूल्य अपनाया। समूह में चर्चा करने से अलग-अलग दृष्टिकोण पता चलते हैं और सही तर्क चुनने में मदद मिलती है।

पंक्तियों पर चर्चा

(क) “रुपये-पैसे के स्थान पर तुम्हारे पास पैनी दृष्टि होगी और सोने-चाँदी के स्थान पर तीव्र बुद्धि होगी। ऐसा धन संचित कर लेने पर तुम्हें कभी किसी प्रकार की कमी न रहेगी और तुम दूसरों की तुलना में उन्नीस नहीं रहोगे।”

इस पंक्ति का अर्थ है कि रुपया-पैसा और सोना-चाँदी से भी बड़ा धन है — तेज आँखों से देखना और बुद्धि से सोचना। जिसके पास यह धन है वह हर कठिनाई का हल निकाल लेता है, उसे किसी चीज़ की कमी नहीं रहती और वह दूसरों से कम नहीं रहता। पिता यही सिखाना चाहते थे कि ज्ञान ही सच्चा धन है।

(ख) “हर वस्तु और स्थिति को पूर्णतः समझने और जानने का प्रयास करो। कुछ भी तुम्हारी दृष्टि से न बच पाए।”

इसका अर्थ है कि आसपास की हर चीज़ को ध्यान से देखो, समझो और उसके बारे में सोचो। कोई भी छोटी-बड़ी बात को लापरवाही से मत छोड़ो। बारीक निरीक्षण करने से ही सच्चा ज्ञान मिलता है, जैसे भाइयों ने रेत और घास के छोटे निशानों को भी देखा।

(ग) “हमने अपने परिवेश को पैनी दृष्टि से देखने और बुद्धि से सोचने के प्रयास में बहुत समय लगाया है।”

भाइयों ने बताया कि बचपन से ही उन्होंने अपने आसपास की दुनिया को ध्यान से देखने और सोच-समझकर समझने की आदत डाली है। लंबे अभ्यास से ही उनकी आँखें पैनी और बुद्धि तीव्र हुई, जिससे बिना ऊँट देखे भी वे उसके बारे में बता सके।

मिलकर करें मिलान

1. कुछ समय पश्चात पिता चल बसे।

2. थोड़े समय के बाद पिता का देहांत हो गया।

2. हम कहीं भी क्यों न हों, भूखे नहीं मरेंगे।

5. हम चाहे जहाँ भी हों, हमें खाने के लिए कुछ न कुछ मिल ही जाएगा।

3. घुड़सवार ने तीनों भाइयों को शंका की दृष्टि से देखा।

1. घोड़े पर सवार व्यक्ति ने तीनों भाइयों को अविश्वास से देखा।

4. बचपन से ही हमें ऐसी आदत पड़ गई है कि हम कुछ भी अपनी दृष्टि से नहीं चूकने देते।

4. बचपन से ही हमें आदत हो गई है कि हम हर छोटी-बड़ी वस्तु पर ध्यान अवश्य देते हैं।

5. लोगों के आश्चर्य का कोई ठिकाना न था।

3. लोग इतने अचंभित थे कि उनका आश्चर्य व्यक्त करना कठिन था।

सोच-विचार के लिए

(क) तीनों भाइयों ने बिना ऊँट को देखे उसके विषय में कैसे बता दिया था?

बड़े भाई ने धूल पर बड़े ऊँट के पैरों के निशान देखे और घुड़सवार को कुछ खोजते देख समझा कि ऊँट खो गया है। मझले भाई ने सड़क के दायीं ओर की घास चरी हुई और बायीं ओर की ज्यों की त्यों देखकर अनुमान लगाया कि ऊँट एक आँख से नहीं देख पाता। छोटे भाई ने ऊँट के बैठने के निशान के पास महिला के जूतों और छोटे बच्चे के पैरों के निशान देखकर बताया कि उस पर महिला और बच्चा सवार थे।

(ख) आपके अनुसार इस लोककथा में सबसे अधिक महत्व किस बात को दिया गया है— तार्किक सोच, अवलोकन या सत्यवादिता? लोककथा के आधार पर समझाइए।

इस लोककथा में अवलोकन और तार्किक सोच दोनों को सबसे अधिक महत्व दिया गया है, सत्यवादिता भी जुड़ी है। भाइयों ने पहले ध्यान से देखा (अवलोकन) फिर तर्क से जोड़ा (तार्किक सोच) और सदा सच बोला। बिना देखे भी सही बताना केवल बारीक निरीक्षण और तर्क से ही संभव हुआ, इसलिए ये दोनों मुख्य मूल्य हैं।

(ग) लोककथा में राजा ने पहले भाइयों पर संदेह किया लेकिन बाद में उन्हें निर्दोष माना। राजा की सोच क्यों बदल गई?

पहले राजा ने घुड़सवार की बात सुनकर और भाइयों द्वारा बिना बताए ऊँट का सही वर्णन सुनकर सोचा कि वे चोर होंगे। फिर उसने मंत्री द्वारा लाई गई बंद पेटी में क्या है यह पूछकर उनकी परीक्षा ली। भाइयों ने वजन, लुढ़कने की आवाज, बगीचे की ओर से लाना और मौसम देखकर सही बताया कि पेटी में कच्चा अनार है। प्रत्यक्ष प्रमाण और तर्क सुनकर राजा का संदेह दूर हो गया और उसने उन्हें निर्दोष और बुद्धिमान माना।

(घ) ऊँट के स्वामी ने भाइयों पर तुरंत संदेह क्यों किया? आपके विचार से उसे क्या करना चाहिए था जिससे उसे अपना ऊँट मिल जाता?

स्वामी ने इसलिए तुरंत संदेह किया क्योंकि भाइयों ने बिना कुछ बताए ऊँट की सारी सही पहचान बता दी, जो आमतौर पर चोर ही जानता है, और वह घबराया हुआ था। उसे शांत रहकर भाइयों के बताए रास्ते पर जाना चाहिए था, राजा के पास जाकर निष्पक्ष जाँच माँगनी चाहिए थी और भाइयों के तर्क को सुनना चाहिए था।

(ङ) पिता ने बेटों को “दूसरे प्रकार का धन” संचित करने की सलाह क्यों दी? इससे पिता के बारे में क्या-क्या पता चलता है?

पिता के पास धन-संपत्ति नहीं थी, इसलिए उन्होंने बेटों को पैनी दृष्टि और तीव्र बुद्धि रूपी धन इकट्ठा करने को कहा जो कभी खत्म नहीं होता। इससे पता चलता है कि पिता दूरदर्शी, अनुभवी, व्यावहारिक और अपने बच्चों का सच्चा हितैषी था, जो भौतिक धन से ज्यादा ज्ञान को महत्व देता था।

(च) राजा ने भाइयों की परीक्षा लेने के लिए पेटी का उपयोग किया। इस परीक्षा से राजा के व्यक्तित्व और निर्णय शैली के बारे में क्या-क्या निष्कर्ष निकाला जा सकता है?

राजा बुद्धिमान, निष्पक्ष और जाँच-परख कर न्याय करने वाला था। वह बिना प्रमाण के दंड नहीं देना चाहता था, इसलिए उसने चालाकी से गुप्त परीक्षा ली। वह धीरज, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और तर्क को सम्मान देने वाला शासक था।

(छ) आप इस लोककथा के भाइयों की किस विशेषता को अपनाना चाहेंगे और क्यों?

मैं भाइयों की पैनी दृष्टि, शांत स्वभाव और सत्यवादिता अपनाना चाहूँगा। वे झूठे आरोप पर भी गुस्सा नहीं हुए, शांति से तर्क दिया और सच पर टिके रहे। यह विशेषता पढ़ाई, रोज़मर्रा की समस्याएँ सुलझाने और अच्छे संबंध बनाने में बहुत मदद करती है।

अनुमान और कल्पना से

(क) यदि राजा ने बिना जाँच के भाइयों को दोषी ठहरा दिया होता तो इस लोककथा का क्या परिणाम होता?

यदि राजा बिना जाँच के दंड देता तो निर्दोष भाइयों के साथ अन्याय होता, सच्ची बुद्धिमत्ता का अपमान होता और प्रजा का राजा पर से विश्वास उठ जाता। घुड़सवार का ऊँट भी न मिलता और कहानी अन्याय और दुख पर खत्म होती।

(ख) यदि भाइयों ने अनार के बारे में सही अनुमान न लगाया होता तो लोककथा का अंत किस प्रकार होता? अपने विचार व्यक्त करें।

यदि अनार का अनुमान गलत होता तो राजा उन्हें चोर मान लेता और कठोर दंड देता। उनकी बुद्धिमत्ता सिद्ध न हो पाती, उन्हें दरबार में स्थान न मिलता और कहानी यह सिखाती कि केवल अंदाज नहीं, पक्का निरीक्षण जरूरी है।

(ग) लोककथा में यदि तीनों भाई ऊँट को खोजने जाते तो उन्हें कौन-कौन सी कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता था?

उन्हें फिर से लंबी सुनसान घाटियाँ, पहाड़, थकान, भूख-प्यास, पैरों में छाले, रास्ता भटकने का डर और जंगली जानवरों या डाकुओं का सामना करना पड़ सकता था। साथ ही महिला और बच्चे की सुरक्षा की चिंता भी होती।

(घ) यदि राजा के स्थान पर आप होते तो भाइयों की परीक्षा लेने के लिए किस प्रकार के सवाल या गतिविधियाँ करते? अपनी कल्पना साझा करें।

मैं आँख बंद करके आवाज, गंध या स्पर्श से वस्तु पहचानने की परीक्षा लेता, बंद संदूक में रखी वस्तु का वजन और आवाज से अनुमान लगाने को कहता, या चित्र में छिपी गलतियाँ खोजने को देता। इससे निरीक्षण, तर्क और इंद्रियों के उपयोग की जाँच होती।

शब्द से जुड़े शब्द

नीचे दिए गए रिक्त स्थानों में ‘बुद्धि’ से जुड़े शब्द अपने समूह में चर्चा करके लिखिए— मस्तिष्क बुद्धि

बुद्धि से जुड़े शब्द हैं — मस्तिष्क, समझ, ज्ञान, विवेक, चतुराई, प्रज्ञा, अक्ल, सोच। ये सभी शब्द सोचने-समझने और निर्णय लेने की क्षमता से संबंधित हैं।

कारक

नीचे दिए गए वाक्यों में कारक लिखकर इन्हें पूरा कीजिए – 1. “हमने तो तुम्हारे ऊँट ____ देखा तक नहीं”, भाइयों ____ परेशान होते हुए कहा।

हमने तो तुम्हारे ऊँट को देखा तक नहीं, भाइयों ने परेशान होते हुए कहा। रिक्त स्थानों में ‘को’ और ‘ने’ कारक आएंगे।

नीचे दिए गए वाक्यों में कारक लिखकर इन्हें पूरा कीजिए – 2. “मैं अपने रेवड़ों ____ पहाड़ों ____ लिये जा रहा था”, उसने कहा, “और मेरी पत्नी मेरे छोटे-से बेटे ____ साथ एक बड़े-से ऊँट ____ मेरे पीछे-पीछे आ रही थी।”

मैं अपने रेवड़ों को पहाड़ों पर लिये जा रहा था और मेरी पत्नी मेरे छोटे-से बेटे के साथ एक बड़े-से ऊँट पर मेरे पीछे-पीछे आ रही थी। कारक हैं — को, पर, के, पर।

नीचे दिए गए वाक्यों में कारक लिखकर इन्हें पूरा कीजिए – 3. राजा ____ उसी समय अपने मंत्री ____ बुलाया और उसके कान ____ कुछ फुसफुसाया।

राजा ने उसी समय अपने मंत्री को बुलाया और उसके कान में कुछ फुसफुसाया। कारक हैं — ने, को, में।

नीचे दिए गए वाक्यों में कारक लिखकर इन्हें पूरा कीजिए – 4. यह सुनकर राजा ____ पेटी ____ पास लाने ____ आदेश दिया। सेवकों ____ तुरंत आदेश पूरा किया। राजा ____ सेवकों ____ पेटी खोलने ____ लिए कहा।

यह सुनकर राजा ने पेटी को पास लाने का आदेश दिया। सेवकों ने तुरंत आदेश पूरा किया। राजा ने सेवकों से पेटी खोलने के लिए कहा। कारक हैं — ने, को, का, ने, ने, से, के।

सूचनापत्र

कल्पना कीजिए कि आप इस लोककथा के वह घुड़सवार हैं जिसका ऊँट खो गया है। आप अपने ऊँट को खोजने के लिए एक सूचना कागज पर लिखकर पूरे शहर में जगह-जगह चिपकाना चाहते हैं। अपनी कल्पना और लोककथा में दी गई जानकारी के आधार पर एक सूचनापत्र लिखिए।

सूचनापत्र — खोया हुआ ऊँट — सूचित किया जाता है कि मेरा एक बहुत बड़ा ऊँट खो गया है जो एक आँख से नहीं देख पाता। उस पर मेरी पत्नी अपने छोटे बच्चे के साथ सवार थीं। जो भी सज्जन इसे देखे कृपया नगर के राजभवन में सूचित करें या घुड़सवार को बताएँ। बताने वाले को उचित इनाम दिया जाएगा। धन्यवाद। — घुड़सवार, संपर्क: राजभवन के पास।

आपकी बात

1. लोककथा में तीन भाइयों की पैनी दृष्टि की बात कही गई है। क्या आपने कभी अपनी पैनी दृष्टि का प्रयोग किसी समस्या को हल करने के लिए किया है? उस समस्या और आपके द्वारा दिए गए हल के विषय में लिखिए।

हाँ, एक बार मेरी चाबी घर में खो गई थी। मैंने ध्यान से देखा कि दरवाजे के पास रेत पर हल्के निशान और कुर्सी के नीचे चमक दिख रही थी। वहीं चाबी गिरी थी। पैनी दृष्टि से देखने पर समस्या जल्दी हल हो गई।

2. लोककथा में बताया गया है कि भाइयों ने “बचपन से हर वस्तु पर ध्यान देने की आदत डाली।” यदि आपने ऐसा किया है तो आपको अपने जीवन में इसके क्या-क्या लाभ मिलते हैं?

हर चीज़ पर ध्यान देने से मेरी वेधशाला बढ़ी है, पढ़ाई में गलतियाँ कम होती हैं, चीजें जल्दी याद रहती हैं और खोई वस्तुएँ जल्दी मिल जाती हैं। यह आदत समय और मेहनत बचाती है।

3. लोककथा में भाइयों को यात्रा करते समय अनेक कठिनाइयाँ आईं, जैसे— भूख, थकान और पैरों में छाले। आप अपने दैनिक जीवन में किन-किन कठिनाइयों का सामना करते हैं? लिखिए।

मैं सुबह जल्दी उठने, होमवर्क पूरा करने, भारी बस्ता ले जाने और कभी-कभी बस में भीड़ जैसी कठिनाइयों का सामना करता हूँ। धैर्य और योजना से मैं इन्हें हल करने की कोशिश करता हूँ।

4. भाइयों ने बिना देखे ही ऊँट के बारे में सही-सही बातें बताईं। क्या आपको लगता है कि अनुभव और समझ से देखे बिना भी सही निर्णय लिया जा सकता है? क्या आपने भी कभी ऐसा किया है?

हाँ, अनुभव और समझ से अप्रत्यक्ष प्रमाणों से भी सही निर्णय लिया जा सकता है, जैसे डॉक्टर लक्षण देखकर बीमारी बताता है। मैंने मौसम और बादल देखकर छाता ले जाने का सही निर्णय लिया था और बारिश में भीगने से बच गया।

5. जब ऊँट के स्वामी ने भाइयों पर शंका की तो भाइयों ने बिना गुस्सा किए शांति से उत्तर दिया। क्या आपको लगता है कि कभी किसी को संदेह होने पर हमें भी शांत रहकर उत्तर देना चाहिए? क्या आपने कभी ऐसी स्थिति का सामना किया है? ऐसे में आपने क्या किया?

हाँ, शांत रहकर उत्तर देने से झगड़ा नहीं बढ़ता और सच सामने आता है। एक बार मित्र ने सोचा कि मैंने उसकी पेंसिल ली है, मैंने गुस्सा न करके शांति से बताया कि मैंने नहीं ली और साथ खोजने में मदद की, बाद में पेंसिल उसके बैग में ही मिली।

6. राजा ने भाइयों की बुद्धिमानी देखकर बहुत आश्चर्य व्यक्त किया। क्या आपको कभी किसी की सोच, समझ या किसी विशेष कौशल को देखकर आश्चर्य हुआ है? क्या आपने कभी किसी से कुछ ऐसा सीखा है जो आपके लिए बिल्कुल नया और चौंकाने वाला हो?

हाँ, मेरे दादाजी बिना पैमाने के केवल हाथ से देखकर बढ़ई का सही माप बता देते हैं, यह देखकर मुझे बहुत आश्चर्य हुआ। उनसे मैंने लकड़ी की पहचान और अंदाज से मापना सीखा।

7. लोककथा में पिता ने अपने बेटों को यह सलाह दी कि वे समझ और ज्ञान जमा करें। क्या आपको कभी किसी बड़े व्यक्ति से ऐसी कोई सलाह मिली है जो आपके जीवन में उपयोगी रही हो? क्या आप भी अपने अनुभव से किसी को ऐसी सलाह देंगे?

मेरी माँ ने सलाह दी थी कि रोज थोड़ा-थोड़ा पढ़ो और दूसरों की मदद करो, यही सच्ची पूँजी है। यह सलाह मेरे लिए बहुत उपयोगी रही। मैं छोटे भाई को यही सलाह दूँगा कि किताबें पढ़ो और हर चीज को ध्यान से देखो।

8. भाइयों ने अपने ऊपर लगे आरोपों के होते हुए भी सदा सच्चाई का साथ दिया। क्या आपको लगता है कि सदा सच बोलना महत्वपूर्ण है, भले ही स्थिति कठिन क्यों न हो? क्या आपको किसी समय ऐसा लगा है कि आपकी सच्चाई ने आपको समस्याओं से बाहर निकाला हो?

हाँ, सदा सच बोलना बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि सच थोड़ी देर में कठिन लगता है पर अंत में विश्वास दिलाता है। एक बार मैंने गलती से काँच तोड़ा और सच बता दिया, माता-पिता ने डाँटा पर फिर माफ कर दिया और मुझ पर भरोसा बढ़ा।

आज की पहेली

1. कौन है यह प्राणी? 1. इसकी लंबी पूँछ होती है जो पेड़ों की शाखाओं के चारों ओर लिपटी रहती है। 2. इसका मुख्य आहार कीट और छोटे जीव होते हैं जिन्हें यह चुपके से पकड़ता है। 3. यह प्राणी अपने परिवेश में घुल-मिल जाता है और अपनी रंगत को बदल सकता है। 4. इसके पास तेज आँखें होती हैं जो चारों दिशाओं में देख सकती हैं।

यह प्राणी गिरगिट है। गिरगिट की लंबी लिपटी पूँछ, कीटों को पकड़ना, रंग बदलकर छिप जाना और चारों ओर घूमने वाली तेज आँखें ये सभी संकेत उसी की ओर इशारा करते हैं।

2. रंगीन डिब्बे - एक मेज पर चार रंगीन डिब्बे बराबर-बराबर रखे हैं— लाल, हरा, नीला और पीला। बताइए पीले डिब्बे के बराबर में कौन-सा डिब्बा है? यदि— 1. लाल डिब्बा नीले डिब्बे के पास है। 2. हरा डिब्बा पीले डिब्बे के पास नहीं है। 3. पीला डिब्बा लाल डिब्बे के पास नहीं है। 4. हरा डिब्बा लाल डिब्बे के पास है।

पीले डिब्बे के बराबर में नीला डिब्बा है। तर्क: हरा लाल के पास है और लाल नीले के पास है इसलिए क्रम हरा-लाल-नीला बनता है, पीला लाल के पास नहीं है और हरा पीले के पास नहीं है तो बचा स्थान पीले के लिए नीले के पास ही है। अतः क्रम हरा, लाल, नीला, पीला होता है और पीले के बराबर में नीला है।