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वर्षा-बहार — Class 7 Hindi

मल्हार · Chapter 7

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Chapter summary

मुकुटधर पांडेय द्वारा रचित यह कविता वर्षा ऋतु के मनोरम सौंदर्य और उससे उपजे आनंद का चित्रण करती है। कवि कहते हैं कि वर्षा की बहार सबके मन को लुभा रही है और आकाश में अनूठी छटा छाई है। बिजली चमक रही है, बादल गरज रहे हैं, पानी बरस रहा है और झरने बह निकले हैं। ठंडी हवा चलती है, डालियाँ हिलती हैं और बागों में मालिनें सुंदर गीत गाती हैं। तालाबों के जलचर प्रसन्न होते हैं, पपीहे ग्रीष्म का ताप भुलाकर इधर-उधर उड़ते हैं और वन में मोर नाचते हैं तथा मेंढक मधुर स्वर में गाते हैं। गुलाब खिलकर सुगंध बिखेर रहा है, बागों में खूब आमोद (आनंद) छाया है, हंस सुंदर कतार बाँधकर चलते हैं और किसान मनोहर गीत गाते हैं। कवि अंत में कहते हैं कि वर्षा की यह बहार भूमि पर अनोखी है और सारे संसार की शोभा इसी पर निर्भर है — अर्थात वर्षा ही पृथ्वी पर हरियाली और जीवन का मुख्य आधार है। कविता में प्रकृति का मानवीकरण, सुंदर विशेषण, तुकांत और सजीव दृश्य-चित्रण के माध्यम से वर्षा को उत्सव-सा प्रसन्नतादायक बनाया गया है।
वर्षा का सौंदर्यप्रकृति का मानवीकरणजीव-जंतुओं का आनंदवर्षा और जीवनदृश्य-चित्रण

Key ideas & terms

वर्षा-बहार
वर्षा ऋतु की वह सुंदरता और उल्लास जिसे कवि बसंत की बहार के समान आनंददायक मानते हैं।
आमोद
आनंद, हर्ष, प्रसन्नता; "बागों में खूब सुख से, आमोद छा रहा है" में प्रयुक्त।
मानवीकरण
प्रकृति में मानवीय कार्यों का आरोपण, जैसे मालिनों का गीत गाना, मोरों का नाचना, मेंढकों का गाना।
सौरभ
सुगंध, खुशबू; "खिलता गुलाब कैसा, सौरभ उड़ा रहा है" में प्रयुक्त।
विशेषण
संज्ञा की विशेषता बताने वाला शब्द, जैसे "सुंदर गीत" में "सुंदर"।
मुकुटधर पांडेय
छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में जन्मे प्रकृति-प्रेमी कवि, जिन्हें भारत सरकार द्वारा "पद्मश्री" से सम्मानित किया गया।

Extra questions & answers

इस कविता में वर्षा ऋतु का कौन-सा भाव मुख्य रूप से उभरता है?

आनंद और प्रसन्नता का भाव — पूरी कविता वर्षा से उपजे उल्लास और उत्सव का चित्रण करती है।

"नभ में छटा अनूठी" और "घनघोर छा रही है" किस दृश्य को व्यक्त करते हैं?

आकाश में बादलों के घिरने और छा जाने के सुंदर दृश्य को।

वर्षा को "अनोखी बहार" क्यों कहा गया है?

क्योंकि वर्षा एक अद्भुत प्राकृतिक घटना है जो सभी जीवों को सुख और संतोष देती है और चारों ओर हरियाली व आनंद फैला देती है।

"सारे जगत की शोभा, निर्भर है इसके ऊपर" का क्या अर्थ है?

कि वर्षा ही पृथ्वी पर हरियाली और जीवन का मुख्य स्रोत है; संसार की समस्त शोभा वर्षा पर ही निर्भर करती है।

कविता में कौन-कौन गीत गा रहे हैं?

बागों में मालिनें, मेंढक अपने मधुर स्वर में और किसान अपने खेतों में मनोहर गीत गा रहे हैं — सभी वर्षा के आनंद में मग्न हैं।

वर्षा आने पर जीव-जंतुओं की प्रसन्नता किस प्रकार दिखाई गई है?

तालाबों के जलचर प्रसन्न होते हैं, पपीहे ताप भुलाकर उड़ते हैं, मोर वन में नाचते हैं और मेंढक मधुर स्वर में गाते हैं।

"खिलता गुलाब कैसा, सौरभ उड़ा रहा है" का क्या भाव है?

खिले हुए गुलाब का चित्र तो खींचता ही है, साथ ही यह वर्षा से उत्पन्न ताज़गी और सुगंध-भरे वातावरण का भी संकेत देता है।

कविता में प्रयुक्त प्रमुख काव्य-विशेषताएँ कौन-सी हैं?

प्रकृति का मानवीकरण, सुंदर विशेषणों का प्रयोग, सजीव दृश्य-चित्रण, तुकांत तथा सरल लयात्मक भाषा।

शीर्षक "वर्षा-बहार" कितना उपयुक्त है?

पूरी कविता वर्षा ऋतु की सुंदरता और आनंद का वर्णन करती है, गीत गाना, नृत्य करना और सुगंध फैलना जैसी सकारात्मक गतिविधियाँ इसे "बहार" सिद्ध करती हैं, इसलिए शीर्षक सार्थक है।

कविता हमें प्रकृति के प्रति कौन-सा भाव सिखाती है?

कि हमें प्रकृति के सौंदर्य का आनंद लेना चाहिए और यह समझना चाहिए कि वर्षा जैसी प्राकृतिक घटनाएँ जीवन और हरियाली का आधार हैं।