मीरा के पद — Class 7 Hindi
मल्हार · Chapter 10
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Chapter summary
The story in steps
- मीरा पहले पद में श्रीकृष्ण से प्रार्थना करती हैं कि वे उनकी आँखों में सदा बसें.
- वे कृष्ण के रूप का चित्र बनाती हैं और उनकी मुरली, माला, घंटिका और नूपुर का वर्णन करती हैं.
- अंत में वे कृष्ण को संतों का सुखदाता और भक्तों का प्यारा गोपाल कहती हैं.
- दूसरे पद में सावन की बरसती बदरिया देखकर मीरा का मन आनंद से भर उठता है.
- उन्हें हरि के आने की आहट मिलती है, इसलिए बादल, बिजली, बूँदें और हवा सब सुहावने लगते हैं.
- मीरा अपने गिरधर के आगमन पर हर्ष से मंगल गाती हैं और प्रेम-भक्ति प्रकट करती हैं.
Key ideas & terms
- नंदलाल
- नंद के पुत्र श्रीकृष्ण; पहले पद में मीरा जिनसे अपनी आँखों में बसने की विनती करती हैं।
- वैजयंती माल
- वैजयंती पौधे के बीजों से बनी माला, जो श्रीकृष्ण के हृदय पर सुशोभित बताई गई है।
- सावन
- श्रावण का महीना (आषाढ़ के बाद, भाद्रपद से पहले); दूसरे पद में वर्णित मनभावन वर्षा ऋतु।
- गिरधर / गिरधरनागर
- पर्वत (गोवर्धन) को धारण करने वाले श्रीकृष्ण; मीरा अपने आराध्य के लिए यह नाम प्रयोग करती हैं।
- भक्ति
- ईश्वर के प्रति प्रेम और समर्पण का भाव, जो मीरा के दोनों पदों का केंद्रीय रस है।
- मीरा
- लगभग पाँच सौ वर्ष पूर्व की महान कृष्ण-भक्त कवयित्री और संत, जिन्होंने राजमहल त्यागकर भक्ति का जीवन चुना।
शब्दार्थ · Word meanings
- नैनन
- आँखों में
- नंदलाल
- नंद के प्रिय पुत्र कृष्ण
- मोहनि मूरति
- मन मोह लेने वाला रूप
- अधर
- होंठ
- मुरली
- बाँसुरी
- बैजंती माल
- वैजयंती माला
- कटि
- कमर
- घंटिका
- छोटी घंटियाँ
- नूपुर
- पायल
- बदरिया
- बादल
- उमड़ि-घुमड़ि
- घिर-घिरकर चलना
- दामिनि
- बिजली
Extra questions & answers
"बसो मेरे नैनन में नंदलाल" पद में मीरा किनसे विनती कर रही हैं?
वे श्रीकृष्ण (नंदलाल) से विनती करती हैं कि वे उनकी आँखों में बस जाएँ।
"बसो मेरे नैनन में नंदलाल" पद का मुख्य विषय क्या है?
श्रीकृष्ण के प्रति प्रेम और भक्ति का भाव — मीरा अपने आराध्य की छवि को सदा अपने नेत्रों में बसाए रखना चाहती हैं।
पहले पद में श्रीकृष्ण के सौंदर्य का वर्णन किस प्रकार किया गया है?
मोहिनी मूरत, साँवली सूरत, विशाल नैन, अधरों पर सुधा-रस बरसाती मुरली, हृदय पर वैजयंती माला, कमर पर घंटियाँ और मधुर नूपुरों के माध्यम से।
मीरा श्रीकृष्ण को किन विशेषणों से पुकारती हैं?
वे श्रीकृष्ण को "संतों को सुख देने वाला" तथा "भक्तों से स्नेह करने वाला गोपाल" (भक्तवत्सल) कहती हैं।
"बरसे बदरिया सावन की" पद में किस ऋतु का वर्णन है?
वर्षा ऋतु (सावन) का — सावन की घटा के बरसने और उससे उपजी उमंग का मनभावन चित्रण।
दूसरे पद में मीरा का मन उमंग से क्यों भर उठता है?
क्योंकि सावन में उसने अपने प्रभु श्रीकृष्ण (हरि) के आने की भनक सुनी है, इसलिए उसका मन आनंद और उमंग से भर उठता है।
"बरसे बदरिया सावन की" पद को पढ़कर मीरा की कौन-सी मनोदशा प्रकट होती है?
प्रसन्नता और उल्लास — सावन की वर्षा और कृष्ण के आगमन की आशा से मीरा अत्यंत प्रसन्न और आनंदित प्रतीत होती हैं।
दूसरे पद में सावन का दृश्य किस प्रकार चित्रित किया गया है?
चारों दिशाओं से बादल उमड़-घुमड़कर आते हैं, बिजली चमकती है, झड़ी लग जाती है, नन्हीं-नन्हीं बूँदें बरसती हैं और शीतल सुहावनी पवन बहती है।
मीरा अपने पदों में अपने नाम का उल्लेख क्यों करती हैं?
क्योंकि मीरा के समय के अनेक कवि रचना के अंत में अपना नाम (छाप) जोड़ते थे; इससे रचयिता की पहचान होती है और भक्ति-भाव की मुहर लगती है।
मीरा के इन पदों से हमें क्या प्रेरणा मिलती है?
ईश्वर के प्रति अनन्य प्रेम, श्रद्धा और समर्पण की प्रेरणा — कि सच्ची भक्ति में मन सदा अपने आराध्य की ओर लगा रहता है।


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