फूल और काँटा
Class 7 Hindi · मल्हार · Chapter 3
Visual story
Watch as storyTap a card to open it full-screen — swipe through like a story.
CBSE Class 7 community
View all- Mathematics
- Science
- + 3 more
- Mathematics
- Social Science
- Space weighted by chapter size
- Charts from the book's own data
- Traps corrected
- Space weighted by chapter size
- Charts from the book's own data
- Traps corrected
- Space weighted by chapter size
- Charts from the book's own data
- Traps corrected
- Space weighted by chapter size
- Charts from the book's own data
- Traps corrected
- Space weighted by chapter size
- Charts from the book's own data
- Traps corrected
- Space weighted by chapter size
- Charts from the book's own data
- Traps corrected
- Space weighted by chapter size
- Charts from the book's own data
- Traps corrected
The story in short
अयोध्यासिंह उपाध्याय "हरिऔध" द्वारा रचित यह कविता फूल और काँटे के प्रतीक के माध्यम से मनुष्य के स्वभाव और कर्मों का अंतर समझाती है। कवि कहते हैं कि फूल और काँटा एक ही पौधे पर जन्म लेते हैं, एक ही चाँदनी, एक-सी वर्षा और एक-सी हवा दोनों को मिलती है, अर्थात उन्हें समान परिवेश और देखभाल प्राप्त होती है। फिर भी दोनों के ढंग एक से नहीं होते। काँटा किसी की उँगलियाँ छेद देता है, वस्त्र फाड़ देता है, तितलियों के पंख कतरता है और भौंरे को बेध देता है — अर्थात वह दूसरों को कष्ट पहुँचाता है। इसके विपरीत फूल तितलियों को गोद में लेकर, भौंरे को अपना रस पिलाकर तथा अपनी सुगंध और रंग से सबको प्रसन्नता देता है। इसी कारण काँटा सबकी आँखों में खटकता है जबकि फूल देवता के सिर पर सुशोभित होता है। कविता का मूल संदेश यह है कि व्यक्ति की पहचान उसके कुल या वंश से नहीं, बल्कि उसके गुणों, स्वभाव और अच्छे कर्मों से होती है — यदि किसी में बड़प्पन की कमी हो तो ऊँचे कुल की बड़ाई भी काम नहीं आती।


7
2
