पानी रे पानी — Class 7 Hindi
मल्हार · Chapter 4Rising
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Chapter summary
Key ideas & terms
- जल-चक्र
- समुद्र से भाप बनकर उठा जल बादल बनकर बरसता है और नदियों द्वारा पुनः समुद्र में मिल जाता है — यही निरंतर प्रक्रिया जल-चक्र है।
- भूजल
- ज़मीन के नीचे छिपा जल भंडार, जो तालाबों-नदियों से रिसकर समृद्ध होता है और साल भर काम आता है।
- वर्षा जल संग्रहण
- वर्षा के जल को "जल जहाँ गिरे वहीं एकत्र करना" — प्राकृतिक या कृत्रिम रूप से धरती में संचित करना।
- गुल्लक (रूपक)
- लेखक ने धरती की तुलना एक विशाल गुल्लक से की है जिसमें वर्षा का पानी जमा होता है।
- अकाल और बाढ़
- जल की अत्यधिक कमी (अकाल) और अत्यधिक मात्रा (बाढ़) — लेखक इन्हें एक ही सिक्के के दो पहलू कहते हैं।
- अनुपम मिश्र
- प्रसिद्ध पर्यावरणविद, लेखक और संपादक; "आज भी खरे हैं तालाब" उनकी चर्चित पुस्तक है।
Extra questions & answers
पाठ में धरती को "बहुत बड़ी गुल्लक" क्यों कहा गया है?
क्योंकि जैसे गुल्लक में धीरे-धीरे पैसे जमा होते हैं, वैसे ही धरती में वर्षा का पानी जमा होकर भूजल भंडार बनाता है, जिसे ज़रूरत पड़ने पर उपयोग किया जाता है।
जल-चक्र की प्रक्रिया कैसे पूरी होती है?
समुद्र से उठी भाप बादल बनकर बरसती है, वह पानी नदियों के द्वारा बहता हुआ फिर समुद्र में जा मिलता है — इस प्रकार जल-चक्र पूरा होता है।
"इस बड़ी गलती की सजा अब हम सबको मिल रही है" — यहाँ किस गलती की ओर संकेत है?
तालाबों को कचरे से पाटकर उन पर मकान, बाज़ार आदि बनाने की गलती की ओर, जिससे जल-संकट उत्पन्न हुआ है।
पाठ में पानी को रुपयों से भी अधिक मूल्यवान क्यों बताया गया है?
क्योंकि पानी जीवन का आधार है; उसके बिना घर, खेत और जीवन नहीं चल सकते, इसलिए वर्षा-जल को सहेजना धन सहेजने से भी अधिक ज़रूरी है।
अकाल और बाढ़ को "एक ही सिक्के के दो पहलू" क्यों कहा गया है?
क्योंकि दोनों ही जल के असंतुलन से उत्पन्न होते हैं — एक पानी की अत्यधिक कमी से, दूसरा अत्यधिक मात्रा से; जल को ठीक से सँभालने पर दोनों समस्याएँ हल हो सकती हैं।
तालाब और झीलें भूजल को कैसे समृद्ध करते हैं?
इनमें जमा पानी धीरे-धीरे ज़मीन के नीचे रिसकर, छनकर भूजल भंडार में मिल जाता है, जिससे भूमिगत जल बढ़ता है।
यदि सारी नदियाँ, झीलें और तालाब सूख जाएँ तो क्या होगा?
भूजल भंडार समाप्त हो जाएगा, पीने व सिंचाई का जल नहीं रहेगा, अकाल जैसी भयानक स्थिति बन जाएगी और जीवन कठिन हो जाएगा।
पाठ का शीर्षक "पानी रे पानी" क्यों उपयुक्त है?
क्योंकि पूरा पाठ पानी की उपलब्धता, कमी, अधिकता और संरक्षण के इर्द-गिर्द घूमता है, इसलिए यह शीर्षक पूरी तरह सार्थक है।
वर्षा जल संग्रहण का मूल उद्देश्य क्या है?
"जल जहाँ गिरे, वहीं एकत्र कीजिए" — अर्थात वर्षा के पानी को बहने देने के बजाय वहीं संचित करके बाद के उपयोग के लिए सुरक्षित रखना।
पाठ हमें क्या संदेश देता है?
कि हमें जल-चक्र को समझकर वर्षा-जल का संग्रहण करना चाहिए, तालाबों और नदियों की रक्षा करनी चाहिए तथा भूजल भंडार को सुरक्षित रखना चाहिए, तभी जल-संकट से बचा जा सकता है।


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