वयं वर्णमालां पठामः — Class 6 Sanskrit
दीपकम् · Chapter 1
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Chapter summary
The story in steps
- पाठः वर्णानां द्विविधं रूपं बतलाता है—स्वराः तथा व्यञ्जनानि।
- स्वराः समानाक्षर, सन्ध्यक्षर और अनुनासिक-स्वररूपेण दिखाए जाते हैं।
- व्यञ्जनानां उच्चारणे अ-स्वरस्य सहायता बताकर उनके भेद और वर्ग दिए जाते हैं।
- व्यञ्जनैः सह स्वराणां योगेन गुणिताक्षराणि और अयोगवाहौ वर्णौ समझाए जाते हैं।
- शब्दार्थ, चित्राभ्यास, नामलेखन और वर्ण-समूहों के अभ्यास विद्यार्थियों से कराए जाते हैं।
- अन्ते वर्णानाम् उच्चारण-स्थानानि, द्विस्थानीय-वर्णाः और पाणिनीय-शिक्षा-सूत्राणि समझाए जाते हैं।
Key ideas & terms
- स्वराः
- जिन वर्णों का उच्चारण स्वतन्त्र रूप से होता है — अ, आ, इ, ई, उ, ऊ, ऋ, ॠ, ऌ, ए, ऐ, ओ, औ।
- सन्ध्यक्षराणि
- दो स्वरों की सन्धि से बने स्वर — ए (अ+इ), ऐ (अ+ए), ओ (अ+उ), औ (अ+ओ)। इनके ह्रस्व रूप नहीं होते।
- स्पर्शाः (वर्ग्याः)
- क से म तक के पच्चीस व्यञ्जन, जो उच्चारण-स्थान के अनुसार पाँच वर्गों में विभक्त हैं।
- अयोगवाहौ
- अनुस्वार (अं) तथा विसर्ग (अः) — दो विशिष्ट वर्ण; इनमें उच्चारणार्थ "अ" स्वर पहले जुड़ता है।
- गुणिताक्षराणि
- व्यञ्जन के साथ स्वरों के संयोग से बने मात्रा-युक्त अक्षर — जैसे क + आ = का, क + इ = कि।
- उच्चारणस्थानानि
- पाणिनीय शिक्षा के छह आधारभूत स्थान — कण्ठ, तालु, मूर्धा, दन्त, ओष्ठ तथा नासिका।
शब्दार्थ · Word meanings
- सन्धिद्वारा
- सन्धि के द्वारा
- नवीनाः
- नए
- सन्ध्यक्षर-स्वराः
- सन्धि से बने स्वर
- अनुनासिक-स्वराः
- नाक से बोले जाने वाले स्वर
- अपेक्षा
- आवश्यकता
- स्पर्शाः (वर्ग्याः)
- वर्गों में रखे व्यञ्जन
- अन्तःस्थाः
- अर्धस्वर वाले वर्ण
- ऊष्म-वर्णाः
- गरम वायु से बोले वर्ण
- अयोगवाहौ
- विशेष दो व्यञ्जनवर्ण
- गुणिताक्षराणि
- स्वर-युक्त व्यञ्जनरूप
- उच्चारण-स्थानानि
- बोलने के स्थान
- द्विस्थानीय-वर्णानाम्
- दो स्थानों से बोले वर्ण
Extra questions & answers
वर्ण कितने प्रकार के होते हैं?
वर्ण दो प्रकार के होते हैं — स्वर तथा व्यञ्जन।
समानाक्षर तथा सन्ध्यक्षर में क्या अन्तर है?
वर्णमाला के आरम्भ के सामान्य स्वर (अ, इ, उ आदि) समानाक्षर हैं; दो स्वरों की सन्धि से बने ए, ऐ, ओ, औ सन्ध्यक्षर कहलाते हैं।
व्यञ्जनों के उच्चारण में किसकी सहायता अपेक्षित होती है?
व्यञ्जनों के उच्चारण में किसी स्वर — प्रायः "अ" — की सहायता अपेक्षित होती है; इसी कारण क्, ख् में "अ" जोड़कर क, ख कहा जाता है।
स्पर्श व्यञ्जन कितने वर्गों में विभक्त हैं?
स्पर्श (वर्ग्य) व्यञ्जन पाँच वर्गों में विभक्त हैं — क-वर्ग, च-वर्ग, ट-वर्ग, त-वर्ग तथा प-वर्ग।
अन्तःस्थ वर्ण कौन-से हैं और उन्हें अर्धस्वर क्यों कहते हैं?
य, र, ल, व अन्तःस्थ वर्ण हैं; ये प्रायः स्वर-वर्णों के स्थान पर आते हैं, इसलिए "अर्धस्वर" भी कहलाते हैं।
ऊष्म वर्ण कौन-से हैं?
श, ष, स, ह ऊष्म वर्ण हैं; इनके उच्चारण के समय मुख से उष्ण वायु निकलती है।
अयोगवाह वर्ण कौन-से हैं?
अनुस्वार (अं) तथा विसर्ग (अः) — ये दो अयोगवाह वर्ण हैं।
पाणिनीय शिक्षा के अनुसार वर्णों के छह उच्चारण-स्थान कौन-से हैं?
कण्ठ, तालु, मूर्धा, दन्त, ओष्ठ तथा नासिका — ये छह उच्चारण-स्थान हैं।
कण्ठ्य वर्ण कौन-से हैं?
अ, आ, क, ख, ग, घ, ङ, ह तथा विसर्ग — ये कण्ठ-स्थान से उच्चारित होते हैं, अतः कण्ठ्य कहलाते हैं।
गुणिताक्षर कैसे बनते हैं?
व्यञ्जन के साथ विभिन्न स्वरों के संयोग (मात्रा-योजन) से गुणिताक्षर बनते हैं, जैसे क + ई = की, च + उ = चु।
वयम् अभ्यासं कुर्मः
१. कस्य चित्रम्? वदन्तु लिखन्तु च—
चित्रेषु दृश्यन्ते — (१) गणेशः, (२) कपोतः, (३) रामः, (४) मृगः, (५) यज्ञः/अग्निः, (६) नासिका, (७) भारतः (मानचित्रम्), (८) डमरुः, (९) चमसः, (१०) पादः/चरणः।
२. चित्रं पश्यन्तु । पिट्टकातः समुचितान् वर्णसमूहान् चित्वा रिक्तस्थानानि पूरयन्तु — च........... शु........... वृ........... द........... च........... ...........शलम् अ........... ढ........... श........... प...... ङ्कजम् पिट्टका — क्का त्रि ण्डः ञ्चुः क्षः ङ्क ङ्खः न्ताः न्द्रः ष्ट
चित्राणि दृष्ट्वा पिट्टकातः उचितान् वर्णसमूहान् योजयित्वा शब्दाः पूर्यन्ते — चन्द्रः, शुण्डः, वृक्षः, दन्ताः, चञ्चुः, त्रिशूलम्, अष्ट, ढक्का, शङ्खः, पङ्कजम्। (प्रत्येकः वर्णसमूहः एकवारमेव प्रयुज्यते।)
३. प्रथम-वर्णेन पदं वदन्तु लिखन्तु च— अ अग्निः अस्त्रम् न नदी नौका क ....................... ....................... म ....................... ....................... च ....................... ....................... ह ....................... ....................... प ....................... ....................... त ....................... ....................... र ....................... ....................... व ....................... ....................... इ ....................... ....................... श ....................... .......................
उदाहरणार्थम् — क — कमलम्, कपोतः; म — मयूरः, माला; च — चन्द्रः, चषकः; ह — हस्तः, हंसः; प — पत्रम्, पुष्पम्; त — तरुः, तालः; र — रथः, रवि; व — वनम्, वानरः; इ — इक्षुः, इन्दुः; श — शुकः, शाला। छात्राः स्वेच्छया प्रत्येकं वर्णेन द्वे द्वे पदानि वक्तुं लेखितुं च शक्नुवन्ति।
४. स्व-परिवारस्य सदस्यानां पूर्ण-नामानि लिखन्तु — उपाधिः प्रथम-नाम मध्य-नाम अन्त्य-नाम / कुल-नाम माता श्रीमती पिता श्रीमान् भगिनी सुश्रीः भ्राता श्रीमान् पितामही श्रीमती पितामहः श्रीमान् मातामही श्रीमती मातामहः श्रीमान्
अयं व्यक्तिगतः अभ्यासः अस्ति। छात्रः स्वपरिवारस्य नामानि लिखेत्। उदाहरणम् — माता — श्रीमती सीता शर्मा, पिता — श्रीमान् राजेश शर्मा, भगिनी — सुश्रीः प्रिया शर्मा, भ्राता — श्रीमान् अमित शर्मा, पितामही — श्रीमती कमला शर्मा, पितामहः — श्रीमान् मोहनलाल शर्मा, मातामही — श्रीमती राधा वर्मा, मातामहः — श्रीमान् कृष्ण वर्मा। मध्य-नाम नास्ति चेत् रिक्तं त्यजेत्, केवलम् आद्यक्षरं न लिखेत्, पूर्णं नाम लिखेत्।
५. कक्षायाः शिक्षिकाणां शिक्षकाणां च पूर्ण-नामानि लिखन्तु — उपाधिः प्रथम-नाम मध्यम-नाम अन्त्य-नाम
अयमपि व्यक्तिगतः अभ्यासः अस्ति। छात्रः स्वकक्षायाः शिक्षिकाणां शिक्षकाणां च पूर्णनामानि लिखेत्। उदाहरणम् — श्रीमती सुनीता देवी गुप्ता — हिन्दी-शिक्षिका, श्रीमान् अजय कुमार सिंह — संस्कृत-शिक्षकः। छात्रः स्वविद्यालयस्य वास्तविकं नाम लिखेत्।
६. मित्राणां पूर्ण-नामानि लिखन्तु — प्रथम-नाम मध्यम-नाम अन्त्य-नाम
छात्रः स्वमित्राणां पूर्णनामानि लिखेत्। उदाहरणम् — प्रथम-नाम — राहुल, मध्यम-नाम — कुमार, अन्त्य-नाम — यादव; प्रथम-नाम — अंजलि, मध्यम-नाम — —, अन्त्य-नाम — मिश्रा। प्रत्येकं छात्रः स्वमित्राणां वास्तविकानि नामानि लिखेत्।


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