राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद
Class 9 Hindi · गंगा · Chapter 9
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The story in short
गोस्वामी तुलसीदास के "रामचरितमानस" के बालकांड का यह अंश सीता-स्वयंवर के उस प्रसंग का है जब श्रीराम द्वारा शिव-धनुष भंग किए जाने पर क्रोधित मुनि परशुराम सभा में आते हैं। प्रस्तुत अंश में सभा में उपस्थित राजाओं का भय, विश्वामित्र और जनक की उपस्थिति, तथा परशुराम के तेजस्वी एवं रौद्र रूप का वर्णन है। शिव-धनुष को खंडित देखकर परशुराम तीव्र क्रोध में जनक से कठोर वचन कहते हैं और धनुष तोड़ने वाले को सहस्रबाहु के समान अपना शत्रु घोषित करते हैं, चेतावनी देते हैं कि वह समाज से अलग हो जाए, अन्यथा सभी राजा मारे जाएँगे। इस भय और तनाव के बीच श्रीराम अत्यंत विनम्रता से कहते हैं कि धनुष तोड़ने वाला आपका कोई दास ही होगा। दूसरी ओर लक्ष्मण मुस्कुराते हुए व्यंग्यपूर्वक कहते हैं कि बचपन में तो हमने ऐसी कई धनुहियाँ तोड़ डालीं, इस पुराने धनुष पर इतनी ममता क्यों! इससे परशुराम और भड़क उठते हैं। यह अंश संवाद-शैली के माध्यम से राम की मर्यादा-विनय, परशुराम के रौद्र रूप और लक्ष्मण के निर्भीक प्रत्युत्तर को नाटकीयता के साथ प्रस्तुत करता है।


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