बुद्धिः सर्वार्थसाधिका
Class 6 Sanskrit · दीपकम् · Chapter 10
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The story in short
यह पाठ "बुद्धि सब कार्यों को सिद्ध करने वाली है" — इस सन्देश को एक रोचक कथा द्वारा प्रस्तुत करता है। बुद्धिपूर्वक व्यवहार से कठिन कार्य भी सरल हो जाता है, और बुद्धिबल शरीरबल से अधिक महत्त्वपूर्ण है। कथा इस प्रकार है — एक वन में एक विशाल सरोवर के किनारे की कोमल भूमि में अनेक शशक (खरगोश) रहते थे। एक प्यासा गजयूथ (हाथियों का झुंड) उस सरोवर पर जल पीने आता है, जिसके परिभ्रमण से अनेक शशक कुचलकर घायल व मृत हो जाते हैं। भयभीत शशक उपाय सोचते हैं। शशकराज एक बुद्धिमान उपाय निकालता है — वह गजराज के पास जाकर कहता है कि यह सरोवर चन्द्रदेव (शशाङ्क) का निवास-स्थान है और शशक उसकी प्रजा हैं। गजराज जब सरोवर के जल में चन्द्रमा का प्रतिबिम्ब देखता है, तो भयभीत होकर चन्द्र को नमन करता है तथा गजयूथ के साथ अन्यत्र चला जाता है। इस प्रकार शशक सुखपूर्वक रहने लगते हैं। योग्यता-विस्तार में वर्तमानकाल तथा लट्-लकार के क्रियापद-रूप (पठति-पठतः-पठन्ति आदि) सारणीबद्ध रूप से सिखाए गए हैं।


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