आलस्यं हि मनुष्याणां शरीरस्थः महान् रिपुः

Class 6 Sanskrit · दीपकम् · Chapter 14

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The story in short

यह पाठ "आलस्य मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु है" — इस सुभाषित को एक प्रेरक कथा द्वारा प्रस्तुत करता है। संवाद-शैली में आरम्भ होकर माता पुत्र को बताती है कि जो परिश्रम करता है वही जीवन में सफलता पाता है; परिश्रम मनुष्य का मित्र है तथा आलस्य शत्रु के समान। फिर कथा आती है — एक विशाल गाँव में एक हृष्ट-पुष्ट तथा दृढ़कायी युवक भिक्षुक भिक्षाटन करता था। एक धनिक उससे पूछता है कि वह स्वस्थ होकर भी आलस्यवश भीख क्यों माँगता है। धनिक उसे समझाने के लिए एक-एक करके उसके शरीर के अंगों (पाद, हस्त आदि) को सहस्राधिक रूपयों में खरीदना चाहता है, किन्तु भिक्षुक प्रत्येक अंग देने से इनकार करता है। तब धनिक समझाता है कि "तेरे पास सहस्राधिक मूल्य की वस्तुएँ (शरीराङ्ग) पहले से हैं, फिर भी तू स्वयं को दुर्बल क्यों मानता है? इस मानव-जन्म की सफलता के लिए परिश्रम कर।" इससे प्रेरित होकर भिक्षुक भिक्षाटन त्यागकर परिश्रम से धनार्जन करने लगता है। पाठ का व्याकरण-बिन्दु द्वितीया-विभक्ति (कर्म कारक) है, जिसके अनेक शब्दरूप तथा वाक्य-अभ्यास दिए गए हैं।

The story in 6 beats

  1. 1माता बालक को बताती है कि अवकाश विद्यालय का है, स्वाध्याय का नहीं, इसलिए परिश्रम करना चाहिए।
  2. 2माता समझाती है कि परिश्रम से ही सफलता मिलती है और आलस्य मनुष्य का शत्रु है।
  3. 3एक गाँव में एक दृढ़काय युवक भिक्षाटन करता है और लोगों से दान माँगता है।
  4. 4एक दिन एक धनिक आता है और भिक्षुक से पूछता है कि वह क्या चाहता है।
  5. 5धनिक उसके पाँव और हाथ खरीदने की बात कहकर समझाता है कि उसके शरीर के अंग बहुत मूल्यवान हैं।
  6. 6भिक्षुक भिक्षाटन छोड़ देता है और परिश्रम से धन कमाकर सम्मान के साथ जीवन बिताने लगता है।
आलस्य बनाम परिश्रमभिक्षुक तथा धनिक की कथामानव-जन्म की सार्थकताद्वितीया-विभक्ति (कर्म कारक)द्वितीया-विभक्ति के शब्दरूप

Characters & key ideas

आलस्यम्सुस्ती; "मनुष्याणां शरीरस्थः महान् रिपुः" — मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु।
उद्यमसमः बन्धुःउद्यम (परिश्रम) के समान कोई बन्धु नहीं; जिसे करके कोई दुःखी नहीं होता।
द्वितीयाविभक्तिःकर्म कारक की विभक्ति — जैसे ग्रामम्, बालकम्, फलम्, नदीम्।
भिक्षाटनम्भीख के लिए घूमना; कथा के आरम्भ में युवक का कार्य।
दृढकायःदृढ़ शरीर वाला; कथा का हृष्ट-पुष्ट भिक्षुक।
धनार्जनम्धन कमाना; परिश्रम से धन अर्जित करना।

Word meanings · शब्दार्थ

उत्तीर्णः
पास हुआ
सफलताम्
कामयाबी
भिक्षाटनम्
भीख माँगने के लिए घूमना
दरिद्रः
बहुत गरीब
प्रभूतं धनम्
बहुत सारा धन
सविनयम्
विनम्रता से
दुर्बलम्
निर्बल
उद्यमसमः
परिश्रम के समान
निराकृतवान्
अस्वीकार किया
त्यक्त्वा
छोड़कर
धनार्जनम्
धन कमाना
सगौरवम्
सम्मान के साथ

Extra questions & answers (board-style)

वयम् अभ्यासं कुर्मः

योग्यताविस्तरः

परियोजनाकार्यम्

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