ProSyllabusLearn a little. Grow every day.Log in
YOUR STUDY SPACE · CBSE

संगच्छध्वं संवदध्वम् — Class 8 Sanskrit

दीपकम् · Chapter 1

CBSE Class 8 community

View all
All available subjects
~140days leftAnnual exams · school dates varyFeb–Mar 2027 · school-specific · tentative
Every subject, one purchase
  • Mathematics
  • Science
  • + 3 more
~7 pages per kitPage 1 free
Mathematics
~140days leftAnnual exams · school dates varyFeb–Mar 2027 · school-specific · tentative
All 2 books, one purchase
  • Mathematics
~7 pages per kitPage 1 free
Science
~140days leftAnnual exams · school dates varyFeb–Mar 2027 · school-specific · tentative
TrendingEvery important point, highly compressed.
  • Space weighted by chapter size
  • Charts from the book's own data
  • Traps corrected
Only 7 pagesPage 1 free
हिंदी
~140days leftAnnual exams · school dates varyFeb–Mar 2027 · school-specific · tentative
Every important point, highly compressed.
  • Space weighted by chapter size
  • Charts from the book's own data
  • Traps corrected
Only 7 pagesPage 1 free
Social Science
~140days leftAnnual exams · school dates varyFeb–Mar 2027 · school-specific · tentative
TrendingEvery important point, highly compressed.
  • Space weighted by chapter size
  • Charts from the book's own data
  • Traps corrected
Only 7 pagesPage 1 free
English · Poorvi
~140days leftAnnual exams · school dates varyFeb–Mar 2027 · school-specific · tentative
Every important point, highly compressed.
  • Space weighted by chapter size
  • Charts from the book's own data
  • Traps corrected
Only 7 pagesPage 1 free
Browse all Class 8 kits →

Chapter summary

यह पाठ ऋग्वेद के अन्तिम (दशम) मण्डल के प्रसिद्ध "संज्ञान-सूक्त" अथवा "संघटन-सूक्त" के तीन मन्त्रों पर आधारित है। एक क्रीडोत्सव के प्रसंग से आरम्भ होकर पाठ यह सन्देश देता है कि विजय और सफलता का मूल आधार एकता, परस्पर सामञ्जस्य और मिलकर कार्य करना है। मन्त्रों में परमेश्वर के सन्देश-रूप में मनुष्यों को प्रेरित किया गया है कि वे साथ-साथ आगे बढ़ें (संगच्छध्वम्), एक स्वर से बोलें (संवदध्वम्) और परस्पर मनोभावों को समान रूप से जानें। जैसे सृष्टि के आरम्भ में अग्नि, वायु आदि देवशक्तियाँ अपना-अपना कर्तव्य परस्पर समन्वय के साथ निभाती हैं, वैसे ही मनुष्यों को भी परिवार, समाज, राष्ट्र और विश्व की प्रगति के लिए मिलकर कार्य करना चाहिए। सबका मन, संकल्प और हृदय समान हो, द्वेष-भाव न रहे — इसी से सुख, शान्ति, मैत्री और समृद्धि आती है। पाठ ऐक्यभाव, सहयोग और संगठन-शक्ति का महत्त्व बड़े सुन्दर ढंग से प्रस्तुत करता है।
संज्ञान/संघटन-सूक्तएकता और सामञ्जस्यसमान मन-संकल्प-हृदयदेवशक्तियों का समन्वयसंगठन-शक्ति का महत्त्ववेद-परिचय

Key ideas & terms

संगच्छध्वम्
मिलकर साथ चलो; एक साथ आगे बढ़ो।
संवदध्वम्
एक स्वर से, सहमतिपूर्वक बोलो।
मनांसि
मन (बहुवचन); परस्पर मनोभाव।
देवाः
सृष्टि की मूलभूत ब्रह्माण्डीय शक्तियाँ (अग्नि, वायु आदि)।
संज्ञान-सूक्तम्
ऋग्वेद का वह सूक्त जो एकता व सामञ्जस्य का सन्देश देता है।
ऋग्वेदः
चार वेदों में प्रथम; इसी से यह सूक्त गृहीत है।

Extra questions & answers

यह पाठ किस वेद से लिया गया है?

ऋग्वेद के अन्तिम दशम मण्डल के संज्ञान-सूक्त (संघटन-सूक्त) से।

"संगच्छध्वं संवदध्वम्" का क्या अभिप्राय है?

मिलकर साथ चलो और एक स्वर से बोलो — अर्थात् एकता और सहमति से कार्य करो।

विजय-प्राप्ति के लिए क्या आवश्यक है?

एकता, परस्पर सामञ्जस्य और मिलकर कार्य करना।

सर्वेषां मनः कैसा होना चाहिए?

सबका मन समान, सौमनस्यपूर्ण और एकरूप होना चाहिए।

देवों का उदाहरण किसलिए दिया गया है?

यह दिखाने के लिए कि देवशक्तियाँ भी परस्पर समन्वय से अपना कर्तव्य निभाती हैं, वैसे ही मनुष्यों को मिलकर कार्य करना चाहिए।

वेद के चार संहिता कौन-से हैं?

ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद।

इस सूक्त के दो प्रसिद्ध नाम क्या हैं?

"संज्ञान-सूक्त" और "संघटन-सूक्त"।

मन्त्रों का मूल सन्देश किसके कल्याण के लिए है?

परिवार, समाज, राष्ट्र और सम्पूर्ण विश्व के कल्याण के लिए।

सब किसका परित्याग कर ऐक्यभाव से जीएँ?

वैमनस्य (मनोभेद और द्वेष) का परित्याग कर ऐक्यभाव से जीएँ।

संगठन-भाव से जीने पर क्या-क्या प्राप्त होता है?

प्रसन्नता, उत्साह, आरोग्य, विजय, समृद्धि, ज्ञान और शान्ति प्राप्त होती है।