सन्निमित्ते वरं त्यागः (क-भागः) — Class 8 Sanskrit
दीपकम् · Chapter 10
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Chapter summary
यह पाठ हितोपदेश से लिया गया है और इसका पहला भाग (क-भागः) कर्तव्यनिष्ठ राजपुत्र वीरवर की कथा प्रस्तुत करता है। शोभावती नगरी में शूद्रक नामक पराक्रमी और शास्त्रज्ञ राजा रहता था। वीरवर नामक राजपुत्र अपने परिवार सहित आजीविका के लिए राजद्वार पर आता है और प्रतिदिन चार सौ स्वर्णमुद्राओं के वेतन पर सेवा में नियुक्त हो जाता है। वह अपने वेतन का आधा देवकार्य में, एक भाग दरिद्रों में बाँटता है और शेष परिवार के लिए रखता है; दिन-रात खड्ग लेकर राजद्वार की रक्षा करता है। एक रात राजा एक करुण रोदन सुनता है और वीरवर को उसका पता लगाने भेजता है; स्वयं भी छिपकर पीछे जाता है। वीरवर नगर के बाहर एक दिव्य आभूषणों से सजी स्त्री को रोते देखता है, जो स्वयं को राजा शूद्रक की राजलक्ष्मी बताती है। वह कहती है कि तीसरे दिन राजा की मृत्यु हो जाएगी, इसलिए वह अनाथ होकर रोती है। राजा को बचाने का एक अत्यन्त कठिन उपाय वह बताती है।
वीरवर की कथाराजा शूद्रकस्वामिभक्ति और कर्तव्यनिष्ठाराजलक्ष्मी का रोदनदुःसाध्य उपायहितोपदेश
Key ideas & terms
- वीरवरः
- कर्तव्यनिष्ठ, स्वामिभक्त राजपुत्र।
- शूद्रकः
- शोभावती नगरी का पराक्रमी राजा।
- राजलक्ष्मीः
- राजा की राजलक्ष्मी, जो रोती हुई दिखती है।
- वर्तनम्
- वेतन।
- दौवारिकः
- द्वारपाल।
- दुःसाध्या
- कठिनाई से साधने योग्य।
Extra questions & answers
यह कथा किस ग्रन्थ से ली गई है?
हितोपदेश से।
शोभावती नगरी का राजा कौन था और कैसा था?
शूद्रक, जो महापराक्रमी, नानाशास्त्रवित् और पवित्रचरित्र राजा था।
वीरवर कौन था और क्यों राजद्वार आया?
एक कर्तव्यनिष्ठ राजपुत्र, जो आजीविका (वृत्ति) के लिए परिवार सहित राजद्वार आया।
वीरवर का वेतन कितना था?
प्रतिदिन चार सौ स्वर्णमुद्राएँ।
"का ते सामग्री?" के उत्तर में वीरवर ने क्या कहा?
ये दोनों भुजाएँ और यह खड्ग — यही मेरी सामग्री है।
वीरवर अपने वेतन का उपयोग कैसे करता था?
आधा देवकार्य में, एक भाग दरिद्रों में, और शेष परिवार के भोजन-व्यय के लिए रखता था।
राजा ने रात में क्या सुना?
किसी का करुण रोदन-ध्वनि।
नगर के बाहर वीरवर को कौन रोती हुई मिली?
राजा शूद्रक की राजलक्ष्मी।
राजलक्ष्मी क्यों रो रही थी?
क्योंकि तीसरे दिन राजा की मृत्यु हो जाएगी और वह अनाथ हो जाएगी।
राजा को बचाने का उपाय कैसा था?
अत्यन्त दुःसाध्य (कठिन) — वीरवर को अपनी सबसे प्रिय वस्तु देवी सर्वमङ्गला को उपहार में चढ़ानी होगी।


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