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सुभाषितरसं पीत्वा जीवनं सफलं कुरु — Class 8 Sanskrit

दीपकम् · Chapter 3

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Chapter summary

यह पाठ सुभाषितों (नीतिश्लोकों) का संकलन है और बताता है कि "सुष्ठु भाषित" अर्थात् शोभन, हितकारी वचन ही सुभाषित कहलाते हैं। पितामही और बालक के संवाद के माध्यम से पाठ आरम्भ होता है। श्लोकों में अनेक जीवनोपयोगी नीतियाँ प्रस्तुत हैं — भारतभूमि की महिमा, गुणी ही गुण को पहचानता है (जैसे कोयल वसन्त को और हाथी सिंह के बल को जानता है), फलों के भार से वृक्ष और जल से भरे मेघ झुक जाते हैं, वैसे ही सज्जन समृद्धि में विनम्र रहते हैं। सोने की तरह मनुष्य की भी चार कसौटियाँ — कुल, शील, गुण और कर्म — से परीक्षा होती है। आठ गुण (प्रज्ञा, कुलीनता, संयम, शास्त्रज्ञान, पराक्रम, मितभाषिता, दान, कृतज्ञता) मनुष्य को शोभा देते हैं। दुर्जन से मैत्री नहीं करनी चाहिए, और पुरुषार्थ के बिना केवल भाग्य से कार्य सिद्ध नहीं होता — जैसे एक पहिये से रथ नहीं चलता। पाठ का सन्देश है कि सुभाषितों का अध्ययन कर जीवन को सुखमय और सफल बनाना चाहिए।
सुभाषितों का महत्त्वभारतभूमि की महिमागुण की पहचानचार कसौटियाँआठ गुणपुरुषार्थ और भाग्य

Key ideas & terms

सुभाषितम्
शोभन, हितकारी वचन (सुष्ठु + भाषितम्)।
गुणी
गुणवान, जो दूसरों के गुण पहचान सके।
कनकम्
सोना; जिसकी चार प्रकार से परीक्षा होती है।
सत्पुरुषाः
सज्जन लोग, जो समृद्धि में भी विनम्र रहते हैं।
पुरुषकारः
पुरुषार्थ, प्रयत्न; जिसके बिना भाग्य सिद्ध नहीं होता।
दुर्जनः
दुष्ट व्यक्ति, जिससे मैत्री वर्जित है।

Extra questions & answers

"सुभाषित" शब्द का अर्थ क्या है?

सुष्ठु (शोभन) भाषित — अच्छे, हितकारी वचन।

भारतभूमि की महिमा श्लोक में किस प्रकार बताई गई है?

इस भूमि पर जन्म लेने वालों को देव भी धन्य कहते हैं; मोक्ष के मार्गभूत इस भूमि पर देव भी मनुष्य रूप में जन्म चाहते हैं।

"गुणी गुणं वेत्ति" से क्या तात्पर्य है?

गुणवान ही दूसरों के गुणों को पहचान सकता है; निर्गुण नहीं।

वृक्ष और मेघ किस कारण झुकते हैं, और इससे क्या शिक्षा मिलती है?

वृक्ष फलों के भार से और मेघ जल से भरकर झुकते हैं; इससे सीख मिलती है कि सज्जन समृद्धि में विनम्र रहते हैं।

मनुष्य की परीक्षा किन चार बातों से होती है?

कुल, शील, गुण और कर्म से।

कौन-से आठ गुण मनुष्य को शोभा देते हैं?

प्रज्ञा, कुलीनता, संयम (दम), शास्त्रज्ञान, पराक्रम, मितभाषिता, यथाशक्ति दान और कृतज्ञता।

कोयल और हाथी का उदाहरण किसलिए दिया गया है?

यह दिखाने के लिए कि योग्य ही गुण/बल को पहचानता है — कोयल वसन्त को और हाथी सिंह के बल को जानता है।

दुर्जन से मैत्री क्यों नहीं करनी चाहिए?

क्योंकि दुर्जन अंगारे के समान है — गर्म हो तो जलाता है, ठंडा हो तो हाथ काला करता है; वह विश्वासयोग्य नहीं होता।

"एक पहिये से रथ नहीं चलता" का तात्पर्य क्या है?

जैसे एक पहिये से रथ नहीं चलता, वैसे ही पुरुषार्थ (प्रयत्न) के बिना केवल भाग्य से कार्य सिद्ध नहीं होता।

सच्ची सभा कौन-सी मानी गई है?

वही जहाँ ज्ञानवृद्ध जन हों जो धर्म कहें, और जहाँ सत्य का पालन हो।