सन्निमित्ते वरं त्यागः (ख-भागः) — Class 8 Sanskrit
दीपकम् · Chapter 11
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Chapter summary
यह वीरवर-कथा का दूसरा भाग (ख-भागः) है, जो त्याग की पराकाष्ठा दर्शाता है। राजलक्ष्मी से सुने कठिन उपाय को वीरवर अपने परिवार को बताता है। उसका पुत्र शक्तिधर प्रसन्नता से कहता है कि स्वामी के जीवन की रक्षा के लिए वही (पुत्र) ही पिता की सबसे प्रिय वस्तु है, अतः उसका बलिदान सबसे श्रेष्ठ है — "सन्निमित्ते वरं त्यागः" (अच्छे कारण के लिए त्याग ही श्रेष्ठ है)। पत्नी और पुत्री भी सहमत होती हैं। सर्वमङ्गला देवी के मन्दिर में वीरवर पूजा कर पुत्र को समर्पित करता है, और पुत्र-वियोग से दुःखी होकर स्वयं को भी समर्पित कर देता है; पत्नी और पुत्री भी वैसा ही करती हैं। छिपकर सब देखता राजा शूद्रक भी इस अद्वितीय त्याग को देखकर स्वयं अपना राज्य और जीवन त्यागने को उद्यत होता है। तब देवी प्रकट होकर प्रसन्न होती हैं और सबको पुनर्जीवित कर देती हैं। राजा अत्यन्त प्रसन्न होकर वीरवर को सम्पूर्ण कर्णाट-प्रदेश प्रदान करता है। पाठ परोपकार और निःस्वार्थ त्याग का आदर्श प्रस्तुत करता है।
त्याग की पराकाष्ठापुत्र का बलिदानपरिवार का समर्पणदेवी सर्वमङ्गलापुनर्जीवनपरोपकार का आदर्श
Key ideas & terms
- सन्निमित्ते
- उत्तम/अच्छे कारण के होने पर।
- त्यागः
- बलिदान, समर्पण।
- शक्तिधरः
- वीरवर का पुत्र, जो पहले समर्पित होता है।
- सर्वमङ्गला
- देवी, जिसे उपहार समर्पित किया जाता है।
- राज्यभङ्गः
- राज्य का नाश।
- वात्सल्यम्
- स्नेह, वात्सल्य-भाव।
Extra questions & answers
"सन्निमित्ते वरं त्यागः" का क्या अर्थ है?
अच्छे/उत्तम कारण के लिए किया गया त्याग ही श्रेष्ठ है।
वीरवर की सबसे प्रिय वस्तु कौन थी?
उसका पुत्र शक्तिधर।
शक्तिधर ने अपने बलिदान पर क्या कहा?
कि स्वामी के जीवन की रक्षा के लिए उसका समर्पण परम श्लाघ्य (प्रशंसनीय) है।
"धनानि जीवितं च" किसके लिए त्यागने योग्य हैं?
बुद्धिमान को परोपकार (परार्थ) के लिए धन और जीवन भी त्याग देना चाहिए।
वीरवर ने किसके मन्दिर में पूजा की?
देवी सर्वमङ्गला के।
पुत्र-समर्पण के बाद वीरवर ने क्या किया?
पुत्र-वियोग से दुःखी होकर अपने जीवन को निष्फल मानकर स्वयं को भी देवी को समर्पित कर दिया।
यह सब देखकर राजा शूद्रक क्या करने को उद्यत हुआ?
अपना राज्य और जीवन भी त्यागने को।
देवी सर्वमङ्गला ने प्रसन्न होकर क्या किया?
प्रकट होकर सबको पुनर्जीवित कर दिया।
राजा ने प्रसन्न होकर वीरवर को क्या दिया?
सम्पूर्ण कर्णाट-प्रदेश।
अगले दिन वीरवर ने राजा से उस घटना के विषय में क्या कहा?
कि वह रोती हुई स्त्री उसके दर्शन मात्र से अदृश्य हो गई; और कोई बात नहीं हुई।


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