अल्पानामपि वस्तूनां संहतिः कार्यसाधिका — Class 8 Sanskrit
दीपकम् · Chapter 2
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Chapter summary
यह पाठ हितोपदेश के "मित्रलाभ" प्रकरण से ली गई कथा पर आधारित है और यह नीति सिखाता है कि छोटी एवं निर्बल वस्तुओं का भी संगठन (संहति) बड़ा कार्य सिद्ध कर देता है। कथा-संदर्भ में कुछ विद्यार्थी केदारक्षेत्र की यात्रा में अकस्मात् भयंकर वर्षा और बाढ़ में फँस जाते हैं; पुल टूट जाता है और सब निराश हो जाते हैं। उनका धीर नायक उन्हें साहस बँधाने के लिए हितोपदेश की एक कथा सुनाता है। कथा में चित्रग्रीव नामक कपोतराज अपने साथियों के साथ एक व्याध (बहेलिये) के जाल में फँस जाता है। चित्रग्रीव की सूझबूझ से सभी कपोत एक साथ, एक चित्त होकर जाल समेत उड़ जाते हैं। फिर वे अपने मित्र हिरण्यक नामक मूषकराज के पास जाते हैं, जो अपने दाँतों से सबके बन्धन काट देता है और सब मुक्त हो जाते हैं। कथा सुनकर विद्यार्थी भी संगठन और बुद्धि के बल पर मिलकर सेतु बना लेते हैं और अपने तथा दूसरों के प्राण बचा लेते हैं। पाठ का सन्देश है — एकता और संगठन में ही शक्ति है।
संगठन में शक्तिचित्रग्रीव की युक्तिव्याध का जालमित्र हिरण्यकहितोपदेश की नीति-कथाधैर्य और सहयोग
Key ideas & terms
- संहतिः
- संगठन, मेल, एकजुटता।
- कार्यसाधिका
- कार्य को सिद्ध करने वाली।
- कपोतराजः
- कबूतरों का राजा — चित्रग्रीव।
- व्याधः
- बहेलिया, शिकारी; जो जाल बिछाता है।
- हिरण्यकः
- मूषकराज (चूहों का राजा), जो बन्धन काटता है।
- एकचित्तीभूय
- एक मन/एक चित्त होकर।
Extra questions & answers
पाठ का मूल नीति-वचन क्या है?
अल्प और निर्बल वस्तुओं का भी संगठन बड़ा कार्य सिद्ध कर देता है।
यह कथा किस ग्रन्थ से ली गई है?
हितोपदेश के "मित्रलाभ" प्रकरण से; इसके लेखक पण्डित नारायणशर्मा हैं।
कपोतों ने अपनी रक्षा कैसे की?
सब एक चित्त होकर जाल समेत एक साथ उड़ गए, फिर हिरण्यक ने उनके बन्धन काट दिए।
चित्रग्रीव का मित्र हिरण्यक कौन था और कहाँ रहता था?
मूषकराज, जो गण्डकी नदी के तीर पर चित्रवन में रहता था।
व्याध ने कपोतों को फँसाने के लिए क्या किया?
उसने चावल के दाने बिखेरकर जाल फैलाया और स्वयं छिपकर बैठ गया।
कपोत दानों को देखकर क्यों फँस गए?
लोभ के वश में आकर, चित्रग्रीव की चेतावनी की अवहेलना कर वे दाने खाने उतर पड़े।
विपत्ति में विस्मय (घबराहट) किसका लक्षण है?
कायरता (कापुरुषलक्षण) का।
विद्यार्थियों ने नायक की कथा से क्या सीखा?
कि संगठन और बुद्धि के बल पर मिलकर असम्भव कार्य भी सम्भव हो जाता है।
विद्यार्थियों ने अन्ततः क्या किया?
सबने मिलकर भगीरथ-प्रयत्न से सेतु बनाया और अपने तथा दूसरों के प्राण बचाए।
महात्माओं के स्वभावसिद्ध गुण कौन-से बताए गए हैं?
विपत्ति में धैर्य, उन्नति में क्षमा, सभा में वाक्पटुता और युद्ध में पराक्रम।


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