भारति, जय, विजयकरे! — Class 9 Hindi
गंगा · Chapter 10
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Chapter summary
Key ideas & terms
- भारति/भारतमाता
- कविता में भारत को चेतन देवी-रूप में चित्रित किया गया है, जिसकी विजय की कामना कवि करता है।
- कनक-शस्य-कमलधरे
- सोने जैसी फसलें और कमल धारण करने वाली — भारत की कृषि-संपन्नता और श्रम-सौंदर्य का प्रतीक संबोधन।
- प्रकृति-मानवीकरण
- वन-लता को वस्त्र, गंगा को हार और हिमालय को मुकुट बताकर प्रकृति को मानवीय रूप देना — कविता की प्रमुख विशेषता।
- प्रणव/ओंकार
- भारत के प्राणों में व्याप्त "ओम" की ध्वनि, जो उसकी आध्यात्मिक एवं ज्ञान-परंपरा का प्रतीक है।
- संस्कृतनिष्ठ भाषा
- समासयुक्त, तत्सम प्रधान भाषा जो कविता को ओज और गरिमा प्रदान करती है।
- रूपक अलंकार
- हिमालय को मुकुट और गंगा को हार बताना — उपमेय में उपमान का अभेद-आरोप करने वाला अलंकार।
Extra questions & answers
"भारति, जय, विजयकरे" कविता में विशेष रूप से क्या व्यक्त हुआ है?
इसमें भारत के ज्ञान, प्रकृति और संपन्नता की प्रशंसा तथा भारतमाता की विजय की कामना व्यक्त हुई है।
"कनक-शस्य-कमलधरे" का क्या भावार्थ है?
इसका भावार्थ है — सोने जैसी फसलों और कमल को धारण करने वाली; यह भारत की धन-धान्य संपन्नता और कृषि-सौंदर्य की ओर संकेत करता है।
कवि ने भारत को किस रूप में चित्रित किया है?
कवि ने भारत को एक चेतन देवी के रूप में चित्रित किया है, जिसके चरणों को तीनों सागरों का जल धोता है और जिसकी प्राकृतिक शोभा उसके वस्त्राभूषण हैं।
भारत के वस्त्र और आभूषण किन्हें बताया गया है?
तरु, तृण, वन और लता को भारत के वस्त्र, आँचल में जड़े फूलों को आभूषण, गंगा की धवल धारा को गले का हार और हिमालय के हिम को मुकुट बताया गया है।
हिमालय को भारत का मुकुट क्यों कहा गया है?
हिमालय उत्तर में सबसे ऊँचा और श्वेत हिम से ढका है; कवि कल्पना के बल पर उसे भारत का श्वेत मुकुट बताकर देश को भव्य एवं दिव्य रूप देता है — यह रूपक अलंकार है।
"प्राण प्रणव ओंकार" से क्या भाव व्यक्त होता है?
इससे भाव व्यक्त होता है कि भारत के प्राणों में "ओम" की पवित्र ध्वनि व्याप्त है; यह उसकी आध्यात्मिक और ज्ञान-परंपरा का प्रतीक है।
"शतमुख-शतरव-मुखरे" का क्या आशय है?
इसका आशय है कि भारत की उदार दिशाओं में सैकड़ों मुख और सैकड़ों स्वर मुखरित हो रहे हैं; यह भारत की विविधता और स्वरों की समृद्धि को दर्शाता है।
कविता की भाषा और शैली की क्या विशेषता है?
इसकी भाषा संस्कृतनिष्ठ, समासयुक्त और ओजपूर्ण है, जो देशप्रेम के भाव को गरिमा एवं भव्यता प्रदान करती है।
कविता में प्रकृति-मानवीकरण कहाँ दिखाई देता है?
वन-लता को वस्त्र, गंगा को धवल हार और हिमालय को मुकुट के रूप में चित्रित करने में प्रकृति का मानवीकरण स्पष्ट दिखाई देता है।
कविता किस चेतना का संदेश देती है?
यह राष्ट्रीयता, देशप्रेम तथा प्रकृति और संस्कृति के संरक्षण की चेतना का संदेश देती है — भारत की संपन्नता और ज्ञान-परंपरा पर गर्व जगाती है।


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