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मैं और मेरा देश — Class 9 Hindi

गंगा · Chapter 7

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Chapter summary

कन्हैयालाल मिश्र "प्रभाकर" का यह निबंध व्यक्ति और राष्ट्र के अविभाज्य संबंध को गहराई से स्थापित करता है। लेखक पहले स्वयं को घर, पड़ोस और नगर में पूर्ण मानता था, पर लाला लाजपत राय के एक कथन ने उसके "मानस में भूकंप" ला दिया — "जहाँ भी मैं गया, भारतवर्ष की गुलामी की लज्जा का कलंक मेरे माथे पर लगा रहा।" इससे लेखक समझता है कि चाहे किसी के पास संसार के सब साधन हों, यदि उसका देश पराधीन या हीन है तो वे साधन उसे गौरव नहीं दे सकते। वह बताता है कि हर नागरिक अपने देश के लिए बहुत कुछ कर सकता है — जैसे युद्ध में जय बोलने वालों और दर्शकों की तालियों का भी महत्त्व होता है। स्वामी रामतीर्थ को फल देने वाले जापानी युवक और पुस्तक से चित्र चुराने वाले विदेशी विद्यार्थी की दो कहानियों, तथा कमालपाशा और नेहरू द्वारा साधारण भेंट के सम्मान के उदाहरणों से वह सिद्ध करता है कि कार्य की महानता उसके पीछे की भावना में है। अंत में वह देश के "शक्ति-बोध" और "सौंदर्य-बोध" की रक्षा तथा निष्पक्ष मतदान को नागरिक का कर्तव्य बताता है।
व्यक्ति और राष्ट्र की एकतालाला लाजपत राय का कथनदेशप्रेम की कहानियाँभावना का महत्त्वशक्ति-बोध, सौंदर्य-बोध और मतदान

Key ideas & terms

व्यक्ति और राष्ट्र का संबंध
निबंध का केंद्रीय विचार — नागरिक और देश एक-दूसरे से अटूट रूप से जुड़े हैं; देश की हीनता-गौरव का फल व्यक्ति को और व्यक्ति की का फल देश को मिलता है।
लाला लाजपत राय
पंजाब-केसरी स्वतंत्रता सेनानी, जिनके अनुभव-कथन ने लेखक के मानस में परिवर्तन (भूकंप) ला दिया।
शक्ति-बोध
देश की सामूहिक शक्ति और आत्मविश्वास का भाव; इसे ठेस पहुँचाने वाला कोई काम नहीं करना चाहिए।
सौंदर्य-बोध
देश की संस्कृति, स्वच्छता और सुरुचि का भाव; गंदगी फैलाना या असभ्य आचरण इसे आघात पहुँचाता है।
भावना का महत्त्व
लेखक का मूल मत — कार्य की महानता उसकी विशालता में नहीं, बल्कि उसके पीछे की अच्छी भावना में है।
निष्पक्ष चुनाव
देश की उच्चता-हीनता की कसौटी; योग्य व्यक्ति को सोच-समझकर मत देना नागरिक का कर्तव्य है।

Extra questions & answers

लेखक के "मानस में भूकंप" से क्या तात्पर्य है?

लाला लाजपत राय के कथन — कि विदेश में भी भारत की गुलामी का कलंक उनके माथे पर लगा रहा — ने लेखक की पूर्णता के भाव को हिला दिया; यही मानसिक भूकंप है।

स्वामी रामतीर्थ फल देने वाले युवक के उत्तर पर मुग्ध क्यों हुए?

जापानी युवक ने फल के दाम लेने से इनकार करते हुए केवल यह माँगा कि वे अपने देश में किसी से न कहें कि जापान में अच्छे फल नहीं मिलते; इस देशप्रेम पर स्वामी जी मुग्ध हो गए।

पुस्तक से चित्र चुराने वाले विद्यार्थी की घटना से क्या सिद्ध होता है?

उसके अपराध के कारण उसके पूरे देश के निवासियों का पुस्तकालय में प्रवेश रोक दिया गया; इससे सिद्ध होता है कि नागरिक की हीनता का फल उसके देश को भी भुगतना पड़ता है।

"जय बोलने वालों" के महत्त्व से लेखक क्या समझाना चाहता है?

जैसे दर्शकों की तालियों से खिलाड़ियों में बल आता है, वैसे ही हर साधारण नागरिक भी अपने उत्साह और सहयोग से देश के सम्मान की रक्षा में योगदान दे सकता है।

कमालपाशा ने बूढ़े किसान का साधारण उपहार क्यों स्वीकार किया?

मिट्टी की हँडिया में लाए पाव-भर शहद के पीछे बूढ़े के हृदय का शुद्ध प्यार था; उसी भावना के कारण कमालपाशा ने उसे सर्वोत्तम उपहार माना।

कार्य की महानता किसमें निहित है?

लेखक के अनुसार कार्य की महानता उसकी विशालता में नहीं, बल्कि उसके पीछे की अच्छी भावना में है; अच्छी भावना के बिना बड़ा कार्य भी हीन है।

देश को किन दो बातों की सबसे अधिक आवश्यकता है?

देश को शक्ति-बोध और सौंदर्य-बोध की आवश्यकता है; कोई भी काम ऐसा न हो जो देश में कमजोरी या कुरुचि की भावना को बल दे।

नागरिक देश के शक्ति-बोध को कैसे ठेस पहुँचाता है?

जब वह सार्वजनिक स्थानों पर अपने देश को बार-बार हीन और दूसरे देशों को श्रेष्ठ बताता है, तो देश के सामूहिक मानसिक बल का ह्रास होता है।

"मैं और मेरा देश दो अलग चीज़ें नहीं" — इसका आधार क्या है?

जैसे व्यक्ति अपने सम्मान और साधनों से सहारा पाता है, वैसे ही देश के सम्मान और साधनों से भी; इसलिए देश के लाभ-सम्मान का ध्यान रखना उसका कर्तव्य और अधिकार दोनों है।

देश की उच्चता-हीनता की कसौटी लेखक किसे मानता है?

वह निष्पक्ष चुनाव को कसौटी मानता है — जिस देश के नागरिक सोच-समझकर योग्य व्यक्ति को मत देते हैं वह उच्च है, और जो गलत प्रभाव में मत देते हैं वह हीन है।