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आखिरी चट्टान तक — Class 9 Hindi

गंगा · Chapter 5Trending

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Chapter summary

मोहन राकेश का यह यात्रा-वृत्तांत कन्याकुमारी की उनकी यात्रा के रोमांचक अनुभवों को सजीव शैली में प्रस्तुत करता है। बंगाल की खाड़ी, हिंद महासागर और अरब सागर के संगम-स्थल पर खड़े होकर लेखक भारत के स्थल-भाग की आखिरी चट्टान को देखता है, जिस पर कभी स्वामी विवेकानंद ने समाधि लगाई थी। ऊँची लहरों से घिरी चट्टान पर वह "शक्ति का विस्तार, विस्तार की शक्ति" को अनुभव करता है और एक क्षण के लिए स्वयं को दृश्य का हिस्सा-सा मान लेता है। फिर सूर्यास्त देखने के लिए वह सैंड हिल और एक के बाद एक रेत के टीले पार करता है, जहाँ सूर्य पानी में डूबते समय सोने से लहू और फिर बैंजनी-काला रंग बदलता है। लौटते समय बढ़ते समुद्र, स्याह रेत के अनगिनत रंगों और ऊँची लहरों से जूझते हुए वह संकट और रोमांच का अनुभव करता है। अगले दिन सूर्योदय पर विवेकानंद चट्टान पर बैठा वह स्थानीय बेरोजगार युवकों की पीड़ा और जीवन-संघर्ष को भी देखता है। यह वृत्तांत प्रकृति की भव्यता, आत्म-चेतना और मानव-जीवन की झलक का सुंदर समन्वय है।
तीन सागरों का संगमसूर्यास्त और रेत के टीलेरंगों की रेतलहरों से संघर्षस्थानीय जीवन और बेरोजगारी

Key ideas & terms

यात्रा-वृत्तांत
गद्य की वह विधा जिसमें लेखक अपनी यात्रा के अनुभव, दृश्य और भावनाएँ सजीव रूप से प्रस्तुत करता है।
विवेकानंद चट्टान
कन्याकुमारी के तट से दूर समुद्र में स्थित वह चट्टान जहाँ स्वामी विवेकानंद ने समाधि लगाई थी; तीनों सागरों का संगम-स्थल।
सैंड हिल
रेत का ऊँचा टीला, जहाँ से लोग कन्याकुमारी का सूर्यास्त देखते हैं।
"शक्ति का विस्तार, विस्तार की शक्ति"
लेखक की वह आत्मानुभूति जिसमें वह असीम समुद्र की व्यापकता और शक्ति को अपनी समूची चेतना से अनुभव करता है।
चित्रात्मक भाषा
शब्दों से पाठक के मन में जीवंत दृश्य उपस्थित करने वाली प्रवाहपूर्ण, बिंबमयी भाषा — इस वृत्तांत की विशेषता।
रंगों की रेत
समुद्र-तट की सरमई, खाकी, पीली, लाल और अनगिनत अनाम रंगों वाली रेत, जिसका लेखक मार्मिक वर्णन करता है।

Extra questions & answers

लेखक ने सूर्यास्त का मनोहारी दृश्य कहाँ से देखा?

उसने अरब सागर की ओर के ऊँचे टीले से सूर्यास्त देखा, जहाँ से पश्चिमी क्षितिज का खुला विस्तार दिखाई देता था।

लेखक सैंड हिल पर रुककर आगे क्यों बढ़ता गया?

सैंड हिल से अरब सागर की ओर का विस्तार एक ऊँचे टीले की ओट में था; पूरा खुला क्षितिज देखने के लिए वह एक-एक करके कई टीले पार करता गया।

"शक्ति का विस्तार, विस्तार की शक्ति" का क्या आशय है?

तीनों ओर क्षितिज तक फैले असीम समुद्र को देखकर लेखक उसकी व्यापकता और शक्ति को अपनी पूरी चेतना से अनुभव करता है — यही इस वाक्य का भाव है।

सूर्यास्त के समय पानी के रंग कैसे बदलते हैं?

पहले पानी पर सोना ढुलता है, फिर सूर्य डूबने पर वहाँ लहू-सा लाल रंग बहता दिखता है, और कुछ क्षण बाद वह बैंजनी से काला पड़ जाता है।

लौटते समय लेखक को किस संकट का सामना करना पड़ा?

समुद्र में पानी बढ़ने से तट सँकरा होता गया; ऊँची लहरों से बचते हुए, चट्टान से टकराते हुए वह किसी तरह सुरक्षित स्थान तक पहुँचा।

स्थानीय ग्रेजुएट युवक ने लेखक को क्या बताया?

उसने बताया कि कन्याकुमारी की आबादी में सैकड़ों शिक्षित युवक बेरोजगार हैं, जो नौकरियों के लिए अर्ज़ियाँ देते और सीपियों का गूदा खाकर दार्शनिक बहसें करते हैं।

विवेकानंद चट्टान तक पहुँचने में लेखक को कैसा अनुभव हुआ?

मल्लाहों की छोटी मछुआ नाव में नुकीली चट्टानों और ऊँची लहरों से बचते हुए पहुँचने पर उसका डर टाँगों में उतर आया, यद्यपि उसने उसे दिखावटी उदासीनता से ढकना चाहा।

"प्रयत्न की सार्थकता" से लेखक का क्या अभिप्राय है?

अनेक टीले पार करने के बाद जब उसे खुला विस्तार दिख गया, तो उसे ऐसा संतोष हुआ मानो उसने संसार की सबसे ऊँची चोटी सर कर ली हो — यही उसके प्रयत्न की सार्थकता है।

यह यात्रा-वृत्तांत किन तत्त्वों का समन्वय है?

यह प्रकृति के सजीव दृश्य-वर्णन, आत्म-चेतना, क्षणभंगुरता के बोध तथा स्थानीय समाज और जीवन-संघर्ष की झलक का सुंदर समन्वय है।

लेखक की किस प्रवृत्ति का इस वृत्तांत में परिचय मिलता है?

टीले पर टीला पार करते जाना और संकट में भी हार न मानना उसकी मानसिक दृढ़ता एवं जिज्ञासु, साहसी प्रवृत्ति का परिचय देता है।